हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की अपने अहले बैत के बारे में वसीयत और मोहब्बत

तरजमा : हज़रत अबू सईद खुद्री रज़ि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : आगाह हो जाओ! मेरा जामा दान जिससे मैं आराम पाता हूं मेरे अहले बैत हैं और मेरी जमाअत अन्सार हैं। उनके बुरों को मुआफ कर दो और उनके नेकोकारों से (अच्छाई को) कबूल करो। इस हदीस को इमाम तिर्मिज़ी और इने अबी शैबा ने रिवायत किया है नीज़ तिर्मिज़ी ने फरमाया कि यह हदीस हसन है।

हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का हसनैन करीमैन रज़ि अल्लाहु अन्हुमा का नाम रखने, उनके कानों में अज़ान देने और उनकी तरफ से अकीका करने का बयान

तरजमा : हज़रत अबू राफे रज़ि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मैंने हुजुर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को देखा कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सैय्यदा फातिमा रजि अल्लाहु अन्हा के हां हसन बिन अली रज़ि अल्लाहु अन्हुमा की विलादत होने पर उनके कानों में नमाज़ वाली अज़ान दी। इस हदीस को इमाम तिर्मिजी, अबू दाऊद और अहमद बिन हंबल ने रिवायत किया है और इमाम तिर्मिज़ी ने फरमाया कि यह हदीस हसन सही है।

तरजमा : हज़रत आइशा रजि अल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : हज़रत अली का जिक्र भी इबादत है। इस हदीस को इमाम दैलमी ने रिवायत किया है।

तरजमा : हज़रत आइशा रजि अल्लाहु अन्हा बयान करती हैं कि मैंने अपने वालिद हज़रत अबू बकर रज़ि अल्लाहु अन्हु को देखा कि वह कसरत से हज़रत अली रज़ि अल्लाहु अन्हु के चेहरे को देखा करते। पस मैंने आपसे से पूछाः ऐ अब्बा जान! क्या वजह है कि आप कसरत से हज़रत अली रज़ि अल्लाहु अन्हु के चेहरे की तरफ तकते रहते हैं? हज़रत अबू बकर सिद्दीक रज़ि अल्लाहु अन्हु ने जवाब दिया : ऐ मेरी बेटी! मैंने हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फरमाते हुए सुना है कि अली के चेहरे को तकना भी इबादत है। इस हदीस को इमाम इने असाकिर ने बयान किया है।

तरजमा : हज़रत अनस रज़ि अल्लाहु अन्हु से मरवी है कि हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मस्जिद में तशरीफ़ फरमा थे कि हज़रत अली रजि अल्लाहु अन्हु से फरमाया : यह जिब्रीले अमीन अलैहिस्सलाम हैं जो मुझे ख़बर दे रहे हैं कि अल्लाह तआला ने फातिमा से तुम्हारी शादी कर दी है। और तुम्हारे निकाह पर (मलए आला में) चालीस हजार फ़रिश्तों को गवाह के तौर पर मज्लिसे निकाह में शरीक किया, और शजरहाए तूबा से फरमाया : उन पर मोती और याकूत निछावर करो, फिर दिलकश आंखों वाली हूरें उन मोतियों और याकूतों से थाल भरने लगीं। जिन्हें (तकरीबे निकाह में शिर्कत करने वाले) फरिश्ते क्यामत तक एक दूसरे को बतौर तहाइफ देते रहेंगे। इसको मुहिब्बुत्तबरी ने रिवायत किया है।

तरजमा : हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ि अल्लाहु अन्हुमा से मरवी है कि हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हसनैनकरीमैन रज़ि अल्लाहु अन्हुमा की तरफ अकीके में दो-दो दुबे ज़बह किए। इस हदीस को इमाम निसई ने रिवायत किया है।

तरजमा : हज़रत इकरमा रज़ि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि जब 1. सैय्यदा फातिमा रज़ि अल्लाहु अन्हा के हां हसन बिन अली रजि अल्लाहु अन्हु की विलादत हुई तो वह उन्हें हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की खिदमत में लायीं, लिहाजा आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनका नाम हसन रखा और जब हुसैन रज़ि अल्लाहु अन्हु की विलादत हुई तो उन्हें हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की बारगाह में ला कर अर्ज़ किया : या रसूलुल्लाह यह (हुसैन) इस (हसन) से, ज़्यादा खूबसूरत है लिहाज़ा आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसके नाम से अख़ज़ करके उसका नाम हुसैन रखा। इस

हदीस को इमाम अब्दुर्रज़्ज़ाक ने रिवायत किया है।

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