
*एक शख्स ने हज़रत मौला ऐ कायनात शेरे खुदा से कहा : या अली अलैहिस्सलाम आप की शान मे तो रसूल सल्लल्लाहु अलैही व आलिही वसल्लम ने बहुत सारी अहादीस बयान फरमाई है और क़ुरान मे भी बहुत सारी आयात मे आप की शान मे तारीफ है _ मगर मै आज आप की ज़बान से आप की शान वाली वह आयात सुन्ना चाहता हूं! जो आप को बहुत पसन्द हाे हज़रत मौला ऐ कायनात शेरे खुदा ने फरमाया सुनू ऐ शख्स मर्द काे ये ज़ेब नहीं देता के वह अपनी तारीफ खुद करें _ मगर तुम ने सवाल किया है तो सुनू: फिर `हज़रत मौला ऐ कायनात शेरे खुदा ने क़ुरान की सूरह रअद की आखरी आयात तिलावत फरमाई! जिस का मतलब यह हे ऐ रसूल सल्लल्लाहु अलैही व आलिही वसल्लम अगर ये इनकार करने वाले आप को नबी नहीं मानते तो आप परेशान मत हाे _ आप तो अल्लाह के नबी हो _ और इसका गवाह अल्लाह है और वह शख्स भी जिसके पास कुल किताब का इल्म है मौला अली शेरे खुदा ने अपने सीने पर हाथ मारा और फरमाया वह जिसके पास कुल किताब का इल्म है वह मैं अली हूं ! मुझ अली काे फख्र इस बात का हे के रसूल सल्लल्लाहु अलैही व आलिही वसल्लम की नबूवत की गवाही मे अल्लाह ने मुझ अली को अपने साथ रखा है*_

