अहमदे मुख़्तार

एक दिन हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मिम्बर पर जलवा अफ़रोज़ हुए। सहाबए किराम को मुखातिब फ़रमाकर इरशाद फरमायाः सुनो! अल्लाह किताब घर 307 सच्ची हिकायात हिस्सा-दोएम ने अपने एक बंदे को इख़्तियार दे दिया है कि वह जब तक चाहे दुनिया में रहे या वह अपने रब की मुलाकात को पसंद करे। बस उस बंदे अपने रब की मुलाक़ात को इख़्तियार कर लिया है। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का यह इरशाद सुनकर हज़रत सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु रोने लगे। सहाबए किराम ने सिद्दीक़े अकबर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को रोते हुए देखा तो बड़े हैरान हुए कि यह रोने क्यों लगे? फिर जब हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का विसाल शरीफ़ हुआ तो सहाबए किराम ने फरमायाः कि अब हम समझे कि सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु उस दिन क्यों रोये थे?

बस वह हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ही थे जिन्हें अल्लाह ने इख़्तियार दे दिया था और सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु वाक़ई हम सबसे ज्यादा समझदार हैं। (मिश्कात शरीफ सफा ५४६)

सबक़ : सहाबए किराम का ईमान था कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुख़्तार हैं। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी इसी हक़ीक़त हैं को ब्यान · रमाया था कि मैं मिन जानिब अल्लाह मुख़्तार (अल्लाह के दिये से इख़्तियार होना) हूं। मेरा दुनिया में रहना या विसाल फ़रमा जाना मेरे इख़्तियार में है। यह इख़्तियार मुझे अल्लाह तआला ने ही दिया है। मालूम हुआ कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का विसाल फ्रमा जाना हुजूर के अपने इख़्तियार में था। आपने चाहा तो आपका विसाल हुआ। बरअक्स इसके हम भी हैं जो मरना नहीं चाहते लेकिन मर जाते हैं। न अपनी मर्जी से आते हैं, और न अपनी मर्जी से मरते हैं बकौल शाइरः लाई हयात आये, कज़ा ले चली चले।
अपनी खुशी न आये, न अपनी खुशी चले।। फिर अगर कोई शख़्स हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मिस्ल (बराबर) बनने लगे और यूं कहे कि वह हमारे जैसे बशर थे तो किस केंद्र जुल्म है। यह भी मालूम हुआ कि सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु सारे सहाबा किराम से अफ़ज़ल व आला थे। इसलिये जब हुजूर ने फ्रमाया कि अल्लाह ने अपने एक बंदे को इख़्तियार दे दिया है तो आप फ़ौरन समझ गये कि यह खुद हुजूर ही हैं। हुजूर अपने ही विसाल की ख़बर दे रहे हैं और रोना शुरू कर दिया।

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