अमरीका की खोज की सच्चाई।


अमरीका की खोज के बारे में

पश्चिमी जगत के विद्वानों और अरब इतिहासकारों का दावा है कि स्पैनिश, नाविक कोलम्बस के 1492 ई० में अमरीका पहुँचने से पाँच सौ वर्ष पहले मुसलमान अमरीका पहुँच चुके थे। उन पाँच सौ वर्षों में उन्होंने वहाँ बस्तियाँ बसा ली थी और अमरीका के मूल निवासियों ‘रेड इण्डियन’ के रहन-सहन पर भी प्रभाव डाला।

इस बारे में सैकड़ों प्रमाण और पुराने नाविकों व खोजकर्ताओं के साक्ष्य मौजूद हैं। अमरीका के हारवर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता डा० बैरी फ़ाल ने 1980 ई० में प्रकाशित पुस्तक ‘Saga America’ में कुछ वैज्ञानिक प्रमाण और साक्ष्यों की रोशनी में यह सिद्ध किया है कि कोलम्बस के अमरीका पहुँचने से पहले इस्लाम की रोशनी वहाँ पहुँच चुकी थी। हज़ारों मुस्लिम परिवार वहाँ जाकर बस गये थे। डा. बैरी फ़ाल ने दावा किया है कि उसने अमरीका के कोलोरेडो, न्यू मैक्सिको, इण्डियाना, अल्लान स्प्रिंग, लोगोमारसिनो और अन्य क्षेत्रों में मुसलमानों के मदरसों के अवशेष देखे हैं। उनका कहना है इन क्षेत्रों में चट्टानों पर उत्तरी अफ्रीका में प्रयोग की जाने वाली कूफ़ी अरबी लिपि अंकित है जो इस बात का साक्ष्य है कि मुसलमानों ने वहाँ बसने के पश्चात प्राथमिक और उच्च शिक्षा देने का सिलसिला जारी रखा। डा. बैरी फ़ाल का कहना है वहाँ धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ गणित, इतिहास, भूगोल, खगोल और जहाजरानी की शिक्षा भी दी जाती थी। उत्तरी अमरीका के वासी अल्गोन्किन, अनासाजी, होहोकम और ऑल्मेक उन्हीं मुसलमानों के वंशज हैं।

शोधकर्ताओं का दावा है 1492 ई. में मुसलमानों के अंतिम आवास ग्रेनाडा पर स्पैन के ईसाइयों ने वर्चस्व प्राप्त कर लिया। उसके बाद उन्होंने गैर-ईसाइयों को मृत्यु दण्ड देने का काम शुरू किया। मौत के डर से हज़ारों महान मुस्लिम वैज्ञानिक

लोग वहाँ से पलायन कर गये या रोमन कैथोलिक ईसाई बना दिये गये।

स्पैन के राजा चार्ल्स के 1543 ई. के एक आदेशानुसार स्पैन के सुदूर उपनिवेशों में रहने वाले मुसलमानों के विरुद्ध देश निकाले की कार्यवाही की गई। उससे पहले और ईसाइयों को जिंदा जलाकर मार दिया जाता था। इस प्रकार धर्म के नाम पर ईसाइयों ने मुसलमानों की हत्या की।

मुस्लिम भूगोलशास्त्रियों और यात्रियों ने अपने लेखों में अटलांटिक महासागर पार करके नामालूम भू-भाग (अर्जे मजहूला) का जिक्र किया है। नवीं शताब्दी के भूगोलशास्त्री और इतिहासकार अल-मसऊदी (871 ई० 957 ई.) ने अपनी पुस्तक मूरूज अद्दहब व मदीन अल-जवाहर में लिखा है, “स्पैन के मुस्लिम शासक अब्दुल्ला इब्ने मुहम्मद (888 ई० 912 ई.) के ज़माने में एक मुस्लिम नाविक ख़शख़ाश इब्ने सईद इब्जे अस्वद स्पैन की देलवा (Palos) की बंदरगाह से 889 ई० में रवाना हुआ और अटलांटिक महासागर पार करके एक नामालूम इलाके में पहुँचा। उस युग में अटलांटिक महासागर को कोहरे और अंधेरे का सागर कहा जाता था।

