जंगे ख़ैबर से मुतअल्लिक़ कुछ अहम मालूमात

*अहलेसुन्नत की मशहूर व मारूफ़ किताब मुस्तद्रक हाकिम में जंगे ख़ैबर से मुतअल्लिक़ रिवायतों से इस जंग की कुछ अहम मालूमात पर नज़र डालते हैं*👉


حَدَّثَنَا أَبُو الْعَبَّاسِ مُحَمَّدُ بْنُ يَعْقُوبَ،
ثنا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ الْجَبَّارِ، ثنا يُونُسُ بْنُ بُكَيْرٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ، قَالَ: حَدَّثَنِي بُرَيْدَةُ بْنُ سُفْيَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ الْأَسْلَمِيُّ، عَنْ سَلَمَةَ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْأَكْوَعِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: «بَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ إِلَى بَعْضِ حُصُونِ خَيْبَرَ فَقَاتَلَ وَجُهِدَ وَلَمْ يَكُنْ فَتْحٌ» هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحُ الْإِسْنَادِ، وَلَمْ يُخَرِّجَاهُ “” أَخْبَرَنَا أَبُو قُتَيْبَةَ سَالِمُ بْنُ الْفَصْلِ الْآدَمِيُّ، بِمَكَّةَ، ثنا مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ أَبِي شَيْبَةَ، ثنا عَلِيُّ بْنُ هَاشِمٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنِ الْحَكَمِ، وَعِيسَى، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي لَيْلَى، عَنْ عَلِيٍّ أَنَّهُ قَالَ: يَا أَبَا لَيْلَى أَمَا كُنْتَ مَعَنَا بِخَيْبَرَ؟ قَالَ: بَلَى وَاللَّهِ كُنْتُ مَعَكُمْ، قَالَ: فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ «بَعَثَ أَبَا بَكْرٍ إِلَى خَيْبَرَ فَسَارَ بِالنَّاسِ وَانْهَزَمَ حَتَّى رَجَعَ» هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحُ الْإِسْنَادِ، وَلَمْ يُخَرِّجَاهُ “”
[التعليق – من تلخيص الذهبي] 4338 – صحيح
[التعليق – من تلخيص الذهبي] 4338 – صحيح
तर्जुमा👉
हज़रत सलमा बिन अक्वा र अ फ़रमाते हैं: *रसूलअल्लाह स अ व स ने हज़रत अबुबकर र अ को ख़ैबर के किले की जानिब भेजा, आप ने जंग की और बहुत जद्दोजहद की मगर फ़तह न हो सकी।*
हज़रत अबु लैला से मरवी है कि हज़रत अली र अ ने फ़रमाया: ए अबु लैला क्या तू हमारे साथ ख़ैबर में नही था ? उन्होंने जवाबन कहा :क्यों नही ? ख़ुदा की क़सम ! मैं तुम्हारे साथ ही तो था।हज़रत अली र अ ने फ़रमाया : *बेशक रसूलअल्लाह स अ व स ने हज़रत अबुबकर र अ को भेजा था, वो लोगों के हमराह दीवार फलाँग गए थे मगर नाकाम होकर वापस लौट आए थे।*
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أَخْبَرَنَا أَبُو الْعَبَّاسِ مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ الْمَحْبُوبِيُّ، بِمَرْوَ، ثنا سَعِيدُ بْنُ مَسْعُودٍ، ثنا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، ثنا نُعَيْمُ بْنُ حَكِيمٍ، عَنْ أَبِي مُوسَى الْحَنَفِيِّ، عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: «سَارَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى خَيْبَرَ، فَلَمَّا أَتَاهَا بَعَثَ عُمَرُ رَضِيَ اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُ، وَبَعَثَ مَعَهُ النَّاسَ إِلَى مَدِينَتِهِمْ أَوْ قَصْرِهِمْ، فَقَاتَلُوهُمْ فَلَمْ يَلْبَثُوا أَنْ هَزَمُوا عُمَرَ وَأَصْحَابَهُ، فَجَاءُوا يُجَبِّنُونَهُ وَيُجَبِّنُهُمْ فَسَارَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ» الْحَدِيثُ. «هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحُ الْإِسْنَادِ، وَلَمْ يُخَرِّجَاهُ»
[التعليق – من تلخيص الذهبي] 4340 – صحيح

