पुरखादिम का राज़

पुरखादिम का राज़

मदीनए मुनव्वरा में एक अंधी बुढ़िया रहती थी जिसका कोई अज़ीज़ न था। हज़रत उमर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु हर रोज़ रात को उसके घर आते और उसका पानी भर देते। और भी जो कुछ उसका काम होता कर देते। एक रोज़ रात को उस बुढ़िया के घर आये तो क्या देखते हैं कि उसका सारा काम आपसे पहले कोई दूसरा शख़्स कर गया है। दूसरे रोज़ आये तो उस रोज़ भी आपसे पहले ही कोई शख्स उसका सारा काम कर गया था। इसी तरह हज़रत उमर हर रोज़ उसकी ख़िदमत के लिये आते तो आप देखते हैं कि उस बुढ़िया का काम कोई दूसरा शख्स कर गया है। आप हैरान रह गये कि यह कौन है? जो मुझसे पहले ही यहां पहुंचकर इस बुढ़िया का पानी भी भर जाता है और उसका सारा काम भी कर जाता है। चुनांचे आप एक रोज़ बहुत जल्दी आये और इस इंतज़ार में रहे कि देखें यह कौन है? थोड़ी देर के बाद आने वाला आया और उस बुढ़िया का काम करने लगा। फ़ारूके आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु यह देखकर हैरान रह गये कि यह खलीफ़तुल मुस्लिमीन हज़रत सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु हैं।

(तारीखुल खुलफा सफा ५६)

सबक : इतना बुलंद मर्तबत खलीफा और यह तवाजो जज़्बए खिदमत कि एक अंधी बुढ़िया की ख़िदमत अपने ज़िम्मे ले ली। यह इस बात की निशानी है कि सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु सच्चे खलीफाए रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हैं। आप ही खिलाफ़त के हकदार थे वरना दुनिया-परस्त और जाह तलब बादशाहों में ऐसी बातें कब नज़र आती हैं? मालूम हुआ कि मुसलमानों का अमीर असल में मुसलमानों का खादिम होता है और उसका फर्ज होता है कि वह अमीर गरीब सारी जनता की खबर रखे और सबके काम आये।

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