सबका पेशवा अली है मेरा पीर अली है

*सबका पेशवा अली है मेरा पीर अली है*
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*हज़रत काब बिन ज़हीर रादियल्लाहु तआला अन्हु* *(26H) जो कि एक सहाबी-ए-रसूल सल्लाहो अलैह वा सल्लम है अपने दीवान ( Bānat Suʿād) में एक मनकबत लिखते है जिसमे हज़रत अली की शान में एक मिसरा कहा है जिससे उनका हज़रत अली को तफ़ज़ील देना साबित होता है जो ज़ैल में दर्ज किया जा रहा है*

*يا خير من حملت نعلا له قدم بعدا نبی*

*तर्जुमा: अये अली आप उनमे सबसे अफ़ज़ल है जो नबी सल्लाहो अलैह वा सल्लम के बाद ज़िंदा रहे*

*हज़रत अली के बारे में इमाम शाफ़ई (रादियल्लाहु तआला अन्हु)ने जो शेर लिखा है उनमे से एक मिसरा पेश किया जा रहा है*

*يا علي انت خير امام و خير هاد*

*तर्जुमा : अये अली(अस) आप सब से अफ़ज़ल इमाम और सबसे अफ़ज़ल हादी हैं*

(नोट) :*इमाम शाफ़ई के दीवान का उर्दू तर्जुमा देहली के उर्दू बाजार में मिलता है*

*अल-फिसल” में अल्लामा इब्न हाज़म (रह)लिखते है कि हज़रत इमाम हसन(अलैहस्सलाम) और हज़रत अम्मार बिन यासर(रदियल्लाहु तआला अन्हु)हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ (रदिअल्लाह तआला अन्हु )और हज़रत उमर(रदियल्लाहु तआला अन्हु) पर हज़रत अली(अस) को तफ़ज़ील देते*


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