हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का लोगों को अहले बैत की मुहब्बत पर उभारने का बयान

तरजमा : हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजि अल्लाहु अन्हुमा बयान करते हैं कि हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : अल्लाह तआला से मुहब्बत करो उन नेमतों की वजह से जो उसने तुम्हें अता फरमाई और मुझ से मुहब्बत करो अल्लाह की मुहब्बत के सबब और मेरे अहले बैत से मेरी मुहब्बत की खातिर मुहब्बत करो। इस हदीस को इमाम तिर्मिजी और हाकिम ने रिवायत किया नीज़ इमाम तिर्मिज़ी ने फरमाया कि यह हदीस हसन है।

तरजमा : हज़रत अब्बास रज़ि अल्लाहु अन्हु बयान फरमाते हैं कि हम जब कुरैश की जमाअत से मिलते और वह बाहम गुफ्तगू कर रहे होते तो गुफ़्तगू रोक देते हमने हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की बारगाह में इस अम्र की शिकायत की तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : लोगों को क्या हो गया है जब मेरे अहले बैत से किसी को देखते हैं तो गुफ्तगू रोक देते हैं? अल्लाह रब्बुल-इज्जत की कसम! किसी शख़्स के दिल में उस वक़्त तक ईमान दाखिल नहीं होगा जब तक उन से अल्लाह तआला के लिए और मेरे कराबत की वजह से मुहब्बत न करे। उसे इमाम इने माजा और हाकिम ने रिवायत किया है।

तरजमा : हज़रत अब्बास बिन अब्दुल-मुत्तलिब रज़ि अल्लाहु अन्हुमा से मरवी है कि मैंने बारगाहे रिसालत सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम में अर्ज़ किया : या रसूलुल्लाह! कुरैश जब आपस में मिलते हैं तो हसीन मुस्कुराते चेहरों से मिलते हैं और जब हम से मिलते हैं तो ऐसे चेहरों से मिलते हैं जिन्हें हम नहीं जानते (यानी जज़्बात से आरी चेहरों के साथ) हज़रत अब्बास फरमाते हैं : हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व

सल्लम यह सुन कर शदीद जलाल में आ गये और फरमाया : उस जात की कसम! जिसके कब्ज़-ए-कुदरत में मेरी जान है किसी भी शख्स के दिल में उस वक़्त तक ईमान दाखिल नहीं हो सकता जब तक अल्लाह तआला और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और मेरी क़राबत की खातिर तुम से मुहब्बत न करे। इसे इमाम अहमद, निसई, हाकिम और बज़्ज़ार ने रिवायत किया है।

एक रिवायत में है कि फरमाया : खुदा की कसम किसी शख्स के दिल में उस वक्त तक ईमान दाखिल न होगा जब तक कि वह अल्लाह तआला और मेरी कराबत की वजह से तुम से मुहब्बत न करे।

तरजमा : हज़रत अबू सईद खुद्री रज़ि’ अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि मैंने हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को मिंबर पर फरमाते हुए सुना उन लोगों का क्या होगा जो यह कहते हैं कि हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से नसबी तअल्लुक क़यामत के रोज़ उनकी कौम को कोई फाइदा नहीं देगा। क्यों नहीं! अल्लाह की कसम बेशक मेरा नसबी तअल्लुक दुनिया व आख़िरत में आपस में बाहम मिला हुआ है और ऐ लोगो! बेशक (क्यामत के रोज़) मैं तुम से पहले हौज़ पर मौजूद हूंगा पस जब तुम आ गये तो एक आदमी कहेगा या रसूलुल्लाह! मैं फुलां बिन फुलां हूं पस हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : उसका फुलां बिन फुलां कहना पाय-ए-सुबूत को पहुंचेगा और रहा सब तो तहकीक उसकी पहचान मने तुम्हें करा दी है लेकिन मेरे बाद तुम अहदास करोगे और उलटे पांव फिर जाओगे। इस हदीस को इमाम अहमद बिन हंबल और इमाम हाकिम ने रिवायत किया है।

तरजमा : हज़रत अबू हुरैरह रज़ि अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाह अलैहि व सल्लम ने फरमाया : तुम में से

