चौदह सितारे पार्ट 1

हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.व.व.अ.) के मुख़्तसर ख़ानदानी हालात

पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (स.व.व.अ.) हज़रत इब्राहीम (स.व.व.अ.) की नस्ल से थे। हज़रत इब्राहीम अहवाज़, बाबुल या ईराक़ के एक क़रये कोसा में तूफ़ाने नूह से 1081 साल बाद पैदा हुए। जब आपकी उम्र 86 साल की हुई तो आपके यहां जनाबे हाजरा से हज़रे इस्माईल पैदा हुए और 90 साल की उम्र जनाबे सारा से हज़रते इस्हाक़ पैदा हुए। हज़रत इब्राहीम (अ.स.) ने दोनों बीवीयों को एक जगह रखना मुनासिब न समझ कर सारा को मैय इस्हाक़ शाम में छोड़ा और हाजरा को इस्माईल के साथ हिजाज़ के शहर मक्का में ख़ुदा के हुक्म से पहुँचा आये । इस्हाक़ (अ.स.) की शादी शाम में और इस्माईल (अ.स.) की मक्का में क़बीलाए जुरहुम की एक लड़की से हुई। इस तरह इस्हाक़ (अ.स.) की नस्ल शाम में और इस्माईल (अ.स.) की नस्ल मक्का में बढ़ी। जब हज़रते इब्राहीम (अ.स.) की उम्र 100 साल की हुई और जनाबे हाजरा का इन्तेक़ाल भी हो गया तो आप मक्का तशरीफ़ लाये और इस्माईल (अ.स.) की मदद से ख़ाना ए काबा की तामीर की। मुर्रेख़ीन का कहना है कि यह तामीर हिजरते नबवी से 2793 साल पहले हुई थी। उन्होंने एक ख़्वाब के हवाले से बहुक्मे ख़ुदा अपने बेटे (इस्माईल)को ज़िबह करना चाहा था जिसके बदले में ख़ुदा ने दुम्बा (भेड़) भेज कर फ़रमाया कि तुम ने अपना ख़्वाब सच कर दिखाया । इब्राहीम सुनो ! हम ने तुम्हारे फ़िदये (इस्माईल) को ज़बहे अज़ीम इमामे हुसैन (अ.स.) से बदल दिया है। मुर्रेख़ीन का कहना है कि यह वाक़िया हज़रत आदम (अ.स.) के दुनिया में आने के 3435 साल बाद का है। इसके बाद चन्द बातों में आपका इम्तेहान लिया गया जिसमें कामयाबी के बाद आपको दरजाए इमामत पर फ़ाएज़ किया गया। आपने ख़्वाहिश की कि यह ओहदा मेरी नस्ल से मुस्तकर कर दिया जाय । इरशाद हुआ बेहतर है लेकिन तुम्हारी नस्ल में जो ज़ालिम होंगे वह इस्से महरूम रहेंगे। आपका लक़ब ख़लील अल्लाह था और आप उलुल अज़्म पैग़म्बर थे। आप साहबे शरीयत थे और ख़ुदा की बारगाह में आपका यह दरजा था कि ख़ातेमुल अम्बिया (स.व.व.अ.) को आपकी शरीयत के बाक़ी रखते का हुक्म दिया गया। आपने 175 साल की उम्र में इन्तेक़ाल फ़रमाया और मक़ामे कुद्स (ख़लील अर रहमान) में दफ़्न किये गये। वफ़ात से पहले आप ने अपना जानशीद हज़रते इस्माईल (अ.स.) को क़रार दिया। अंग्रेज़ इतिहासकारों का कहना है कि हज़रते इस्माईल का जन्म जनाबे मसीह से 1911 साल पहले हुआ था।

हज़रत इस्माईल (अ.स.) के यह ख़ास इमतेआज़ात हैं कि उन्हीं कि वजह से मक्का आबाद हुआ। चाह ज़मज़म बरामद हुआ। हज्जे काबा की इबादत की शुरुआत हुई। 10 ज़िलहिज को ईदे क़ुरबान की सुन्नत जारी हुई। आप का
इन्तेक़ाल 137 साल की आयु में हुआ और आप हिजरे इस्माईल मक्का के क़रीब दफ़्न हुए। आपने बारह बेटे छोड़े। आपकी वफ़ात के बाद ख़ाना ए काबा की निगरानी व दीगर ख़िदमात आपके पुत्र ही करते रहे। इनके पुत्रों में केदार को विशेष हैसियत हासिल थी ग़रज़ कि अवलादे हज़रत इस्माईल (अ.स.) मक्का मोअज़्ज़ाम में बढ़ती और नशोनुमा पाती रही यहां तक कि तीसरी सदी में एक शख़्स फ़हर नामी पैदा हुआ जो इन्तेहाई बा कमाल था। इस फ़हर की नस्ल से पैग़म्बरे इस्लाम पैदा हुए। अल्लामा तरीही का कहना है कि इसी फ़हर या इसके दादा नज़र बिन कनाना को क़ुरैश कहा जाता है क्यो कि बहरिल हिन्द से उसने एक बहुत बड़ी मछली शिकार की थी जिसको क़ुरैश कहा जाता था और उसे ला कर मक्का मे रख दिया था जिसे लोग देखने के लिये दूर दूर से आते थे। लफ़्ज़े फ़हर इब्रानी है और इसके मानी पत्थर के हैं और क़ुरैश के मानी क़दीम अरबी में सौदागर के हैं।

