फ़ज़ाइले अहले बैत

बिस्मिल्लाहिर-रहमानिर-रहीम

तरजमा : ऐ महबूब तुम फरमाओ मैं उस पर तुमसे कुछ उजरत नहीं मांगता मगर कराबत की मुहब्बत।

तमाम तारीफ उस खालिक की है कि जिसने हमें अशरफ बना कर हमारे सर पर अशरफीयत का ताज रखा और बेशुमार दुरूद नाज़िल हो प्यारे महबूब हुजूर पुर नूर जनाब मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर और उनकी आल पर जिनकी मुहब्बत को तमाम उम्मत पर वाजिब किया गया।

इस दर की गुलामी है ऐने इबादत

जो आले मुहम्मद हैं वह तौकीरे बशर हैं अल्लाह के नज़दीक आले रसूल का मकाम, उनकी इंफिरादियत और फजीलत समझे बेगैर ईमान की समझ पैदा हो यह मुम्किन नहीं, इसलिए चन्द आयात और अहादीसे रसूल पेशे नज़र हैं : हज़रत इमाम राज़ी रहमतुल्लाह अलैह लिखते हैं कि जब यह आयते करीमा नाज़िल हुई जो ऊपर दी हुई है तो सहाब-ए-किराम ने अर्ज किया या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आपके वह कौन रिश्तेदार हैं जिनकी मुहब्बत हम पर वाजिब कर दी गई। तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया वह अली और फातिमा और उनके दोनों फरज़न्द यानी हसन व हुसैन हैं।

हजरत अब्दुल्लाह इने मस्ऊद रज़ि अल्लाहु अन्हु फरमाते हैं। यानी आले रसूल की एक दिन की मुहब्बत एक साल की इबादत से बेहतर है। (अश्शरफुल-मुअय्यिद, स. 87)

हजरत सलमान फार्सी रजि अल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सुना है आप फरमाते थे कि हसन व हुसैन दोनों मेरे बेटे हैं।

मुझ जिसने उन दोनों को महबूब रखा उसने मुझको महबूब रखा और जिसने मुझ को महबूब रखा उसने अल्लाह को महबूब रखा और जिसने अल्लाह को महबूब रखा अल्लाह ने उसको जन्नत में दाखिल किया और जिसने उन दोनों से बुग्ज़ रखा उसने मुझ से बुग्ज़ रखा और जिसने से बुग्ज रखा उसने अल्लाह से बुग्ज रखा और जिसने अल्लाह से रखा अल्लाह ने उसको दोज़ख में दाखिल किया।

जो अहले बैत की मुहब्बत में मरा उसने शहादत की मौत पाई। आगाह हो जाओ जो आले मुहम्मद की मुहब्बत में मरा उसके गुनाह बख़्श दिए गये।

खबरदार हो जाओ जो अहले बैत की मुहब्बत में मरा वह मुकम्मल ईमान के साथ इंतिकाल किया।

आगाह हो जाओ जो अहले बैत की मुहब्बत में मरा उसको ऐसी इज़्ज़त के साथ जन्नत में ले जाया जाएगा जैसे दुल्हन को उसके घर से ले जाया जाता है।

ख़बरदार हो जाओ जो अहले बैत की बुग्ज़ में मरा वह काफिर हो कर मरा। (तफ्सीरे कबीर, स. 166)

हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया जिसने मेरे अहले बैत

के किसी आदमी से बुग्ज रखा वह मेरी शफाअत से महरूम रहेगा। (सवाइके मुहरिका, स. 794) हज़रत मौला अली शेरे खुदा रज़ि अल्लाहु अन्हु से मरवी है हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया कि अल्लाह तआला ने उसके लिए जन्नत हराम कर दी है जो मेरे अहले बैत पर जुल्म करे या उन से लड़े या उनको लूटे या उनको बुरा कहे। (मुसनद इमाम रज़ा) तबरी ने एक रिवायत नक्ल फरमाई है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया है कि अल्लाह तआला ने तुम पर जो मेरा अज मुकर्रर किया है वह मेरे अहले बैत से मुहब्बत करता है। और कल मैं तुमसे उसके बारे में दरयाफ्त करूंगा मैदाने महशर में।

(सवाइके मुहरिका, स. 53)

