गर्दन पर मेरी बैअत

अल्लाह तआला (सहाबी ए रसूल हज़रत )तल्हा को जन्नत में दाख़िल न फ़रमाता अगर उनकी गर्दन में मेरी (अली की) बैअत ना होती..

हवाला : इमाम बाक़लानी तमहीदुल अवाइल….इमाम हाकिम अल मुस्तदरक किताब मारफ़तुल सहाबा
फ़ैज़ाने आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा फ़ाज़िले बरेलवी

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