नबी करीम ﷺ ने फरमाया:अपना पैग़ाम मैं खुद लेकर जाऊँगा या अली

अपना पैग़ाम मैं खुद लेकर जाऊँगा या अली

पहली हदीस

रावीयान ए हदीस, अहमद बिन सुलेमान, यहया बिन आदम, इस्राईल बिन यूनुस, अबु इस्हाक़।

हब्शी बिन जुनादह अस्- सलूली से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया कि, “अली मुझसे है और मैं अली से हूँ, मेरा पैग़ाम कोई नहीं पहुँचाएगा मगर मैं और अली । “

दूसरी हदीस

रावीयान ए हदीस, मुहम्मद बिन बश्शार, अफ्फ़ान बिन मुस्लिम, अब्दुस्- समद बिन अब्दुल वारिस, हम्माद बिन सलामह, सिमक बिन हर्ब ।

हज़रत अनस रज़िअल्लाहु अन्हो से रिवायत है कि, हुज़ूर रिसालत म’आब सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने हज़रत अबु बकर रज़िअल्लाहु अन्हो को सूरः बारात देकर भेजा और फिर उनको वापिस बुलाकर फरमाया की इसे कोई शख़्स नहीं पहुँचाएगा मगर वो जो मेरे अहल से हो।”, फिर हज़रत अली करम अल्लाहु वज्हुल करीम को बुलाकर, सूरः बारात उन्हें अता कर दिया।

तीसरी हदीस-

रावीयान ए हदीस, अल्-अब्बास बिन मुहम्मद (अद्-दौरी), अबु नूह (अब्दुर्रहमान बिन ग़ज़वान), कु’द (कुरद), यूनुस बिन अबु इस्हाक़, अबु इस्हाक़।

ज़ैद बिन यसी, रिवायत बयान करते हैं कि हुज़ूर मुहम्मद सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने सूरः बारात देकर, हज़रत अबु बकर रज़िअल्लाहु अन्हो को अहल ए मक्का की तरफ भेजा, फिर हज़रत अली अलैहिस्सलाम को उनके पीछे भेजा की वो मक्तूब उनसे खुद ले लें और अहल ए मक्का की तरफ़ जाएँ।

फरमाया कि फिर हज़रत अली अलैहिस्सलाम, हज़रत अबु बकर रज़िअल्लाहु अन्हो से मिले और उनसे वो ख़त ले लिया। पस हज़रत अबु बकर ग़मनाक हालत में वापिस आ गए। लोगों ने अर्ज़ किया, “या रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम, क्या कोई आयत नाज़िल हुई है?”

आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया, “नहीं, बल्कि मुझे, अल्लाह तबारक व तआला ने हुक्म दिया है की पैग़ाम को या तो मैं ले खुद पहुँचाऊँ या मेरे अहलेबैत पहुँचाएं।

चौथी हदीस

रावीयान ए हदीस, ज़करिया बिन यहया, अब्दुल्लाह बिन उमर बिन मुश्का’दनह, अस्बात बिन मुहम्मद, फित्र, अब्दुल्लाह बिन शरीक, अब्दुल्लाह बिन रुकेम।

हज़रत साद रजिअल्लाहु अन्हो से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने हज़रत अबु बकर रज़िअल्लाहु अन्हो को सूरः बारात लेकर भेजा, यहाँ तक कि वो रास्ते पर थे, की आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम को भेजा कि वो सूरः बारात, हज़रत अबु बकर रज़िअल्लाहु अन्हो से वापिस ले लें, फिर हज़रत अली ने हज़रत अबु बकर से सूरः वापिस ली तो हज़रत अबु बकर ने इस बात का ग़म अपने दिल में महसूस किया, पस रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया कि, “इसे, कोई नहीं पहुँचाएगा, मगर मैं खुद या वो शख्स जो मुझसे हो।”

पाँचवीं हदीस

मलिक बिन रावीयान ए हदीस, इस्हाक़ बिन इब्राहीम, अबु कुर्राह मूसा बिन तारिक़, अब्दु जुरेज, अब्दुल्लाह बिन उस्मान बिन खुसेम, अबुज्- जुबैर

हज़रत जाबिर रज़िअल्लाहु अन्हो बयान करते हैं कि जब उमरा (अल्-जि रानह) से वापिस आए तो आपने, हज़रत अबु बकर रज़िअल्लाहु अन्हो को हज के लिए रवाना किया, हम भी आपके साथ थे, यहाँ तक की मक़ाम ए अल्-अर्ज पर, सुबह की नमाज़ के लिए कपड़ा बिछाया और जब तकबीर के लिए खड़े हुए तो ऊँट की आवाज़ सुनी। चुनाँचे तकबीर में तवक्फ़ किया गया क्योंकि ये रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम की नाका मुबारक अल्जद अ की आवाज थी।

हमने ख्याल किया कि रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम भी हज के लिए तश्रीफ़ ले आए हैं, लिहाजा आपके साथ में नमाज़ अदा की जाए। तो जब ऊँटनी से उतरकर हज़रत अली अलैहिस्सलाम तश्रीफ़ लाए तो, हज़रत अबु बकर रज़िअल्लाहु अन्हो ने उनसे पूछा कि, “अली आप अमीर हैं या येलची (पैगाम लाने वाला) ?

हज़रत अली करम अल्लाहु वज्हुल करीम ने फरमाया, “मुझे रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने भेजा है कि मवाक़िफ़ हज में लोगों पर सूरः बारात तिलावत करूँ, पस हम मक्का मुअज्ज़मा में दाखिल हुए तो अय्याम अत्-तरविया से कल्ब एक रोज़, हज़रत अबु बकर रज़िअल्लाहु अन्हो खड़े हुए और लोगों को ख़िताब करते हुए उनसे गुफ्तगू की और मनासिक ए हज बयान किया। यहाँ तक कि जब आप फारिग हुए तो हज़रत अली अलैहिस्सलाम खड़े हुए और आपने लोगों पर सूरः बारात पढ़ी यहाँ तक की ख़त्म हो गई।

इसके बाद अन्-नहर के रोज़ भी, हम मिना गए, जहाँ हज़रत अबु बकर रज़िअल्लाहु अन्हो ने खुत्बा दिया और मिना, कुर्बानी और बाकि मनासिक बयान किए, फिर हज़रत अली अलैहिस्सलाम खड़े हुए और आपने लोगों पर सूरः बारात पढ़ी यहाँ तक की पूरी हो गई। फिर अन्-नफ्र के रोज़ भी हज़रत अबु बकर रज़िअल्लाहु अन्हो ने खुत्बा दिया और मिना से जल्दी वापिसी करने, शैतान को कंकड़ियाँ मारने और कुछ मनासिक बयान किए और फिर हज़रत अली अलैहिस्सलाम खड़े हुए और आपने लोगों पर एक बार फिर सूरः बारात पढ़ी यहाँ तक की वो पूरी हो गई।

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