बरीर हमदानी और इब्ने सअद


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!!बरीर हमदानी और इब्ने सअद!!
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♥️मुहर्रम की 9वीं तारीख, लश्कर मे से हजरत इमाम हुसैन (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) ने एक रफीक हजरत बरीर हमदानी, हजरत इमाम से इजाजत लेकर इब्ने सअद के पास गये और उसके पास जाकर बैठ गये, इब्ने सअद ने कहा : की हमदानी क्या तुम मुझे मुस्लमान नही समझते जो मुझे सलाम नही किये,
हमदानी बोले : की लानत है तेरे ऐसे मुस्लमान होने की दावा तो इस्लाम का करता है और अहले बैते रसुल को दरिया से पानी नही लेने देता, नहरे फुरात से जानवर भी पानी पी रहे है मगर साकि-ए-कौसर के लख्ते जिगर प्यास से टड़प रहे है,
इस पर सअद ने कहा : की सच है लेकीन मै क्या करूं मुझसे मुल्क रय की हुकुमत नही छुटती..!!

(तनकीहुश शहादतैन, सफा-58, )

♥️सबक : दुनियां परस्त अपनी आकीबत से अंधा होता है..!!

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