हज़रत अली से दोस्ती की तरगीब और अदावत से तरहीब



पहली हदीस

रावीयान ए हदीस, हारून बिन अब्दुल्लाह अल-बगदादी, मुस अब बिन अल्-मिक़दम, फित्र बिन ख़लीफा, अबुत्-तुफैल।

हज़रत आमिर बिन वसीलह से रिवायत है कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने मस्जिद के मैदान में लोगों को जमा किया और फरमाया कि, “मैं तुम्हें अल्लाह तआला का वास्ता देकर पूछता हूँ, जिसने रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम से ये हदीस सुनी है बयान करे कि रसूलुल्लाह ने ग़दीर ए खुम के दिन लोगों से क्या फरमाया था?”, कुछ लोग खड़े हुए, हज़रत अली अलैहिस्सलाम की बात की गवाही दी और बोले, “रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने, ग़दीर ए खुम के रोज़ ये इरशाद फरमाया था कि, ‘क्या तुम्हें नहीं मालूम की मैं, मोमिनों की जान पर उनसे ज्यादा हक़ रखता हूँ और अव्वल ओ अक़रब हूँ?’, फिर आप हज़रत मुहम्मद सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम का हाथ पकड़ कर बुलंद किया और फरमाया, जिसका मैं मौला हूँ, उसका अली मौला है। इलाही इसके दोस्त से दोस्ती रख और इसके दुश्मनों से दुश्मनी रख।”

अबुत्-तुफैल कहते हैं कि मैं इतिमे से बाहर आ गया, मैं इस हदीस के मुताल्लिक खलजन में था और मुझे इस बारे में उलझन थी लिहाजा मैं जैद बिन अरकम रजिअल्लाहु अन्हो के पास गया और उनसे इस हदीस के मुताल्लिक सवाल किया तो आपने फरमाया, “तू इस हदीस पर शक करता है जबकि मैंने इसे खुद नबी करीम सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम से सुना है।”

इस हदीस को अबु दाउद ने मुहम्मद बिन सुलेमान, फित्र, अबुत-तुफैल आमिर इब्न वसीलह की रिवायत से भी बयान किया है। हदीस के अल्फाज़ में कोई इखतिलाफ़ नहीं है।



दूसरी हदीस-

रावीयान ए हदीस, जकरिया बिन यहया अस्-स’जिस्तानी, मुहम्मद बिन अब्दुर- -रहीम, इब्राहीम बिन अल्-मुन्सिर, मअन बिन ईसा, मूसा बिन याकूब, अल्-मुहाजिर बिन मिस्मार।

हज़रत आयशा बिन्त ए साद रजिअल्लाहु अन्हा और हज़रत आमिर बिन साद रजिअल्लाहु अन्हो से रिवायत है कि, हज़रत साद रजिअल्लाहु अन्हो ने फरमाया कि रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने खुत्बा इरशाद फरमाते हुए फरमाया, “ऐ लोगों! मैं तुम्हारा वली हूँ?”, लोगों ने अर्ज़ किया, “या रसूलुल्लाह! आपने दुरुस्त फरमाया है।”

फिर आपने हज़रत अली करम’अल्लाहु वज्हुल करीम का हाथ पकड़कर बुलंद किया और फरमाया कि, “ये मेरा वली है और मेरी तरफ़ से अदायगी करने वाला है। जो इससे मुहब्बत करेगा, अल्लाह तआला उससे मुहब्बत करेगा, जो इससे दुश्मनी करेगा, अल्लाह तआला उससे दुश्मनी करेगा।




तीसरी हदीस

रावीयान ए हदीस, अहमद बिन उस्मान (अल-बसरी) अबुल ज्व-जा, इब्न ए अस मह (मुहम्मद बिन खालिद अल-बसरी), मूसा बिन याकूब, अल्-मुहाजिर बिन मिस्मार, आयशा बिन्त एसाद

हजरत साद रजिअल्लाहु अन्हो से बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व भालिही व सल्लम ने हज़रत अली करम अल्लाहु वज्हुल करीम का हाथ पकड़ा और खुत्बा इरशाद किया और अल्लाह तआला की हम्द ओसना बयान करने के बाद, आपने फरमाया, “क्या तुमको मालूम नहीं कि मैं तुम्हारे जानों का तुमसे ज्यादा मालिक हूँ?”

लोगों ने जवाब दिया, “हाँ रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम, आप दुरुस्त फरमा रहे हैं।’, फिर रसूलुल्लाह ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम का हाथ पकड़कर बुलंद किया और फरमाया, “जिसका मैं वली और मददगार हूँ, उसका ये भी वली और मददगार है और यकीनन अल्लाह तआला उससे मुहब्बत करेगा जो इससे मुहब्बत करेगा और जो इससे दुश्मनी करेगा, अल्लाह तआला भी उससे दुश्मनी करेगा।



चौथी हदीस

रावीयान ए हदीस, जकरिया बिन यहया, मुहम्मद बिन यहया बिन अबु उमर, याकूब बिन जाफ़र बिन अबी कसीर, अल-मुहाजिर बिन मिस्मार, आयशा बिन्त ए साद।

हज़रत साद रजिअल्लाहु अन्हो से रिवायत है कि हम रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम के साथ मक्का मुअज्जमा के रास्ते में थे और आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम मक्का से मदीना तश्रीफ़ ला रहे थे। जब आप मकाम ए ग़दीर तक पहुँचे तो आप ठहर गए और आपने सब को वहीं रोक दिया, कुछ लोगों को उन्हें बुलाने भेजा जो आगे निकल गए थे और कुछ लोगों को उन्हें बुलाने भेजा जो पीछे-पीछे आ रहे थे। जब
तमाम लोग आप मुहम्मद सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम के पास जमा हो गए त आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया, “ऐ लोगों तुम्हारा वली कौन है?”, लोगों ने तीन मर्तबा कहा, “अल्लाह और उसका रसूल सल्लललाहु अलैहे व सल्लमा”
फिर आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने हज़रत अली करम’अल्लाहु वज्हुल करीम का हाथ पकड़कर बुलंद किया और फरमाया, “जिसका वली अल्लाह और उसका रसूल है, उसका ये भी वली है। ऐ अल्लाह! उससे मुहब्बत रख जो इससे मुहब्बत रखता है और उस से दुश्मनी रख, जो इससे दुश्मनी रखता है।”

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