जिब्रईल की तलाश



जिब्रईल की तलाश

हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के पास एक मर्तबा जिब्रईल एक आदमी की शक्ल में हाज़िर हुए और आकर कहने लगे ऐ अली! आप बाबे मदीनतुल इल्म हैं ज़रा जिब्रईल की तलाश तो कीजिये और बताइये इस वक़्त जिब्रईल कहां है? हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने पहले तो दायें व बायें देखा फिर ज़मीन की तरफ देखा, फिर ऊपर और फ़रमायाः इस वक़्त जिब्रईल न तो आसमान में नज़र आये और न ज़मीन में कहीं। लिहाज़ा मेरा ख़्याल है जिब्रईल आप ही हैं । ( नुजहतुल मजालिस सफा ३५२)

सबक़ : यह नज़र है हज़रत मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की जो मदीनतुल इल्म के दरवाज़े हैं। फिर जो मदीनतुल – इल्म हैं और मौला अली के, भी मौला हैं यानी हुजूर सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम | उनके इल्म व नज़र की वुसअत का जो इंकार करे और यूं कहे कि हुजूर को दीवार के पीछे की भी ख़बर न थी किस कद्रं जाहिल व बेखबर है ।

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