बेहतरीन वह है जो मेरे बाद मेरी अहल के लिए बेहतरीन है। इस हदीस को इमाम हाकिम और इमाम अबू यअला ने बयान किया है।

तरजमा : हज़रत अब्दुर्रहमान बिन औफ रजि अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मक्का फतह किया फिर तायफ का रुख किया और उसका आठ या सात दिन मुहासरा किए रखा फिर सुबह व शाम के वक़्त उसमें दाखिल हो गये फिर पड़ाव किया फिर हिजरत फरमाई : ऐ लोगो! बेशक मैं तुम्हारे लिए तुम से पहले हौज़ पर मौजूद हूंगा और बेशक मैं तुम्हें अपनी इतरत के साथ नेकी की वसीयत करता हूं और बेशक तुम्हारा ठिकाना हौज़ होगा। सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम। इस हदीस को इमाम हाकिम ने रिवायत किया है और फरमाया कि यह हदीस सही है।

तरजमा : हज़रत ज़ैद बिन अरकम रज़ि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : ऐ लोगो! मैं तुम में दो चीजें छोड़ कर जाने वाला हूं और अगर तुम उनकी इत्तिबा करोगे तो कभी गुमराह नहीं होगे और वह दो चीजें किताबुल्लाह और मेरे अहले बैत हैं। फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : क्या तुम जानते हो मैं मुमिनीन की जानों से बढ़ कर उनको अज़ीज़ हूं। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने ऐसा तीन मरतबा फरमाया। सहाब-ए-किराम ने अर्ज़ किया : हां या रसूलुल्लाह! तो हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : जिसका मैं मौला हूं अली भी उसका मौला है। इस हदीस को इमाम हाकिम ने रिवायत किया है और कहा कि यह हदीस सही है।

तरजमा : हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ि अल्लाहु अन्हुमा से मरवी है कि जब यह आयत कुल ला अस्अलुकुम अलैहि अजरन इल्लल-मवद्दतु फिल-कुरबा। नाजिल हुई तो सहाबा किराम ने अर्ज किया या रसूलुल्लाह! आपकी कराबत कौन हैं जिनकी मुहब्बत हम पर

वाजिब है? तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : अली, फातिमा और उनके दो बेटे (हसन व हुसैन)। इस हदीस को इमाम तबरानी ने रिवायत किया है।

तरजमा : हज़रत जैद बिन अरकम रज़ि अल्लाहु अन्हु एक तवील रिवायत में बयान करते हैं कि हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : पस यह देखो कि तुम दो भारी चीज़ों में मुझे कैसे बाकी रखते हो। पस एक निदा देने वाले ने निदा दी या रसूलुल्लाह! वह दो भारी चीजें क्या हैं? आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : अल्लाह तआला की किताब जिसका एक किनारा अल्लाह के हाथ में और दूसरा किनारा तुम्हारे हाथों में है पस अगर तुम उसे मज़बूती से थामे रहो तो कभी भी गुमराह नहीं होगे और दूसरी चीज़ मेरी इतरत है और बेशक इस लतीफे ख़बीर रब ने मुझे खबर दी है कि यह दोनों चीजें कभी भी जुदा नहीं होंगी यहां तक कि यह मेरे पास हौज़ पर हाज़िर होंगी और ऐसा उनके लिए मैंने अपने रब से मांगा है। पस लोगो तुम उन पर पेश क़दमी न करो कि हलाक हो जाओ और न ही उन से पीछे रहो कि हलाक हो जाओ और न उनको सिखाओ क्योंकि यह तुम से ज़्यादा जानते हैं फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हज़रत अली रजि अल्लाहु अन्हु का हाथ पकड़ लिया और फरमाया : पस में जिसकी जान से बढ़ कर उसे अज़ीज़ हूं तो यह अली उसका मौला है ऐ अल्लाह! जो अली को अपना दोस्त रखता है तू उसे अपना दोस्त रख और अली से अदावत रखता है तू उस से अदावत रख। इस हदीस को इमाम तबरानी ने रिवायत किया है।

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