हुकूमत के लिए हज़रत अली के दिशा निर्देश

*हुकूमत के लिए हज़रत अली के दिशा निर्देश….* (शौकत भारती)
*तारीखे इस्लाम में पहला एक इंसान है जो काबे में पैदा हुआ और जिसे सबसे पहले मस्जिद के अंदर नमाज़ की हालत में आतंकवादी हमले का शिकार बनाया गया* जिसका नाम *हज़रत अली है।*
*13 रजब को खानए काबा में पैदा होने वाले अली अ.स* को आज से 1400 साल पहले एक *खतरनाक आतंकवादी इब्ने मुल्जिम* ने जो रातों दिन नमाज़ और कुरान पढ़ता रहता था *19 रमजान की सुबह जिस वक्त हजरत अली सुबह की नमाज़ अदा कर रहे थे ज़हर से बुझी हुई तलवार* से हमला कर के उन्हे बुरी तरह ज़ख्मी कर दिया गया जिसकी वजह *21 रमजान को हजरत अली की शहादत हो गई…* *काबे में पैदा और मस्जिद में शहीद होने वाले अली* ने अपनी खिलाफत में *सबका साथ और सब का विकास* के साथ न्याय और शांति का राज स्थापित करने के लिए अपने गवर्नर को ऐसे दिशा निर्देश दिए जिन पर चल कर ग्लोबल पीस, जस्टिस और सिक्योरिटी के सपने को कल भी साकार किया जा सकता था और कयामत तक साकार किया जा सकता है.. मगर अफसोस अमन और शांति का राज स्थापित करने की कोशिश करने वाले अली को सत्ता के लालचियों ने एक *आतंकवादी हमला करवा के रमजान के पवित्र महीने में शहीद करवा दिया।*
*आइए आप को बताते हैं हज़रत अली के वोह गोल्डेन दिशा निर्देश जो उन्होंने अपने गवर्नर्स को दिए थे।*
(1) याद रखो तुम जिन लोगों के हाकिम बनाए गए हो उनमें दो तरह के लोग हैं एक वो जिनका और तुम्हारा धर्म एक है, दूसरे वो लोग हैं जिनका और तुम्हारा धर्म तो एक नहीं है मगर उनका और तुम्हारा बनाने वाला एक ही है।क्यों की तुम दोनों के हाकिम चुने गए हो इस लिए याद रखो तुम्हे सब के साथ न्याय करना है।
(2) ये भी हमेशा याद रखना कि जिस तरह पिछली हुकूमतों की गलत बातों के खिलाफ तुमने आवाज़ उठाई थी अगर तुम भी गलत करोगे तो तुम्हारे विरुद्ध भी आवाम की आवाज़ें उठेंगी इस लिए कभी कोई गलत काम न करना और न ही किसी को करने देना।
(3) याद रखो *अपनी कैबिनेट* में कभी किसी गलत आदमी को कोई जगह न देना और न उन लोगों को कोई जगह देना जो पिछली हुकूमतों में गलत काम में लिप्त रह चुके हैं।
साफ और स्वच्छ लोगों को ही अपनी कैबिनेट में रखना उसके बाद भी उन पर अपने भरोसे मंद जासूस मुकर्रर कर देना और जैसे ही तुम्हे खबर मिले की कोई गलत कर रहा है तो उसे सख्त सज़ा देना और गलत तरह से उसका कमाया हुआ सारा माल भी जब्त कर लेना।
(4) *अपने सलाहकारो* में कभी किसी चापलूस को मत रख लेना बल्कि ऐसे लोगों को सलाहकार बनाना जो साफ,सच्ची और सख्त बात तुम्हारे सामने कहने की हिम्मत रखते हों और ऐसे सलाहकारों का खास ख्याल रखना और उनसे मशवरे करना।
(5) *जज की कुर्सी* पर उसे ही बिठाना जो फैसले करने में किसी से न डरता हो और फैसले करने में देर न करता हो।
ये भी ख्याल रखना की वो ज्यादा लोगों से मेल जोल न रखता हो,लोगों से गिफ्ट और तोहफे वागिरह न लेता हो।
जज की तनख्वाह ऐसी रखना की उसे अपनी जरूरत के लिए किसी की तरफ देखने की जरूरत न हो।
उसके किए गए फैसलों पर भी पूरी निगाह रखना।
(6) *पुलिस फोर्स* का मुखिया उसे ही बनाना जो किसी से न डरता हो और बड़े से बड़े दौलत मंद और जाबिर लोगों से भी गरीब से गरीब इंसान का हक दिलाने की हिम्मत रखता हो।
इस तरह के अफसर का ख्याल इस तरह रखना जिस तरह एक बाप अपने बेटे का ख्याल रखता हो।
क्यों की ऐसा शख्स बुरे से बुरे हालात में भी तुम्हारे साथ खड़ा रहे गा।
(7) *तहसील..* ये वो खास जगह है जहां लोगों की समत्तियों के कागज़ात रखे जाते हैं जो लोगों की अमानतें हैं और हुकूमत उसकी जिम्मेदार है इस लिए इस डिपार्टमेंट में ऐसे किसी शख्स को न रखना जो लेन देन कर के कागजातों में हेरा फेरी करने वालें हो।
(8) *टैक्स वसूली..*
