मकाम ए अली, निगाह ए खुदा में

पहली हदीस

रावीयान ए हदीस, हिलाल बिन बिश्र, मुहम्मद बिन खालिद, मूसा इब्न ए याकूब, मुहाजिर इब्न मिसमर।

हज़रत आयशा बिन्त साद कहती हैं कि मैंने अपने वालिद से सुना, वो कहते थे कि मैंने अल्-जुहफा के रोज़, देखा के रसूलुल्लाह मुहम्मद सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम ने अली अलैहिस्सलाम का हाथ पकड़ा किया और खुत्बा इर्शाद फरमाया। आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने अल्लाह की हम्द व सना बयान की, फिर कहा, “ऐ लोगों! मैं तुम्हारा वली हूँ।”, लोगों ने कहा, “या रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम! आप दुरुस्त फरमा रहे हैं।”

फिर आपने, हज़रत अली अलैहिस्सलाम का हाथ पकड़कर बुलंद किया और फरमाया, “ये मेरा वली है और मेरी तरफ़ से मेरा कर्ज अदा करेगा और जो इससे दोस्ती करेगा, अल्लाह उसे अपना दोस्त रखेगा और जो इससे दुश्मनी रखेगा, अल्लाह उसे दुश्मन रखेगा। सैयद शादाब अली

(कुछ रिवायतों में ये भी मिलता है कि रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया कि जो अली अलैहिस्सलाम को अपना दोस्त रखेगा, मैं उसका दोस्त रहूँगा और जो इससे दुश्मनी रखेगा, मैं उसका दुश्मन रहूँगा। यानी अली अलैहिस्सलाम से मुहब्बत करने वाले से, अल्लाह और रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम मुहब्बत करते हैं और अली अलैहिस्सलाम से दुश्मनी या बुग्ज़ रखना, अल्लाह और रसूलुल्लाह से दुश्मनी करने की तरह है।)

दूसरी हदीस

रावीयान ए हदीस, कुतैबा इब्न ए सईद (कुतै’बह), हाशिम बिन अम्मार, हातिम बिन इस्माईल, बुकैर बिन मिसमर।

हज़रत आमिर बिन साद बिन अबी वक्कास कहते हैं कि मुआविया ने हज़रत साद को अमीर बनाया और कहा की अबु तुराब को गालियाँ देने से तुझे कौन सी बात रोकती है? हज़रत साद रज़िअल्लाहु अन्हो ने जवाब दिया कि मुझे रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम की फरमाई हुई तीन ऐसी बात याद हैं, मैं उन्हें हरगिज़ गाली नहीं दूंगा और अगर एक बात भी मुझमें पाई जाए तो वो मुझे सुर्ख ऊँटों से ज्यादा महबूब है।

मैंने हज़रत अली के लिए रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम को फरमाते सुना है, आपने किसी गज़वा में हज़रत अली अलैहिस्सलाम को पीछे छोड़ा तो, हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने अर्ज़ किया, “या रसूलुल्लाह! क्या आप मुझे औरतों और बच्चों में पीछे छोड़े जा रहे हैं।”, तो रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम ने फरमाया, “या अली! क्या तुम इस पर खुश नहीं हो की तुम मुझे ऐसे हो जैसे मूसा को हास्न अलैहिस्सलाम थे मगर मेरे बाद कोई नबूवत का सिलसिला नहीं।”

और जंग ए खैबर के रोज़ मैंने आपको ये फरमाते हुए सुना कि, “कल हम उस शख्स को अलम/झंडा अता करेंगे जो अल्लाह त आला और उसके रसूल से मुहब्बत रखता है और अल्लाह तआला और उसका रसूल भी, उससे मुहब्बत रखते हैं।”, पस हम गर्दनें बुलंद
करके अलम झंडा की तरफ देख रहे थे तभी आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम ने फरमाया, “अली को मेरे पास बुलाओ।”, आप अली अलैहिस्सलाम जब वहाँ तशरीफ़ लाए तब आपकी आँखें दुख रही थीं, आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम ने, हज़रत अली की आँखों में लुभाब ए दहन मुबारक लगाया और आपको अलम/झंडा अता फरमाया।”

बस अल्लाह का इरादा ये है ऐ अहलेबैत (अलैहिस्सलाम) कि तुम से हर बुराई को दूर रखे और और इस तरह पाक व पाकीज़ा (साफ़-सुथरा) रखे जो पाक व पाकीज़ा (साफ़-सुथरा) रखने का हक़ है