कुसई

पांचवीं सदी इसवी में एक बुजुर्ग फ़हर की नस्ल से गुज़रे हैं जिनका नाम कुसई था। शिबली नोमानी का कहना है कि उन्हीं कुसई को कुरैश कहते हैं लेकिन मेरे नज़दीक़ ये ग़लत है कुसई का असली नाम ज़ैद और कुन्नियत अबुल मुग़ैरा थी। उनके बाप का नाम कलाब और मां का नाम फातेमा बिन्ते असद और बीबी का नाम आतका बिन्दे ख़ालिख़ बिन लैक था
। यह निहायत ही नामवर, बुलन्द हौसला, जवां मर्द, अज़ीमुश्शान बुजुर्ग थे। उन्होंने ज़बरदस्त इज्ज़त व इख़तेदार हासिल किया था यह नेक चलन बा मुरव्वत, सख़ी व दिलेर थे। इनके विचार पवित्र और बेलौस थे। इनके एख़लाक़ बुलन्द, शाइस्ता और मोहज़्ज़ब थे। इनकी एक बीबी हबी बिन्ते ख़लील ख़ेज़ाईं थीं। यह ख़लील बनु ख़ज़आ का सरदार था। इसने मरने के समय ख़ाना ए काबा की तौलीयत हबी के हवाले कर देना चाही, इसने अपनी कमज़ोरी के हवाले से इन्कार कर दिया फिर उसने अपने एक रिश्तेदार अबू ग़बशान ख़ेज़ाई के सुपुर्द की। उसने इस अहम खिदमत को कुसई के हाथो बेच दिया। इस तरह कुसई इब्ने क़लाब इस अज़ीम शरफ़ के भी मालिक बन गए। उन्होंने ख़ाना ए काबा की मरम्मत कराई और बरामदा बनवाया। रिफ़ाहे आम के सिलसिले में अनगिनत खिदमते कीं। मक्का में कुवां खुदवाया जिसका नाम अजूल था। कुसई का देहान्त 480 ई0 में हुआ। मरने के बाद उन्हें मुक़ामे हजून में दफ़्न किया गया और उनकी क़ब्र ज़्यारत गाह बन गई। कुसई अगरचे नबी या इमाम न थे लेकिन हामिले नूरे मोहम्मदी ( स.व.व.अ.) थे। यही वजह है कि आसमाने फ़ज़ीलत के आफ़ताब बन गये।



Nabi Pakﷺ and his family part 2

Ahlul Bait Rasul & 12 Imams

The Messenger of Allah has said: “Whoever prays without blessing me and my will never be accepted.” This is recorded on p. 136 of al-Dar Qutni’s Sunan.

Ahl al-Bayt, his prayers

In his book Al-Sawa`iq al-Muhriqa, Ibn Hajar says, “Al-Daylami has quoted the Prophet saying that everyone’s supplication is withheld till he invokes Allah’s blessings unto Muhammad and the Progeny of Muhammad.” This is recorded on p. 88 of Ibn Hajar al-`Asqalani’s book Al-Sawa`iq al-Muhriqa.

Likewise, al-Tabrani in his Al-Awsat has quoted Ali, peace be upon him, saying that everyone’s supplication is withheld till he invokes divine blessings unto Muhammad and his Progeny. Fayd al-Qadeer, Vol. 5, p. 19. Kanz al-Ummal, Vol. 6, p. 173

So brothers Ahlulbayt
cannot be taken out of the scene. Right at the top is the prophets hadith as
you can see and read. So that means anyone praying namaz without blessing Prophet pbuh and his Ahlulbayt his namaz will never be accepted. Come on anyone can figure that out. I gave you some sayings with full reference so you cannot complain that these fabricated. I hope some people benefit from this.

#1Book 031, Number 5924 Saheeh Muslim

Thereupon Allah’s Messenger (may peace be upon him) said to himAren’t you satisfied with being unto me what Aaron was unto Moses but with this exception that there is no prophethood after me. And I (also) heard him say on the Day of Khaibar I would certainly give this standard to a person who loves Allah and his Messenger and Allah and his Messenger love him too. He (the narrator) said We have been anxiously waiting for it, when he (the Holy Prophet) said Call ‘Ali. He was called and his eyes were inflamed. He applied saliva to his eyes and handed over the standard to him, and Allah gave him victory. (The third occasion is this) when the (following) verse was revealed Let us summon our children and your children. Allah’s Messenger (may peace be upon him) called ‘Ali, Fitima, Hasan and Husain and said O Allah, they are my family.

Sahih Bukhari Narrated Jabir bin Samura: I heard the Prophet saying, “There will be twelve Muslim rulers (who will rule all the Islamic world).” He then said a sentence which I did not hear. My father said, “All of them (those rulers) will be from Quraish.”