याद रखो तुम्हारे अफसर अगर टैक्स वसूलने जाएं तो सब से पहले जनता पर और हालत पर निगाह डाले अगर आवाम के पास साल भर खाने का अनाज और जाड़े या गर्मी में पहेन्ने के कपड़े नहीं है तो आवाम को
ये सब खुद दे कर आए अगर सूखा पड़ गया है या सैलाब आ गया है और फसलें बर्बाद हो गईं है तो टैक्स बिकुल न लिया जाए बल्कि किसानों के लिए खाद और बीज का इंतजाम कर के आना ताकि किसान सुकून से खेती कर के अगले साल टैक्स देने के काबिल बन जाए और सरकार को टैक्स अदा करे ।
याद रखो सरकारी ख़ज़ाने पर चाहे कितना ही बोझ क्यों न पड़े ये सब कर के ही टैक्स लेना इससे तुम्हारी हुकूमत पर आवाम का भरोसा बढ़ेगा और आवाम को परेशानियों का सामना भी नहीं करना होगा।
(9) *कारोबारियों का ख्याल:*
याद रखो कारोबारी किसी भी हुकूमत की रीढ़ की हड्डी होते हैं इस लिए उनका हर तरह से ख्याल रखना,लेकिन अगर वो उसके बाद भी जमा खोरी करें या दाम बढ़ाने लगें या मिलावट करने लगें और आवाम परेशान होने लगे तो ऐसे कारोबारियों के साथ सख्ती से निपटना और उन्हें सख्त सज़ा भी देना।
(10) *दबे कुचलों का ख्याल..*
समाज में ऐसे अपंग और लावारिस भी होते हैं जिनका कोई ख्याल करने और देख भाल करने वाला ही नहीं होता इस लिए ये तुम्हारी पर्सनल जिम्मेदारी है की इनका खयाल तुम खुद रखना क्यो की तुम खुद मुखिया हो।
(11) *जनता दरबार:* आवाम से मिलने का एक दिन जरूर मुकर्रर करना और आवाम की शिकायत को उस दिन खुद सुनना याद रखो शिकायत सुनते वक्त अपने अधिकारियों को वहां से हटा देना ताकि जनता खुल कर गलत अफसरों की शिकायत तुमसे कर सके।
(12) *कल्चरल प्रोग्राम्स:* वो सारे कल्चरल प्रोग्राम जिससे लोग एक दूसरे से करीब आते हैं मेल मिलाप बढ़ता है खबरदार उन पर कभी रोक न लगाना। क्यों की इस बहाने से जनता एक दूसरे के करीब आती है और मेल मिलाप बढ़ता है।
(13) *एनिमल राइट्स:* याद रखो जानवरों के लिए खाने पीने की चरागाहे भी कायम करवाना और अगर टैक्स में तुम्हे जानवर दिए जाएं तो तुम्हारे करींदे कमजोर और मजबूत दोनों जानवरों को एक ही रफ्तार से मत हांकते हुए ले जाएं, क्यों की ऐसा करने से कमज़ोर जानवरों को तकलीफ होती है अगर किसी जानवर के नाखून बड़े हुए हों तो उसे जरूर काट दिया जाए ताकि जानवर को चलने में किसी तरह की तकलीफ नही हो रास्ता कितना ही लंबा क्यों न हो जानवरों को उसी रास्ते से ले कर आया जाए जिधर चारे और पानी का मुकम्मल इंतजाम हो।
जिन जानवरों के साथ दूध पीते बच्चे हों उनका दूध इतना न दुह किया जाए की उनका बच्चा भूखा रह जाए….
(14) याद रखो जनता के लिए काट खाने वाला दरिंदा मत बन जाना और अपने दिल से नफरत की हर गांठ को खोल देना सब का ख्याल रखना सबके साथ इंसाफ करना और हमेशा इस बात को याद रखना की तुम्हारे हर कार्य को ऊपर वाला देख रहा है।
*ये थी जानता को न्याय और अमन का राज्य देने वाले हजरत अली के गाइड लाइन के कुछ अंश किसी हमने नहजुल बलागा से पढ़ कर पेश किया है।*
*जौ की सूखी रोटी खा कर और पेवंद लगे कपड़े और और फटी हुई चप्पल पहने कर हुकूमत करने वाले हज़रत अली ने कभी दुनिया से कुछ नहीं लिया* और हर हाल में न्याय और शांति का राज स्थापित करने की कोशिश की यही वजह थी की उन्हों ने एक बड़ी रैली कर के *जनता से सवाल किया की जबसे मैंने हुकूमत संभाली है क्या कोई ये कह सकता है की उसके सर पर छत, तन पर कपड़ा न हो या वो भूखा सोया हो,*
किसी ने भी उनकी इस बात को नहीं झुठलाया अफसोस है *सबको रोटी कपड़ा और मकान देने वाले अली को नमाज़ कि हालत में आतंकी हमले से जख्मी कर के शहीद कर दिया गया,* जैसे ही अली के सर पर तलवार चली वो पुकार उठे *काबे के रब की कसम मैं कमियाब हुआ।*
दुनिया के सभी हुक्मूरान अगर वाकई पीस जस्टिस और सिक्योरिटी का राज स्थापित करना चाहते हैं तो हज़रत अली के बताए हुए दिशा निर्देशों पर अपनी हुकूमत को चलाएं और एक कमियब हुक्मरान बन सकते हैं।

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