असीराने हरम और दरबारे यज़ीद

असीराने हरम और दरबारे यज़ीद

असीराने हरम तमाम कूचा व बाज़ार में गश्त कराते हुए दरबारे यज़ीद में लाए गये। दरबार को रंग बिरंग झण्डों से सजा दिया गया था। बहुत से लोग यज़ीद को मुबारकबाद देने के लिए दरबार में हाज़िर हुए थे। यज़ीद खुशी से फूले नहीं समाता था। अपने ख्याल में उसे बड़ी जीत हुई थी। और अब सलतनत के राह की तमाम रुकावटें ख़त्म हो गई थीं।

अहले बैत दरबारे यज़ीद में पहुंचे सरहाए शुहदा पहले ही आ चुके थे इमाम हुसैन रज़ि अल्लाहु अन्हु का सर यज़ीद के सामने रखा गया। अहले बैत दरबार के एक हिस्से में खड़े किए गये जो कैदियों के लिए मख्सूस था। यज़ीद की नज़रें अहले बैत पर थीं खुशी से फूले नहीं समाता था कि हमने आज अपने बाप दादा का बदला ले लिया है। दरबार में सन्नाटा था हर शख़्स यह सोच रहा था कि असल मुआमला क्या है किसी को पता नहीं था कि यह लोग किस कौम व कबीला के हैं सब लोग यही समझते थे कि उन लोगों ने हुकूमत के खिलाफ खुरूज किया था या यह कि यह लोग चोर और डाकू थे जैसा कि हुकूमत के कारिन्दों ने मशहूर कर रखा था। हज़रत जैनब ने अपनी तकरीर से लोगों की आंखों से पर्दे हटा दिए।

उस वक़्त यज़ीद शराब पी कर मस्त हाथी की तरह झूम रहा था, असीराने हरम दरबारे यज़ीद में रसन बस्ता खड़े हैं, सारे लोगों के जिस्म आगे की तरफ झुके हुए थे। यज़ीद ने झुकने का सबब पूछा तो हज़रत सैय्यदा ज़ैनब रज़ि अल्लाहु अन्हा ने जवाब दिया रस्सी एक है और गले चौदह हैं। उन कैदियों में सबसे कम्सिन सकीना है। हम लोग जब सीट ने खड़े होते हैं तो उस बच्ची के छोटे-छोटे कदम होने की वजह से रस्सी में लटक जाती है और उसका दुम घुटने लगता है, यज़ीद यह सुन कर हंस पड़ा। और सर इमाम को एक तश्त में रखने का हुक्म दिया। इमाम आली मकाम रज़ि अल्लाहु अन्हु का सरे अनवर एक तश्त में रखा गया। यज़ीद के हाथ में एक छड़ी थी जिस से लबहाए इमाम आली मकाम के साथ बेअदबी करने लगा। यज़ीद की इस हरकत से तमाम लोग कांप उठे।

अल्लामा शैख़ मुहम्मद बिन अलस्सबान अलैहिर्रहमा फरमाते हैं : तरजमा : पस इने ज़ियाद ने हज़रत इमाम के सरे अनवर को मआ उनके अहले बैत के जिन में हज़रत इमाम जैनुल आबेदीन और उनकी फूफ़ी हज़रत ज़ैनब भी थीं। यज़ीद के पास भेजा तो वह यज़ीद बहुत ज़्यादा खुश हुआ और उसने उन कैदियों के मक़ाम पर खड़ा किया। और उनकी तौहीन की और लकड़ी की छड़ी से सरे अनवर को उलट पलट करता और मारता था और कहता था ऐ हुसैन तूने अपनी बगावत का अंजाम देख लिया और उसने खुश व फरहत में मुबालेगा किया फिर वह नादिम हुआ। इस वजह से कि उसके इस फेअल पर मुसलमान उस से बुग्ज रखेंगे और मख्लूक उस से नफरत करेगी।

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