तर्जुमा👉
हज़रत अली र अ फ़रमाते हैं : *रसूलअल्लाह स अ व स ने ख़ैबर की तरफ़ रवानगी की,जब वहाँ पहुँच गए तो आप अलैहिस्सलाम ने हज़रत उमर र अ को दुश्मन के महल की तरफ़ भेजा और हज़रत उमर के हमराह सहाबा र अ को भी भेजा।उन्होंने दुश्मन से जंग की,लेकिन हज़रत उमर और उनके साथियों को कामयाबी हासिल न हो सकी, ये लोग एक दूसरे को बुज़दिल क़रार देते हुए लौट कर वापस आ गए।*

4340 मुस्तद्रक हाकिम

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حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ أَحْمَدُ بْنُ سَلْمَانَ الْفَقِيهُ، بِبَغْدَادَ، ثنا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سُلَيْمَانَ، ثنا الْقَاسِمُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، ثنا يَحْيَى بْنُ يَعْلَى، ثنا مَعْقِلُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ، «أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَفَعَ الرَّايَةَ يَوْمَ خَيْبَرَ إِلَى عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ، فَانْطَلَقَ، فَرَجَعَ يُجَبِّنُ أَصْحَابَهُ وَيُجَبِّنُونُهُ» هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ عَلَى شَرْطِ مُسْلِمٍ، وَلَمْ يُخَرِّجَاهُ “”
[التعليق – من تلخيص الذهبي] 4341 – القاسم بن أبي شيبة واه

तर्जुमा👉

हज़रत जाबिर र अ फ़रमाते हैं : *नबी करीम स अ व स ने ख़ैबर के दिन हज़रत उमर र अ को अलम अता फ़रमाया : हज़रत उमर अपने साथियों के हमराह जंग करने गए,लेकिन हज़रत उमर लौट कर आ गए,और हज़रत उमर अपने साथियों को और उन के साथी हज़रत उमर र अ को बुज़दिल कह रहे थे।*

