अल्लाह का ज़िक्र

अल्लाह का ज़िक्र

मौलाना जलालुद्दीन रूमी रहे, फ़रमाते हैं एक

सुफी अल्लाह के ज़िक्र में शब बेदारी कर रहा था- शैतान ने कहा ऐ सुफी खामोश रहे तेरे ज़िक्र का क्या फायदा अल्लाह की तरफ़ से जवाब नहीं आ रहा सुफी दिल बर्दाश्ता हो गया, ख्वाब में ख़िज़ अलैहिस्सलाम से

मुलाक़ात हुई आपने फ़रमाया अल्लाह के ज़िक्र से क्यु गाफील हो गए हो- सुफी कहेने लगा अल्लाह की तरफ़ से जवाब नहीं आ रहा ईस लिए ज़िक्र छोड़ दिया, ख़िज़ अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया अल्लाह कहता है ऐ बंदे तेरा अल्लाह कहेना ही मेरा जवाब है जबतक तेरा

पहेली बार अल्लाह कहेना कबुल नहीं होता उस वक़्त तक में दुसरी बार कहेने की तौफीक नहीं देता

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