इब्नुल हैसम (Alhazen) (965 ई० 1040 ई०)

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इब्नुल हैसम (Alhazen) (965 ई० 1040 ई०)

इब्नुल हैसम का पूरा नाम अबू अली-हसन बिन हुसैन हैसम है। इब्लुल हैसम को यूरोप में अल-हैज़न के नाम से जाना जाता है।

इब्जुल हैसम इब्नुल हैसम का जन्म बसरा में हुआ। वहीं उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और पढ़ाई के बाद एक सरकारी दफ़्तर में नौकरी करने लगे। दिनभर वह काम करते और छुट्टी के पश्चात गणित, खगोल शास्त्र, आयुर्विज्ञान और भौतिकी का अध्ययन करते।

इब्नुल हैसम को वैज्ञानिक शोधों में गहरी रुचि थी अत: उन्होंने कई वर्ष वैज्ञानिक शोधों में लगाए और अपने शोध का निचोड़ एक पुस्तक ‘किताबुल मनाज़िर’ के रूप में संसार के समक्ष प्रस्तुत किया। ।

प्रकाश का वर्णन करते हुए इब्नुल हैसम दो पिंडों का अन्तर बताते हैं। एक प्रज्वलित पिंड और दूसरा अप्रज्वलित पिंड। जो पिंड प्रकाश उत्पन्न करते हैं इनमें वह सूर्य, तारे और दीये का नाम लेते हैं। प्रकाश जब वस्तुओं पर पड़ता है तो वह तीन प्रकार की होती हैं, पारदर्शी, अर्द्धपारदर्शी और अपारदर्शी। उनके अनुसार वायु, जल और शीशा पारदर्शी हैं, बारीक कपड़ा अर्द्धपारदर्शी है, परन्तु मोटे धागों वाला कपड़ा प्रकाश को अवरुद्ध कर देता है। आज के युग में प्रकाश के दो नियम जो हर पुस्तक में दिये जाते हैं इनकी खोज का सेहरा इब्नुल हैसम के सर जाता है। इब्नुल हैसम प्रतिछाया से भी भली-भांति परिचित थे।

अपनी पुस्तक किताबुल मनाज़िर में इब्नुल हैसम ने आँख के विभिन्न भागों का विस्तार से वर्णन किया है। उन्होंने वृहणयन्त्र (Magnifying Glass) के बारे में शोध किये। इब्नुल हैसम ने उस युग में यह पता लगा

लिया था कि पिंड का भार स्वच्छ और मलिन वातावरण में भिन्न होता है। आपने पाँच सौ वर्ष पूर्व वातावरण भार का भी पता लगा लिया था। उन्हें वैज्ञानिक विधि (Scientific Method) का अगवा और प्रकाश विज्ञान (Optics) का पितामह कहा जाता है।

इजुल हैसम की पुस्तक पर यूरोप के बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में चर्चा को गई है और इस पुस्तक का अनुवाद संसार की सभी बड़ी भाषाओं में हो चुका है। यूरोपीय विद्वान भी यह बात स्वीकार करते हैं कि इब्नुल हैसम अपने युग का सबसे महान भौतिकशास्त्री था। इनुल हैसम ने नील नदी के बहाव से सम्बंधित एक परियोजना बनाई। जिससे पूरे वर्ष कृषि के लिए पानी मिल सके। वह इस परियोजना को लागू करने के लिए मिस्र भी गये लेकिन उसे व्यवहारिकता में लाना मुश्किल था।

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