नाज़िल हुई तो रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने हज़रत अली, बीबी फातिमा, हज़रत हसन और हज़रत हुसैन, अलैहिस्सलाम को बुलाया और फरमाया, “ऐ अल्लाह! ये मेरी अहलेबैत है।”

तीसरी हदीस

रावीयान ए हदीस, हिरमी बिन युनुस बिन मुहम्मद, अबु ग़स्सन(गासन), अब्दुस्-सलाम इब्न हर्ब, मूसा अस्-सगीर, अब्दुर-रहमान बिन साबित।

हज़रत साद बिन अबी वक्कास रजिअल्लाहु अन्हो फरमाते हैं कि मैं बैठा हुआ था कि लोग हज़रत अली के ऐब बयान करने लगे तो मैंनेकहा कि, मैंने रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम को, हज़रत अली अलैहिस्सलाम के तीन ख़साइस बयान फरमाते हुए सुना है। अगर उनमें से कोई एक ख़सलत भी मुझमें मयस्सर हो तो, वो मुझे सुर्ख ऊँटों से ज्यादा महबूब होती।

आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम फरमाते थे, “अली मुझे ऐसा है जैसे मूसा अलैहिस्सलाम को हारून अलैहिस्सलाम मगर मेरे बाद नबी नहीं।”

और मैंने आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम को ये भी फरमाते हुए सुना है कि, “कल मैं उस शख्स को अलम/झंडा अता करूँगा जो अल्लाह तआला और उसके रसूल से मुहब्बत करता है और अल्लाह त आला और उसका रसूल भी, उससे मुहब्बत करते हैं।”

और मैंने आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम को ये भी फरमाते हुए सुना है कि, “जिसका मैं मौला हूँ, अली भी उसका मौला है।”

चौथी हदीस

रावीयान ए हदीस, ज़क़रिया बिन यहया, नम्र बिन अली, अब्दुल्लाह बिन दाउद , अब्दुल वाहिद बिन ऐ’मान।

हज़रत साद रजिअल्लाहु अन्हो से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम ने फरमाया, “कल मैं उस शख्स को अलम/झंडा अता करूँगा जो अल्लाह त आला और उसके रसूल से मुहब्बत करता है और अल्लाह तआला और उसका रसूल भी, उससे मुहब्बत करते हैं और अल्लाह तआला उसके हाथ पर फतह अता करेगा।”

चुनाँचे आप असहाब नज़रें उठा-उठाकर अलम की तरफ़ देखने लगे लेकिन आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम ने वो अलम, हज़रत अली अलैहिस्सलाम को इनायत फरमा दिया।

पाँचवी हदीस
रावीयान ए हदीस, जकरिया बिन यहया, अल्-हसन बिन हम्माद, मुस’हिर बिन अब्दुल मालिक, ईसा बिन उमर।

हज़रत अनस बिन मालिक रज़िअल्लाहु अन्हो से रिवायत है कि, रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही वसल्लम के पास एक परिंदा था। आपने फरमाया, “या अल्लाह! तुझे अपनी मखलूक में से जो शख्स सबसे ज्यादा महबूब है उसे मेरे पास भेज ताकि वो मेरे साथ इस परिंदे का गोश्त खाए।”

हज़रत अबु बक़र रजिअल्लाहु अन्हो आए तो आपने उन्हें वापिस भेज दिया, फिर हज़रत उमर रजिअल्लाहु अन्हो आए तो उन्हें भी आपने वापिस भेज दिया, फिर हज़रत अली अलैहिस्सलाम आए तो आपने इन्हें अपने पास आने की इजाजत फरमा दी।

छटवी हदीस

रावीयान ए हदीस, अहमद बिन सुलेमान, उबैदुल्लाह इब्न ए मूसा, मुहम्मद बिन अब्दुररहमान बिन इब्न ए अबु लैला, अल्-हकम और अल-मिन्हाल।

