क़ातिलीन ए इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का अंजाम पार्ट 2

अमर सअद का अंजाम

खौली के बाद अमर सअद पेश किया गया। यह वही नाबकार है जिसने करबला में अहले बैत पर पानी बन्द किया था और नन्हें-नन्हें बच्चों को पानी के लिए तड़पाया था। यह बदबख़्त जब मुख़्तार के सामने हाज़िर किया गया तो उस पर नज़र पड़ते ही मुख्तार की आंखों से चिंगारियां बरसने लगीं।

मुख़्तार ने कहा ऐ दुश्मने आले रसूल बता तुझे क्या सज़ा दूं तूने ही तो अहले बैत पर पानी बन्द किया था। उसने कहा कि उसका ज़िम्मेदार इने ज़्याद है। मैंने तो सिर्फ हुक्म की तामील की थी। यह सुन कर मुख्तार की आंखें सुर्ख हो गई। इसी दर्मियान खबर मिली कि सद का बेटा हफस जो करबला में इमाम पाक के खिलाफ अपने बाप की मदद कर रहा था गिरफ्तार करके लाया गया। मुख्तार ने हुक्म दिया कि उसे फौरन मेरे सामने हाज़िर किया जाए। जब वह मुख्तार के सामने लाया गया तो मुख्तार ने जल्लाद को हुक्म दिया कि इने सअद के

करके नोके नेज़ह पर बुलन्द करके नाचा था। जब मुख़ार के सामने पकड़ कर लाया गया तो मारे खौफ के कांपने लगा। उसे देखते ही मुख्तार की आंखें सुर्ख हो गई। और मुख्तार के सीने में गज़ब की आग भड़क उठी। मुखलार ने जल्लाद को हुक्म दिया कि इस लईन के दोनों हाथ काट डालो। जब उसके दोनों हाथ काट डाले गये तो दोनों पांव काटने का हुक्म दिया, तक्लीफ की शिद्दत से वह ज़मीन पर तड़पने लगा। मुख्तार ने कहा तेरी लगाई हुई आग मुसलमानों के सीनों में भड़कती रहेगी। अभी तेरे आमाल की सज़ा काफी नहीं है। उसके बाद मुख्तार ने खोली के घर वालों को इकट्ठा किया। और उन्हीं के सामने उस नाबकार को तड़पा कर कत्ल कर दिया और फिर उसे जिन्दा जला दिया। मुख़्तार उस वक्त तक उसके लाश के पास खड़ा रहा जब तक उसकी लाश जल कर खाक न (तारीखे तबरी, स. 502, अल-हुसैन स. 165) हो गई।

अमर सअद का अंजाम

खौली के बाद अमर सअद पेश किया गया। यह वही नाबकार है जिसने करबला में अहले बैत पर पानी बन्द किया था और नन्हें-नन्हें बच्चों को पानी के लिए तड़पाया था। यह बदबख़्त जब मुख़्तार के सामने हाज़िर किया गया तो उस पर नज़र पड़ते ही मुख्तार की आंखों से चिंगारियां बरसने लगीं।

मुख़्तार ने कहा ऐ दुश्मने आले रसूल बता तुझे क्या सज़ा दूं तूने ही तो अहले बैत पर पानी बन्द किया था। उसने कहा कि उसका ज़िम्मेदार इने ज़्याद है। मैंने तो सिर्फ हुक्म की तामील की थी। यह सुन कर मुख्तार की आंखें सुर्ख हो गई। इसी दर्मियान खबर मिली कि सद का बेटा हफस जो करबला में इमाम पाक के खिलाफ अपने बाप की मदद कर रहा था गिरफ्तार करके लाया गया। मुख्तार ने हुक्म दिया कि उसे फौरन मेरे सामने हाज़िर किया जाए। जब वह मुख्तार के सामने लाया गया तो मुख्तार ने जल्लाद को हुक्म दिया कि इने सअद के

सामने ही उसके बेटे का सर तन से जुदा कर दो ताकि उस नाबकार को मालूम हो जाए कि इमाम पाक के दिल पर हजरत अली अकबर और हज़रत अली असगर की तड़पती हुई लाश देख कर क्या गुज़रती थी जल्लाद ने जूं ही उसके बेटे की गर्दन पर तलवार चलाई इने सअद चिल्ला उठा। अभी वह अपना सर पीट ही रहा था कि मुख्तार का हुक्म हुआ कि इने सअद की भी गर्दन मार दी जाए। उस नाबकार की गर्दन को जल्लाद ने उड़ा दिया और दोनों बाप बेटे का सर मुख़्तार मुहम्मद हनफीया रज़ि अल्लाहु अन्हु के पास भेज दिया। ने हज़रत

(तारीखे तबरी, स. 507, नक्शे करबला, स. 70)

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