नासबी अक्सर एक रिवायत जो हज़रत मुहम्मद बिन हंफ़ीया से मरवी है उसे पेश करते हैं के हज़रत अली ने ख़ुद फ़रमाया ” मैं एक आम मुसलमान हूं “
मौला अली का ख़ुद को आम मुसलमान कहना ये “बड़े लोगों की आला लोगों की शान होती है दूसरों के सामने वो आजिज़ी इंकेसारी ज़ाहिर करते हैं
लेकिन नासबी साज़िशन इस रिवायत को जान बूझ कर मौला अली का मक़ाम ओ मर्तबा कम करने की नाकाम कोशिश के तहेत पेश करते हैं
आईये हम हज़रत अबु बकर के ऐसे ही आजिज़ाना अल्फ़ाज़ दिखाते हैं
“लोगो ने बैत ए सक़िफ़ा के बाद हज़रत अबु बकर की बैत ए आम्मा की इसके बाद हज़रत अबु बकर ने लोगों से खिताब किया और हम्दो सनआ के बाद फ़रमाया
लोगों मुझे तुम्हारा वली बनाया गया है लेकिन मैं तुम्हारा #बेहतरीन आदमी नही हूं” ( अल बिदाया वन्निहया जिल्द 5 /340 )
हज़रत अबु बकर अगर ख़ुद ऐसे आजिज़ाना अल्फ़ाज़ अपने लिए इस्तेमाल करें तो क्या उनका मक़ाम ओ मर्तबा उनकी
फ़ज़ीलत कम हो जाती है ?
नही बल्कि इससे उनकी आला शान ज़ाहिर होती है

