इब्ने जुबैर( 1145 – 1217 ई.)

इब्ने जुबैर
( 1145 – 1217 ई.)

इब्ने जुबैर स्पैन के शहर वेनिस में पैदा हुए। उन्होंने सुयोता और ग़रनाता में शिक्षा प्राप्त की। जब उनकी विद्या और ज्ञान की चर्चा पूरे देश में होने लगी तो वहाँ के शासक ने उन्हें अपना मुंशी बना लिया।

इब्ने जुबैर एक प्रसिद्ध विद्वान ही नहीं यात्री भी थे। जिन्होंने एशियाई देशों की कई यात्राएं कीं और अपनी यात्राओं का रोचक वर्णन किया।

उनकी यात्रा का क़िस्सा भी बड़ा रोचक है। एक बार वह राजा के पास बैठे हुए कुछ लिख रहे थे कि उसने शराब की मस्ती में उन्हें जाम पेश किया। इब्ने जुबैर ने मना कर दिया। शराब के नशे में राजा बोला कि अब तुझे सात जाम पीने पड़ेंगे। मजबूर होकर उन्होंने सात जाम शराब पीली। आठवां जाम उसने सोने के सिक्कों से भरकर दिया। इब्ने जुबैर लिखते हैं ‘मैंने वह पैसे जेब में डाले और घर चला आया। क्योंकि इस्लाम में मदिरापान निषेध है, मुझे पाप का एहसास हुआ और मैंने तौबा करने का निश्चय किया।” जो पैसा राजा ने दिया था उससे हज पर चले गये। मक्का और मदीना जाकर वह इराक़, सीरिया और मिस्र की यात्रा पर निकले। वह यात्रा का वर्णन रोज़ाना अपनी डायरी में करते।

मिस्र की यात्रा के बारे में उन्होंने लिखा “हमारा जहाज़ सिर्डिनिया के दक्षिणी तट पर एक बंदरगाह में लंगर अंदाज़ हुआ वहाँ से हम इसकन्दरिया पहुँच गये। वहाँ मिस्र के सरकारी कर्मचारी जहाज़ पर सवार हुए और सभी यात्रियों के बारे में ज़रूरी जानकारी लिखी। हर मुसाफ़िर को अलग ले जाकर उसका हाल पूछा इसके बाद मजिस्ट्रेट और राजा के दरबारियों ने यात्रियों का विवरण लिखा और शहर में जाने की आज्ञा दी।”

इब्ने जुबैर ने कई कठिन यात्राएं की एक बार तो यात्रा के दौरान, खाद्य सामग्री समाप्त हो गई और उन्हें सूखी रोटी के टुकड़े पानी में भिगोकरमहान मुस्लिम वैज्ञानिक

खाने पड़े।

इब्ने जुबैर की यात्राओं से यूरोपीय और अरब यात्रियों ने बड़ी मदद ली। लेकिन लम्बे समय तक उनका सफ़रनामा मुस्लिम दुनिया की नज़रों से ओझल रहा जिसका बहुत बाद में फारसी, तुर्की और उर्दू भाषाओं में अनुवाद किया गया।

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