इब्न ए अब्बास की हदीस

इब्न ए अब्बास की हदीस

“अल्लाह तबारक व त आला, अली को कभी रुस्वा नहीं करेगा” से लेकर “अल्लाह राजी है तक अगली बारह हदीसों के रावीयान एक ही हैं यानी कई हदीसें एक ही रिवायत से ली गई हैं।

रावीयान ए हदीस, मुहम्मद बिन अल-मुसन्जा, यहया बिन हम्माद, अल्-वद्दह(वज़जह वजा) अबु अवाना, यहया अबु अबलज।

पहली हदीस – अल्लाह, अली को कभी रुस्वा नहीं करेगा

हज़रत अम्र बिन मैमून से रिवायत है कि मैं, हज़रत अब्दुल्लाह इब्न भब्बास रजिअल्लाहु अन्हो की ख़िदमत में बैठा हुआ था, तभी वहाँ नौ लोग आए और कहने लगे कि, “ऐ इब्न ए अब्बास, क्या आप हमारे साथ खड़े होना पसंद फरमाएँगे या आपको (अम) अलाहिदा होना?”

हज़रत इब्न ए अब्बास रजिअल्लाहु अन्हो ने फरमाया, “मैं तुम्हारे साथ खड़ा होऊँगा, उस वक्त आप तंदरुस्त थे और ये वाक्या आपके नाबीना होने के पहले का है। चुनाँचे आपने इन लोगों को फरमाया कि बात शुरू करो तो इन्होंने बात की जिसे हम नहीं जानते की क्या बात की।”

फिर वो (इब्न ए अब्बास) वापिस आए और कपड़े झाड़ते हुए अफसोस-अफसोस करने लगे और कहने लगे कि ये लोग ऐसे शख्स के मुताल्लिक़ झगड़ा करते हैं और गाली देते हैं, के जिसके लिए अशरा यानी दस खासियत हैं और जिसके लिए रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया है कि, “मैं ऐसे शख्स को भेजूंगा जो अल्लाह तआला और उसके रसूल का महबूब है और अल्लाह रब उल इज्ज़त उसे कभी रुस्वा नहीं करेगा।”
इस फरमान के बाद लोग नज़रें उठा उठाकर देखने लगे यानी इस नियत से देख रहे थे की उन्हें झंडा मिल जाए लेकिन अल्लाह के रसूल मुहम्मद सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया, “अली करमअल्लाहु वज्हुल करीम कहाँ हैं?”
सहाबा ने अर्ज़ किया कि, “वो आटा पीस रहे हैं”, तो आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया, “ये काम कोई दूसरा नहीं कर सकता?”
फिर हज़रत अली अलैहिस्सलाम तशरीफ़ लाए और आपकी आँखें दुख रही थीं पस रसूलुल्लाह ने इनकी आँखों में अपना लुआब ए दहन मुबारक लगाया और झंडे को तीन ने बार लहराकर, हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अता फरमा दिया। फिर अली अलैहिस्सलाम, सफ़ियया बिन्त हुयाय को लाए।

दूसरी हदीस – सूरः तौबा अली अलैहिस्सलाम लेकर जाएँ
कहा कि रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने हज़रत अबु बक़र रजिअल्लाहु अन्हो को सूरः तौबा देकर भेजा और उनके पीछे हज़रत अली अलैहिस्सलाम को रवाना फरमाया तो हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने उन से सूरः तौबा ले ली। और रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया, “उसे सिर्फ वही शख्स ले जा सकता है जो मुझसे है और मैं उस से हूँ।

तीसरी हदीस – दुनिया व आख़िरत में मुहब्बत करने वाला
कहा कि रसलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम का अपने चचा के बेटे हज़रत अली करम’अल्लाहु वज्हुल करीम के लिए ये भी फरमान है कि, “जब आपने लोगों से पूछा कि, “तुम में से कौन है जो मुझसे मुहब्बत करता है?”
हज़रत अली अलैहिस्सलाम आपके पास ही बैठे हुए थे, उन्होंने अर्ज़ किया, “मैं आप से दुनिया व आख़िरत में मुहब्बत करता हूँ।”

चौथी हदीस – हज़रत अली अलैहिस्सलाम सबसे पहले ईमान लाए
– कहा कि, हज़रत अली करम’अल्लाहु वज्हुल करीम, हज़रत ख़दीजा- -तुल-कुबरा रज़िअल्लाहु अन्हा के बाद, सबसे पहले इस्लाम लाए।