4341 मुस्तद्रक हाकिम

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حَدَّثَنَا أَبُو عَبْدِ اللَّهِ مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الصَّفَّارُ، إِمْلَاءً، ثنا زَكَرِيَّا بْنُ يَحْيَى بْنُ مَرْوَانَ، وَإِبْرَاهِيمُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ السِّيُوطِيُّ، قَالَا: ثنا فُضَيْلُ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ، ثنا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنِ الْخَلِيلِ بْنِ مُرَّةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: لَمَّا كَانَ يَوْمُ خَيْبَرَ بَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلًا فَجَبُنَ، فَجَاءَ مُحَمَّدُ بْنُ مَسْلَمَةَ فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ، لَمْ أَرَ كَالْيَوْمِ قَطُّ، قُتِلَ مَحْمُودُ بْنُ مَسْلَمَةَ، فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ: “” لَا تَمَنَّوْا لِقَاءَ الْعَدُوِّ، وَسَلُوا اللَّهَ الْعَافِيَةَ، فَإِنَّكُمْ لَا تَدْرُونَ مَا تُبْتَلُونَ مَعَهُمْ، وَإِذَا لَقِيتُمُوهُمْ، فَقُولُوا: اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبُّنَا وَرَبُّهُمْ، وَنَوَاصِينَا وَنَوَاصِيهُمْ بِيَدِكَ، وَإِنَّمَا تَقْتُلْهُمْ أَنْتَ، ثُمَّ الْزَمُوا الْأَرْضَ جُلُوسًا، فَإِذَا غَشُوكُمْ فَانْهَضُوا وَكَبِّرُوا “” ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَأَبْعَثَنَّ غَدًا رَجُلًا يُحِبُّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَيُحِبَّانِهِ، لَا يُوَلِّي الدُّبُرَ، يَفْتَحُ اللَّهُ عَلَى يَدَيْهِ» فَتَشَرَّفَ لَهَا النَّاسُ، وَعَلِيٌّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَوْمَئِذٍ أَرْمَدُ، فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «سِرْ» فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ، مَا أُبْصِرُ مَوْضِعًا، فَتَفَلَ فِي عَيْنَيْهِ، وَعَقَدَ لَهُ وَدَفَعَ إِلَيْهِ الرَّايَةَ، فَقَالَ عَلِيٌّ: يَا رَسُولَ اللَّهِ، عَلَامَ أُقَاتِلُهُمْ؟ فَقَالَ: «عَلَى أَنْ يَشْهَدُوا أَنَّ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ، وَإِنِّي رَسُولُ اللَّهِ فَإِذَا فَعَلُوا ذَلِكَ فَقَدْ حَقَنُوا مِنِّي دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ إِلَّا بِحَقِّهِمَا، وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ» ، قَالَ: فَلَقِيَهُمْ فَفَتَحَ اللَّهُ عَلَيْهِ «قَدِ اتَّفَقَ الشَّيْخَانِ عَلَى إِخْرَاجِ حَدِيثِ الرَّايَةِ، وَلَمْ يُخَرِّجَاهُ بِهَذِهِ السِّيَاقَةِ»
[التعليق – من تلخيص الذهبي] 4342 – أخرجا ذكر الراية منه

तर्जुमा👉
हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह र अ फ़रमाते हैं : ख़ैबर के दिन रसूलअल्लाह स अ व स ने एक आदमी को भेजा लेकिन वो कामयाब न हो सका, मोहम्मद बिन मसल्लमा आये,और बोले : या रसूलअल्लाह स अ व स मैंने आज जैसा दिन कभी नहीं देखा,महमूद बिन मुसल्लीमा शाहिद हो गए हैं।रसूलअल्लाह स अ व स ने फ़रमाया: दुश्मन से मुठभेड़ की आरज़ू मत किया करो,बल्कि अल्लाह तआला से सलामती माँगो,क्योंकि तुम लोग नही जानते कि तुम पर कौनसी आज़माइश आने वाली हैं।और जब दुश्मन का सामना हो तो यूँ दुआ माँगो “ए अल्लाह ! तू ही हमारा रब है और उनका रब है, हमारी पेशानियां और उनकी पेशानियां तेरे ही हाथ मैं है, उनको तू ही क़त्ल करेगा।फिर तुम ज़मीन के साथ चिपक कर बैठ जाओ,जब वो तुम्हारे अंदर घुस आएं तो नारा ए तकबीर बुलन्द करते हुए उठ खड़े हो, *रसूलअल्लाह स अ व स ने इरशाद फ़रमाया :में कल ऐसे आदमी को जंग के लिए भेजूँगा जो अल्लाह और उसके रसूल से मोहब्बत करता है और अल्लाह और उसका रसूल उससे मोहब्बत करते हैं,”वो पीठ फेर कर नही भागेगा(जैसे अभी तक सब बड़े बड़े भाग कर वापस आ गए),अल्लाह तआला उसके हाथ पर फ़तह देगा।” लोग इस बात को “क़ाबिले फ़ख्र” समझने लगे।उस दिन हज़रत अली र अ की आँखें आयी हुई थीं, रसूलअल्लाह स अ व स ने हज़रत अली को दुश्मन पर हमला करने को कहा:तो हज़रत अली र अ ने अर्ज़ की :या रसूलअल्लाह स अ व स मुझे तो कुछ दिखाई नही देता,रसूलअल्लाह स अ व स ने उनकी आँखों पर अपना लोआबे दहन लगाया ,और फिर हज़रत अली को लश्कर की सरदारी और अलम अता फ़रमाया।* हज़रत अली र अ ने अर्ज़ किया या रसूलअल्लाह में किस मुतालबे पर जिहाद करूँ ? आप स अ व स ने फ़रमाया : इस मुतालबे पर की वो गवाही दें कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नही और बेशक में अल्लाह का रसूल हूँ।अगर वो लोग ये गवाही दे दें तो उन्होंने मुझसे अपने माल और जानों को बचा लिया।और उनका हिसाब अल्लाह के ज़िम्मे है। *फिर हज़रत अली र अ ने हमला किया और अल्लाह तआला Tele हज़रत अली को फ़तह अता फ़रमा दी।*

