आर्ज़क पहलवान लान्नती


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♥️मैदाने करबला मे सब हजरत इमाम हुसैन (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) के अहबाब शहीद हो चुकु थे और आपके भतीजे और भांजे भी जामे शहादत नोश फरमा चुके थे तो फिर हजरत इमाम हसन (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) के साहबजादे हजरत कासीम (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) मैदान मे तशरिफ लाये, आपको देखकर यजीदी लश्कर मे खलबली मच गयी,
यजीदी लशकर मे एक शख्स अजरक पहलवान भी था उसे मिस्र व शाम वाले एक हजार जवानों की ताकत का मालीक समझते थे, यह शख्स यजीद से दो हजार दीनार सालाना पाता था करबला मे अपने चार ताकतवर बेटों के साथ मौजुद था, जब हजरत इमाम कासीम (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) मैदान मे आये तो मुकाबले मे आने के लिये कोई तैयार न हुआ, इब्ने सअद ने अजकर से कहा की कासीम के मुकाबले मे तुम जाओ, अजकर ने इसमे तौहीन समझी और मजबुरन अपने बड़े बेटे को यह कहकर भेज दिया की मेरे जाने की जरूरत क्या है मेरा बेटा अभी कासीम का सर लेकर आता है।,
*चुनांचे : उसका बेटा हजरत कासीम के मुकाबले मे आया, हजरत कासीम के हाथों बड़ी जिल्लत के साथ मारा गया, उसकी तलवार हजरत कासीम ने कब्जा कर लिया, और फिर ललकारे की कोई दुसरा है तो मेरे सामने आये, अजरक ने अपने बेटे को युं मरते देखा तो बड़ा रोया और गुस्से मे आकर अपना दुसरा लड़का मुकाबले मे भेज दिया, हजरत कासीम (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) ने दुसरो को भी मार डाला, अजरक ने बौखला कर तीसरा लड़का भी भेजा तो कासीम (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) के हाथो वह भी मारा गया, अब तो अजरक की आंखो मे अंधेरा छा गया, और गुस्से मे दिवाने होकर खुद मैदान मे आ गया, हजरत कासीम के मुकाबले मे अजरक को देखकर हजरत इमाम हुसैन (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) ने हाथ उठाए और दुआ की, ऐ मेरे मौला! मेरे कासीम की लाज तेरे हाथ मे है, लोग दोनो की लड़ाई देखने लगे अजकर ने पै दर पै बारह नेजे मारे हजरत कासीम ने सब रद्द कर दिये फिर उसने झल्लाकर हजरत कासीम के घोड़े की पुश्त पर नेजा मारा, घोड़ा मारा गया, हजरत कासीम पैदाल रह गये, हजरत इमाम हुसैन (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) ने फौरन दुसरा घोड़ा भेज दिया, हजरत कासीम ने उसपर सवार होकर मुतवतीर नेजे मारे, अजरक ने रोक लिया और तलवार निकाल ली, हजरत कासीम ने भी तलवार निकाल ली, अजरक ने तलवार को देखकर कह की यह तलवार मैनें तो हजार दिनार मे खरीदी थी, और हजार दिनार मे चमकवाई थी, तुम्हारे पास कहां से आ गयी,
*हजरत कासीम (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) ने फरमाया : तुम्हरे बड़े बेटे की निशानी है यह तुम्हे इसका मजा चखाने के लिये मुझे दे गया है, साथ ही यह फरमाया की तुम एक मशहुर सिपाही होकर इस कद्र बे-एहतियाती से काम लेते हो की मैदान मे लड़ने के लिये आ गये और घोड़े का तंग ढ़िला रखते सो इसे कसा भी नही वह देखो जीन घोड़े की पिठ से फिसला हुआ है,
अजरक यह देखने को झुका ही था की हजरत कासीम (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) ने खुदा का नाम लेकर तलवार मारी की अजकर के वही दो टुकड़े हो गये..!!

(तजकीरा, सफा-80,)

♥️सबक : अहले बैत इजाम के मुकद्दस अफराद तलवार के फन से खुब वाकीफ थे, हमे भी ऐसे फन से वाकीफ होना चाहिये ताकी अगर कोई ऐसा वक्त आ जाये तो हजरत कासीम (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) के सदके मे हम भी बातील के दांत खट्टे कर सके…!!

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