पाँचवी हदीस – अहलेबैत को रिज्स से पाक कर दिया
कहा ! और रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने हज़रत अली व फातिमा और हसन व हुसैन अलैहिस्सलाम को कपड़े में ढाँककर फरमाया कि, “बेशक अल्लाह त आला ये ही चाहता है कि, ऐ अहलेबैत! तुम से हर बुराई को दूर रखे और तुम्हें खूब-खूब पाकीजा फरमा दे। खसाइस ए अली

छटवीं हदीस- हज़रत अली ने अपनी जान को बेच दिया
कहा! और हज़रत अली करम’अल्लाहु वज्हुल करीम ने अपनी जान को बेच दिया और रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम की चादर मुबारक ओढ़ ली और आपके मकान में सो गए और मुश्रिकीन ए मक्का, रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम पर पत्थर बरसाते थे, पस अबु बक़र रजिअल्लाहु अन्हो तश्रीफ़ लाए तो हज़रत अली अलैहिस्सलाम सोए हुए थे। हज़रत अबु बक़र रज़िअल्लाहु अन्हो ने ख्याल किया की ये नबी ए करीम सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम आराम फरमा हैं, तो हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने इनको बताया कि रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम मैमूना की तरफ़ तशरीफ़ ले गए हैं, आप उन्हें वहाँ मिल लें। चुनाँचे, हज़रत अबु बकर रजिअल्लाहु अन्हो चले गए और आप मुहम्मद सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम के साथ गार मे दाखिल हो गए। 1
कहा! हज़रत अली अलैहिस्सलाम पर कुफ्फार ने उसी तरह पत्थर बरसाने शुरू कर दिए, जिस तरह वो, रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम पर बरसाते थे और हज़रत अली अलैहिस्सलाम पेच ओ ताब खाने लगे।
कुफ्फार ए मक्का, हज़रत अली अलैहिस्सलाम पर सुबह होने तक पत्थर बरसाते रहे।

सातवीं हदीस – अली तुम मेरे ख़लीफा हो
कहा! रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम, ग़जवा ए तबूक के लिए लोगों के साथ निकले तो हज़रत अली करम’अल्लाहु वज्हुल करीम ने पूछा, “क्या मैं भी आपके साथ चलूँगा?”
हुजूर मुहम्मद मुस्तफा सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने इर्शाद फरमाया, “नहीं।”, ये तो हज़रत अली अलैहिस्सलाम रोने लगे तो रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम ने इर्शाद फरमाया, “क्या तुम इस पर खुश नहीं कि तुम मुझे ऐसे हो जैसे सुनासैयद शादाब अली
मूसा अलैहिस्सलाम के लिए हारून अलैहिस्सलाम?” तुझे नबूवत नहीं पहुँचेगी, अलबता तुम मेरे खलीफा हो।

आठवीं हदीस-तमाम मोमिनों के वली
कहा! और रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम के लिए फरमाया कि, “तुम मेरे बाद तमाम मोमिनों के वली हो।”

नौवीं हदीस – सिवाय अली के तमाम दरवाजे बंद
कहा, सिवाय हज़रत अली अलैहिस्सलाम के दरवाज़े के, मस्जिद में खुलने वाले तमाम दरवाजे बंद कर दिए गए।

दसवीं हदीस-अली मस्जिद में आ सकते हैं –
कहा, हज़रत अली अलैहिस्सलाम जिनबी हालत में भी मस्जिद में तशरीफ़ ले आते और आपके घर के लिए सिवाय मस्जिद के और कोई रास्ता ना था।

ग्यारहवीं हदीस – जिसका मैं मौला हूँ, उसका अली मौला है
कहा कि, रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया, “जिसका मैं मौला हूँ, उसका अली मौला है।”

बारहवीं हदीस – अल्लाह राजी है
कहा कि, कुरआन मजीद में अल्लाह रब उल इज्जत ने खबर दी है कि बेशक हम ‘अस्’हाब ए शजर’ बैतुल रिज़वान में हिस्सा लेने वालों से राजी हुए। पस हमें मालूम है जो उनके दिलों में है, क्या अल्लाह तबारक़ व तआला ने हमें बताया है कि इस फरमान के बाद वो उनपर नाराज़ हुआ?
और जब हज़रत उमर रजिअल्लाहु अन्हो ने अहले मक्का के लिए जासूसी करने वाले बद्री सहाबी की गर्दन मारने की इजाजत तलब की तो रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने इर्शाद फरमाया कि तू, ये काम करने वाला है और क्या तू नहीं जानता की मुझे अल्लाह रब उल इज्जत ने, अहले बद्र के लिए इतिला फरमा दी है कि पस तुम जो चाहो करो।”

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