कातिलाने इमाम हुसैन का इबरतनाक अंजाम यज़ीद की भयानक मौत का मन्ज़र!

कातिलाने इमाम हुसैन का इबरतनाक अंजाम यज़ीद की भयानक मौत का मन्ज़र!

हाकिम ने हजरत सैय्यदना इब्ने अब्बास रजि अल्लाहु अन्हु से रिवायत की है:

तरजुमा : यानी अल्लाह ने अपने प्यारे महबूब सल्लल्लाहु अलैहि व व सल्लम पर वही भेजी कि मैंने यहिया इन्ने जकरिया के एवज सत्तर हज़ार को मारा और ऐ महबूब आपके नवासे के एवज सत्तर हज़ार और सत्तर हज़ार यानी एक लाख चालीस हज़ार मारूंगा।

यज़ीद एक ऐसे ला इलाज मरज़ में मुलला हो गया था जिसकी वजह से उसकी मुंह से बदबू बहुत तेज़ आती थी। उसकी जुबान और तालू में कीड़े पड़ गये थे। जिसकी वजह से उसके घर वाले बेचैन रहते थे। एक दिन रूम से एक आतिश परस्त हकीम बुलाया गया। हकीम ने यज़ीद की नब्ज़ पर हाथ रखा तो उसने बरजसता कहा कि यह तो ला इलाज बीमारी है। तुम जंगल की सैर किया करो। यज़ीद ने फौरन अपने टटू सिपाहियों को हुक्म दिया कि फौरन जंगल की सैर को

चलो। सारे सिपाही फौरन तैयार हो गये और जंगल में जा पहुंचे। वहां एक खूबसूरत हिरन नज़र आया यज़ीद ने उसका पीछा किया। हिरन कुछ दूर जा कर गायब हो गया। जब यज़ीद मायूस हो कर वापस होने लगा तो अचानक एक आग की दीवार जाहिर हुई जिसने यज़ीद को चारों तरफ से घेर लिया।

रिवायतों में है कि वह सहरा जहन्नम का था जिस जगह जहन्नमियों को क्यामत तक अज़ाब दिया जाता है। जब यज़ीद की फौज तलाश करते हुए वहां पहुंची तो एक गैबी आवाज़ आई कि यज़ीद जहन्नम के एक दलदल में जा फंसा।

जो आग और सांप और बिच्छुओं से पुर है। जब सिपाहियों ने यह सुना तो अपने-अपने सरों पर ख़ाक डालते हुए दमिश्क की राह ली और फरार हो गये।

यज़ीद की हुकूमत कुल तीन साल आठ माह थी। 64 हिजरी में मरवान ने यज़ीद की बीवी से निकाह कर लिया मगर किसी बात पर झगड़ा हो जाने से उस औरत ने मरवान को कत्ल करवा दिया।

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