4342 मुस्तद्रक हाकिम

أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ جَعْفَرٍ الْقَطِيعِيُّ، ثنا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنِي أَبِي، ثنا عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ عَبْدِ الْوَارِثِ، ثنا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ، ثنا إِيَاسُ بْنُ سَلَمَةَ، قَالَ: حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ: «شَهِدْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَيْبَرَ حِينَ بَصَقَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي عَيْنَيْ عَلِيٍّ، فَبَرَأَ فَأَعْطَاهُ الرَّايَةَ» فَبَرَزَ مَرْحَبٌ وَهُوَ يَقُولُ:
[البحر الرجز]
قَدْ عَلِمَتْ خَيْبَرُ أَنِّي مَرْحَبُ … شَاكِي السِّلَاحِ بَطَلٌ مُجَرَّبُ
إِذَا الْحُرُوبُ أَقْبَلَتْ تَلَهَّبُ
قَالَ: فَبَرَزَ لَهُ عَلِيٌّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ وَهُوَ يَقُولُ:
[البحر الرجز]
أَنَا الَّذِي سَمَّتْنِي أُمِّي حَيْدَرَهْ … كَلَيْثِ غَابَاتٍ كَرِيهِ الْمَنْظَرَهْ
أُوَفِّيكُمْ بِالصَّاعِ كَيْلَ السَّنْدَرَهْ
قَالَ: فَضَرَبَ مَرْحَبًا فَفَلَقَ رَأْسَهُ فَقَتَلَهُ، وَكَانَ الْفَتْحُ «هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ عَلَى شَرْطِ مُسْلِمٍ، وَلَمْ يُخَرِّجَاهُ بِهَذِهِ السِّيَاقَةِ»
[التعليق – من تلخيص الذهبي] 4343 – على شرط مسلم
तर्जुमा👉

हज़रत अयास बिन सलमा र अ अपने वालिद का ये बयान नक़्ल करते हैं : हमने रसूलअल्लाह स अ व स के हमराह ग़ज़वा ए ख़ैबर में शिरकत की।तो रसूलअल्लाह स अ व स ने हज़रत अली र अ की आँखों मैं अपना लोआबे दहन लगाया तो उनकी आंखें ठीक हो गईं।आप अलैहिस्सलाम ने हज़रत अली र अ को अलम अता फ़रमाया।

*मरहब (दुश्मन की तरफ़ से सबसे खतरनाक और ताक़तवर लड़ाकू) ने यूँ कहते हुए मुबारीज़त तलब की : “ख़ैबर जानता है कि मैं मरहब हूँ,हथियार बन्द,तजुर्बेकार योद्धा हूँ, जब जंग शुरू हो जाये तो ये शोलाज़न होता है।*

*हजरत अली र अ ने यूँ कहते हुए उसको जंग के लिए बुलाया: ” मैं वो हुँ जिसका नाम उसकी माँ ने हैदर रखा है जैसा कि जंगल का शेर,रौबदार वजाहत वाला,मैं तुम में वसीअ पैमाने पर तबाही फैला दूँगा।”*

*फिर हज़रत अली ने मरहब पर एक ज़र्ब लगायी और उसका सर चीर कर रख दिया और उसको(एक ही वार मैं) क़त्ल कर दिया तो ख़ैबर फ़तह हो गया।*
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