एक और मुस्लिम इतिहासकार अबू बक्र इब्ने उमर के अनुसार, “स्पैन के शासक हश्शाम द्वितीय (976 ई० 1000 ई.) के ज़माने में एक मुस्लिम नाविक इब्ने फ़र्रुख़ फ़रवरी 999 ई. में अटलांटिक के केनरी द्वीपों में उतरा और वहाँ के राजा से मिलकर पश्चिम की ओर यात्रा जारी रखी। वहाँ उसने दो द्वीप देखे जिनका नाम उसने कपारिया और प्लूइटाना रखा।”

कोलम्बस के पुत्र फ़र्डीनेण्ड कोलम्बस ने लिखा है जब उसके पिता होण्डुरास पहुँचे वहाँ उन्होंने हब्शी लोग देखे जो बिल्कुल काले थे उसी क्षेत्र में अलमामी नाम का मुस्लिम क़बीला भी आबाद था। मन्दिण्का भाषा में अलमामी दरअसल अरबी शब्द अलइमाम से आया है। जिसका मतलब है नमाज़ पढ़ाने वाला। अमरीका के हारवर्ड विश्वविद्यालय के सुप्रसिद्ध इतिहासकार लियो वेनर 1920 ई० में लिखित अपनी पुस्तक Africa and Discovery of America में कहते हैं, “कोलम्बस नई दुनिया में मन्दिण्का के आवास से भली-भाँति परिचित था, वह जानता था अफ्रीक़ा

के मुसलमान कैरिबियन, मध्य, दक्षिण और उत्तरी अमरीका तक फैले हुए थे। यहाँ तक कि उनकी बस्तियाँ कनाडा तक बस चुकी थीं। यह लोग व्यापारी थे और इरोक्वीस व अलगोन्किन इण्डियन से शादियाँ भी करते थे।”

इसी तरह मुस्लिम भूगोलशास्त्री अल-इदरीसी (1099 ई० – 1166 ई.) ने अपनी पुस्तक नुजहत अल-मुश्ताक़ फ़ी-इख़्तिराक अल-आफ़ाक़ में लिखा है, “कि मुस्लिम नाविकों ने लिस्बन (पुर्तगाल) से अटलांटिक महासागर में पश्चिम की ओर यह जानने के लिये यात्रा की कि संसार के उस छोर पर क्या है। आखिरकार वह एक ऐसे द्वीप पर पहुंचे जहाँ लोग खेती करते थे। चार दिन बाद वहाँ के एक अनुवादक ने उनसे अरबी में बात की। चौदहवीं शताब्दी के मुस्लिम इतिहासकार शहाबुद्दीन अबुल अब्बास अहमद बिन फ़ज़ल अल-उमरी (1300 ई० – 1384 ई०) ने अपनी पुस्तक मसालिक अल-अबसार फ़ी ममालिक अल-अमसार में अटलांटिक महासागर के पार भेजे जाने वाले जल अभियानों का वर्णन किया है। कोलम्बस की यात्रा में न केवल दो मुसलमानों के वंशज नाविक उसके साथ थे बल्कि उसने अल-मसऊदी (871 ई. – 957 ई.) और दूसरे ० मुस्लिम जहाज़रानों के तैयार किये गये मानचित्रों की भी सहायता ली। उसके बेड़े में शामिल दो जहाजों की कमान स्पैनिश मुसलमानों के वंशजों मार्टिन अलान्सों पिंजोन और उसके भाई विसेन्टी यानेज़ पिंजोन ने संभाल रखी थी। इन दोनों भाइयों का सम्बंध मराक़श के मरिनिद शाही परिवार के राजा अबू जैद मुहम्मद तृतीय से था (नोटः स्पैन पर दोबारा क़ब्जे के पश्चात ईसाइयों ने मुसलामनों को ज़ोर-ज़बरदस्ती ईसाई धर्म मानने पर मजबूर किया या उन्हें जान से मार डाला)।

मानव विज्ञान इस बात पर सहमत है कि तेरहवीं शताब्दी में अफ्रीक़ी देश माली के मनदिएका शाही परिवार के आदेश पर नाविकों के कई दल अमरीका पहुँचे और उन्होंने मिसीसिप्पी नदी के रास्ते अमरीका के कई क्षेत्रों जिनमें एरीज़ोना भी शामिल है का पता लगाया।

कोलम्बस ने 21 अक्तूबर 1492 ई. के लेख में इस बात की पुष्टी की है

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