हज़रत अब्दुर्-रहमान, अपने वालिद, अबु लैला से रिवायत करते हैं कि एक रोज़ वो हज़रत अली अलैहिस्सलाम के साथ-साथ चल रहे थे और चलते-चलते आपने मौला अली अलैहिस्सलाम से कहा, “लोग आपकी कुछ बातों को ताज्जुब की निगाह से देखते हैं। आप सर्द मौसम में सिर्फ दो पतली चादर या कमीज़ पहनकर बाहर निकलते हैं और गर्म मौसम में मोटे और गर्म मौसम में पहने जाने लायक कपड़े पहनकर बाहर निकलते हैं।”, मौला अली अलैहिस्सलाम ने पूछा, “क्या जंग ए खैबर में तुम हमारे साथ ना थे?, अबु लैला ने कहा, “मैं आपके साथ था।”

आप हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया, “रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने हज़रत अबु बकर बिन अबु कहाफा रजिअल्लाहु अन्हो को खैबर फ़तह करने के लिए झंडा देकर भेजा, तो वो बगैर फ़तह किए वापस आ गए, फिर आपने हज़रत उमर रजिअल्लाहु अन्हो को भेजा तो वो भी फ़तह किए बगैर ही वापिस आ गए फिर आप रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया, ” अब मैं उस शख्स को अलम/झंडा अता करूँगा जो अल्लाह त आला और उसके रसूल से मुहब्बत करता है और अल्लाह तआला और उसका रसूल भी, उससे मुहब्बत करते हैं और वो फरार होने वाला नहीं है और फिर आपने मेरी तरफ़ पैगाम भेजा और मैं आशूब चश्म में मुब्तिला था।”

आप मुहम्मद सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने मेरी आँखों पर लुआब ए दहन लगाया और बारगाह ए इलाही में दुआ की कि, “ऐ अल्लाह! अली की गर्मी और सर्दी से हिफाज़त कर।”

हज़रत अली करम अल्लाहु वज़हुल करीम फरमाते हैं कि इसके बाद मुझे ना कभी गर्मी का एहसास हुआ है और ना ही कभी सर्दी महसूस हुई है।

सातवीं हदीस

रावीयान ए हदीस, मुहम्मद बिन अली बिन हर्ब अल्-मरवाजी, मु’आज बिन खालिद, अल्हुसैन बिन वाकिदा

हज़रत अब्दुल्लाह बिन बुरैदह(बुरैदा) रजिअल्लाहु तआला अन्हो से रिवायत है कि मैंने अपने बाप बुरैदह को कहते सुना कि हम जंग ए खैबर के रोज़, पहलू ब पहलू चल रहे थे। अबु बकर रजिअल्लाहु अन्हो ने झंडा लिया मगर आपसे खैबर फ़तह ना हुआ। दूसरे दिन हज़रत उमर रजिअल्लाहु अन्हो ने झंडा लिया, आप भी लौट आए और फ़तह हासिल ना हुई और लोगों को भी तंगी और सख़्ती महसूस हुई तो रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया कि, “मैं कल उस शख्स को झंडा देने वाला हूँ जो,अल्लाह और उसके
रसूल से मुहब्बत करता है और अल्लाह और उसके रसूल भी उस से मुहब्बत करते हैं। वो फ़तह हासिल किए बगैर नहीं लौटेगा।

हमने रात बहुत खुशी से गुजारी की कल फ़तह हासिल होने वाली है, सुबह को रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने नमाज़ ए फज़र पढ़ाई फिर आकर खड़े हो गए और झंडा अता करने का इरादा फरमाया, लोग अपनी-अपनी टोलियों में थे। हम में से जो आदमी भी रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम की नज़र में अपना कोई मकाम समझता था, वो इस बात का आरजूमंद था की झंडा उसे मिले। मगर आपने हज़रत अली बिन अबु तालिब अलैहिस्सलाम को बुलाया तो उनको आशूब चश्म का आरजा था, आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने उनकी आँखों में लुआब ए दहन लगाकर हाथ फेरा और उनको अलम इनायत फरमाया और अल्लाह तआला ने आप हज़रत अली अलैहिस्सलाम के हाथ पर फ़तह अता फरमाई।

वो कहते हैं कि हमें ये बात उन लोगों ने बताई जो गर्दनें लंबी करके अलम को देख रहे थे।

आठवीं हदीस

रावीयान ए हदीस, मुहम्मद बिन बश्शार, मुहम्मद बिन जाफ़र, औफ़ बिन मैमून अबु अब्दुल्लाह, अब्दुल्लाह बिन बुरैदह।

