इब्नुल नफ़ीस (1213 ई० 1288 ई.)



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इब्नुल नफ़ीस (1213 ई० 1288 ई.)

इब्नुल नफ़ीस का पूरा नाम अलाउद्दीन अबुल हसन अली इब्ने अल-हज्म अल-मिस्री अल-शाफ़ई था। उन्होंने दमिश्क़ में शिक्षा प्राप्त की। वह एक निपुण चिकित्सक ही नहीं हदीस के भी ज्ञाता थे। उन्हें Circulatory Physiology का पितामह कहा जाता है। उन्होंने सबसे पहले चयापचय का सिद्धांत (Concept of Metabolism) पेश किया।

उन्होंने नेत्र रोगों और मनुष्य के भोजन पर खोज करके कई पुस्तकें लिखीं। अतः उनकी पुस्तक ‘किताबुल मुख़्तार मिनल अग़ज़िया’ भोजन शास्त्र पर विशेष पुस्तक मानी जाती है। इब्ने सीना की पुस्तक ‘क़ानून-फ़िल तिब’ का विस्तारपूर्वक विवरण लिखते हुए इब्लुल नफ़ीस ने इब्ने सीना के इस दृष्टिकोण का विरोध किया है जिसके अनुसार गंदा खून रक्तवाहिनी (Vein) के द्वारा हृदय के दाहिने कोष (Ventricle) में आता है। इसके ख़िलाफ़ उन्होंने कहा कि दाहिने कोष से गंदा खून फैफड़ों में जाता हैं जहाँ उसकी गंदगी दूर होती है। दरअसल इब्ने सीना का दृष्टिकोण जालीनूस के पुराने दृष्टिकोण पर आधारित था और बड़े-बड़े चिकित्सक उसे सही मानते थे। यूरोपीय विद्वान जॉर्ज सार्टन कहता है कि इस प्रकटन के कारण इब्नुल नफ़ीस को मध्यकालीन युग का सबसे महान शरीर-वैज्ञानिक (Physiologist) समझना चाहिये। इब्नुल नफ़ीस की पुस्तक को इतनी ख्याति मिली कि उस पर कई विवरण लिखे गये।

यूरोप वाले हृदय के बारे में इब्नुल नफ़ीस के दृष्टिकोण को स्पैन के मिजेल सरवेट (Miguel Servetus) से जोड़ते हैं। इब्नुल नफ़ीस का देहान्त 1288 ई० में हुआ जबकि सरवेट को 1553 ई. में चर्च के आदेश पर जलाकर मार दिया गया। मरने से पहले वह अपना दृष्टिकोण एक धार्मिक पुस्तक में छिपा गया था जो बाद में मिला और उसे सरवेट से जोड़ दिया

पश्चात् उसे गया। जबकि उससे ढाई सौ वर्ष पूर्व इब्लुल नफ़ीस शोध के प्रस्तुत कर चुके थे। लेकिन यूरोप वालों की बेशर्मी कि वह पूरी ढिटाई से उसे अपना शोध घोषित करते हैं। यही खोज बाद में विलियम हार्वे की मार्गदर्शक बनी।

इब्नुल नफ़ीस के विवरण ‘मोजजुल क़ानून’ की एक प्रति बर्लिन के पुस्तकालय में मौजूद है। बीसवीं शताब्दी में एक मिस्त्री विद्वान मुहियुद्दीन अल-तातारी ने उस पुस्तक का अरबी से जर्मनी में अनुवाद किया तो दुनिया को पता चला कि विलियम हार्वे से बहुत पहले इनुल नफ़ीस (Circulation of Blood) पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत कर चुके थे। इब्नुल नफ़ीस ने नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) के तौर पर भी एक पुस्तक ‘किताबुल काफ़ी-अल-कुहल्ल’ लिखी, यह पुस्तक दो खण्डों में है। >

इब्नुल नफ़ीस आँख की सर्जरी का विशेषज्ञ था। वह कठिन से कठिन ऑप्रेशन की ज़िम्मेदारी ले लिया करता था। उसने आँख के विभिन्न भागों, झिल्लियों और रगों के चित्र बनाए हैं। वह आँख के ऑप्रेशन में छत्तीस औजारों का प्रयोग करता था। उसकी पुस्तक ‘किताबुल काफ़ी फ़िलकुहल’, नेत्र रोगों पर एक प्रामाणिक पुस्तक है। आज साइंस फ़िक्शन पर है उपन्यास, डाईजेस्ट और फ़िल्में बन रही हैं। अध्यात्मिकता और विज्ञान पर आधारित प्रथम उपन्यास तेरहवीं शताब्दी में उन्होंने लिखा।

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