हज़रत बुरैदह अल-असलमी रज़िअल्लाहु अन्हो फरमाते हैं कि जंग ए खैबर के दिन रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम, अहले खैबर के एक किले में उतरे (लश्कर के साथ) और आपने हज़रत उमर रजिअल्लाहु अन्हो को झंडा अता फरमाया। कुछ लोग हज़रत उमर के साथ गए और अहले खैबर के साथ लड़े और आखिर में मुंतशिर हुए और हारकर, रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम के पास वापिस लौट आए तो रसूलुल्लाह ने फरमाया, “मैं उस शख्स को अलम/झंडा अता करूँगा जो अल्लाह तआला और उसके रसूल से मुहब्बत करता है और अल्लाह तआला और उसका रसूल भी, उससे मुहब्बत करते हैं।”
और वो आशूब जब दूसरा दिन हुआ तो हज़रत अबु बक़र रज़िअल्लाहु अन्हो और हज़रत उमर रजिअल्लाहु अन्हो ने इसरार किया। पस आपने हज़रत अली अलैहिस्सलाम को बुलाया चश्म में मुब्तला थे। हुजूर सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने आपकी आँखों में लुआब ए दहन लगाया और कुछ लोग आपके साथ गए। आपका अहले खैबर से आमनासामना हुआ तो क्या देखते हैं कि मरहब ये अश्शार पढ़ रहा है

खैबर जानता है कि मैं मरहब हूँ। हथियारबंद हूँ और एक तजुर्बेकार बहादुर हूँ। जब शेर मेरी तरफ़ आते हैं तो मैं गजबनाक होकर कभी नेज़े-ज़नी और कभी शमशीर-ज़नी करता हूँ।

हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने इस पर (यानी मरहब पर) तलवार मारी जो इसके सर से पार हो गई। सब अहले लश्कर ने आपकी तलवार की आवाज़ को सुना। अभी अली अलैहिस्सलाम के लश्कर के कुछ लोगों को जंग करने का मौका भी नहीं मिला था और अल्लाह ने पहले ही आप अली अलैहिस्सलाम के हाथ पर खैबर की बड़ी फत्ह अता कर दी।

नौवीं हदीस

रावीयान ए हदीस, कुतैबह(कुतैबा) बिन सईद, याकूब बिन अब्दुर्-रहमान अज़-जुहरी।

हज़रत अबु हाज़िम (सलामा इब्न ए दीनार) कहते हैं मुझे, हज़रत सहल बिन साद रजिअल्लाहु अन्हो ने बताया कि, रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने खैबर के रोज़ फरमाया कि, “मैं कल उस शख्स को अलम/झंडा अता करूँगा, जिसके हाथ पर अल्लाह फ़तह अता फरमाएगा, वो अल्लाह त आला और उसके रसूल का मुहिब्बा है और उसके रसूल भी उसे महबूब रखते हैं।”

जब सुबह हुई तो लोग रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम के पास आ गए, हर आदमी इस बात का आरजूमंद था की झंडा उसे मिले।
आप रसूलुल्लाह ने फरमाया, “अली इब्न ए अबु तालिब कहाँ है?” लोगों ने कहा अली आशूब चश्म में मुन्तिला है।

आप सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने फरमाया, उनकी तरफ़ पैगाम भेजो। आप आए तो रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम ने आपकी आँखों में लुआब ए दहन लगाया और दुआ फरमाई तो आप तंदरुस्त हो गए, गोया आपको कोई तकलीफ ही ना थी। फिर रसूलुल्लाह ने आपको अलम अता फरमाया तो हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने अर्ज किया, “या रसूलुल्लाह सल्लललाहु अलैहे व आलिही व सल्लम, मैं इनसे उस वक्त तक जंग करूँगा यहाँ तक कि वो हमारे जैसे हो जाएँ यानी इस्लाम कुबूल कर लें।

इस के जवाब में रसूलुल्लाह ने फरमाया कि, “आराम और वकार से जाइए यहाँ तक की आप इनके सहन में उतर जाएँ फिर इन्हें दावत ए इस्लाम दें और अल्लाह तआला की जानिब से जो फराईज़ इन पर आइद होते हैं, वो इन्हें बताएँ और खुदा की कसम अगर अल्लाह रब उल इज्जत आपके ज़रिए एक आदमी को भी हिदायत देदे तो वो आपके लिए सुर्ख ऊँटों से बेहतर है।”

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