हज़रत सैय्यदना उस्मान गनी रज़ि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया जिस शख्स ने दुनिया में औलादे अब्दुल-मुत्तलिब या औलादे बनी हाशिम यानी अहले बैत से कुछ नेकी या अच्छा सुलूक या एहसान किया फिर वह अहले बैत उसका बदला न दे सके तो क्यामत के दिन उस सैय्यद की तरफ से मैं पूरा-पूरा बदला अदा करूंगा।

(सवाइके मुहरिका, स. 792) हज़रत मौला अली रज़ि अल्लाहु अन्हु इरशाद फरमाते हैं कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हसनैन करीमैन के हाथ को अपने दस्ते अक्दस में लेकर फरमाया जो मेरे दोनों फरजन्दों और उनके वालिदैन से मुहब्बत करेगा वह क्यामत के दिन मेरे साथ होगा। और जत्रत में उस दरजा में रखा जाएगा जहां मैं रहूंगा।

(शिफ़ा शरीफ़, जिल्द दोम, स. 59) हज़रत अल्लामा निबहानी रहमतुल्लाह अलैह तहरीर फरमाते हैं कि हज़रत इमाम शाफई रहमतुल्लाह अलैह सरकार सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से बहुत मुहब्बत करने के सबब इस हाल में बगदाद से ले जा गये कि उनके पैरों में बेड़ियां पड़ी थीं।

बल्कि अहले बैत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से उनकी मुहब्बत यहां तक पहुंची कि कुछ लोगों ने उन्हें राफ़ज़ी कह दिया तो आपने उनको जवाब देते हुए फरमाया।

यानी अगर आले रसूल ही की मुहब्बत का नाम राफ़ज़ी होना है तो तमाम जिन्न व इन्स गवाह हो जाएं कि मैं राफ़ज़ी हूं।

क़सम है उस ज़ात की जिसके कब्ज-ए-कुदरत में मेरी जान है जिस किसी ने भी हमारे अहले बैत से बुग्ज़ रखा अल्लाह ने उसको जहन्नम में दाखिल किया।

अली इने अबी तालिब की मुहब्बत गुनाहों को इस तरह ख़त्म कर देती है जिस तरह आग लकड़ी को।

मेरे अहले बैत की मिसाल कश्ती-ए-नूह की तरह है जो उसमें सवार हो उसने नजात पाई और जो बाहर हुआ गर्क हुआ।

और मुझे महबूब रखो अल्लाह की मुहब्बत की वजह से और मेरे

अहले बैत को महबूब रखो मेरी मुहब्बत की वजह से। हज़रत अबू हुरैरह रज़ि अल्लाहु अन्हु से मरवी है कि हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हज़रत अली हज़रत फातिमा हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रज़ि अल्लाहु अन्हुम की तरफ देखा और फरमाया जो तुमसे लड़ेगा मैं उससे लडूंगा और जो तुम से सुलह करेगा मैं उस से सुलह करूंगा तो जो तुम्हारा दुश्मन है वह मेरा दुश्मन है। जो तुम्हारा दोस्त है वह मेरा दोस्त है।

हज़रत अब्दुल्लाह इने अब्बास से मरवी है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया मैं दरख्त हूं फातिमा उसकी टहनी है अली उसका शगूफा और हसन व हुसैन उसका फल हैं। और अहले बैत से मुहब्बत करने वाले उसके पत्ते हैं। यह सब जन्नत में होंगे, यह हक है यह हक है।

हज़रत जाबिर इने अब्दुल्लाह रज़ि अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि एक दफ़ा हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हम से मुखातब हुए पस मैंने आपको फरमाते हुए सुना ऐ लोगो! जो हमारे अहले बैत से बुग्ज़ रखता है अल्लाह तआला उसे रोजे क्यामत यहूदियों के साथ जमा करेगा। तो मैंने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अगरचे वह नमाज़ रोज़ा का पाबन्द ही क्यों न हो और अपने आपको मुसलमान गुमान ही क्यों न करता हो तो आपने फरमाया हां अगरचे वह रोज़ा और नमाज़ का पाबन्द ही क्यों न हो। और खुद को मुसलमान तसव्वुर करता हो। ऐ लोगो! यह लबादा ओढ़ कर उसने अपने खून को मुबाह होने से बचाया और यह कि वह अपने हाथ से जिज़या दें दर आंहालेकि वह घटिया और कमीने हों। पस मेरी उम्मत मुझे मेरी मां के पेट में दिखाई गई पस मेरे पास से झुण्डों वाले गुज़रे तो मैंने हज़रत अली और शीआने अली के लिए मरिफरत तलब की। इस हदीस को इमाम तबरानी ने रिवायत किया है। (तबरानी स. 212) हजरत जाबिर बिन अब्दुल्लाह बयान करते हैं कि हुजूर नबी .

सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया तीन चीजें ऐसी हैं वह जिस

में पाई जाएंगी न वह मुझ से है और न मैं उस से हूं वह यह हैं अली से बुग्ज रखना मेरे अहले बैत से दुश्मनी रखना और यह कहना कि ईमान फकत कलाम का नाम है।

हज़रत अबू हुरैरह रज़ि अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया तुम में बेहतरीन वह है जो मेरे बाद मेरी अल के लिए बेहतरीन है इस हदीस को इमाम हाकिम और इमाम अबू यअला ने बयान किया।

तरजमा : हज़रत अब्दुल्लाह इने मस्ऊद रज़ि अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया बेशक फातिमा ने अपनी इस्मत की हिफाज़त की तो अल्लाह तआला ने उसकी औलाद को आग पर हराम कर दिया। इस हदीस को इमाम हाकिम ने

रिवायत किया और कहा कि यह हदीस सहीहुल-अस्नाद है। तरजमा : हज़रत अब्दुर्रहमान इब्ने अबी लैला रज़ि अल्लाहु अन्हु अपने वालिद से रिवायत करते हैं कि हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया कोई बन्दा उस वक्त तक मोमिन नहीं हो सकता जब तक कि मैं उसके नज़दीक उसकी जान से महबूब तर न हो जाऊं और मेरे अहले बैत उसे उसके अहले ख़ाना से महबूब तर न हो जाएं और मेरी औलाद उसे अपनी औलाद से बढ़ कर महबूब न हो जाए और मेरी ज़ात उसे अपनी ज़ात से महबूब तर न हो जाए। उसे इमाम तबरानी और इमाम बैहकी ने रिवायत किया।

तरजमा : हज़रत अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद रज़ि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि आपने फरमाया अहले बैते मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की एक दिन की मुहब्बत पूरे साल की इबादत से बेहतर है और जो उसी पर फौत हुआ तो वह जन्नत में दाखिल हो गया। उसको इमाम दैलमी ने रिवायत किया।

तरजमा : हजरत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रज़ि अल्लाहु अन्हा मरफूअन रिवायत करते हैं कि हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया मैं दरख्त हूं और फातिमा उसके फल की इब्तिदाई

मा बर्वे करपला हालत है और अली उसके फूल को मुन्तकिल करने वाला है और हसन व हुसैन इस दरखा का फल है और अहले बैत से मुहब्बत करने वाले उस

दरख्त के औराक है वह यकीनन यकीनन जन्नत में दाखिल होने वाले हैं इस हदीस को इमाम दैलमी ने रिवायत किया है। तरजमा : हजरत अबू मरऊद अन्सारी रजि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया जिसने नमाज पढ़ी और मुझ पर और मेरे अहले बैत पर दुरूद न पढ़ा उसकी नमाज कबूल न होगी। हज़रत अबू मस्ऊद अन्सारी रजि अल्लाहु अन्हु फरमाते हैं अगर मैं नमाज़ पर्दू और उसमें हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर दुरूद पाक न पढूं तो मैं नहीं समझता कि मेरी नमाज कामिल होगी। उसे इमाम दारे कुतनी और बैहकी ने रिवायत की।

तरजमा : हज़रत अली रज़ि अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया. सितारे अहले आसमान के लिए अमान हैं पस जब सितारे चले गये तो अहले आसमान भी चले गये और मेरे अहले बैत ज़मीन वालों के लिए अमान हैं। पस जब मेरे अहले बैत चले गये तो अहले जमीन भी चले गये। इस हदीस को

इमाम दैलमी ने रिवायत किया है। (8) तरजमा : हज़रत सअद बिन अबी वकास रज़ि अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि जब आयते मुबाहिला नाज़िल हुई : “आप फरमा दें आओ हम बुलाएं अपने बेटे और तुम्हारे बेटे’ तो हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हज़रत अली, हज़रत फातिमा, हज़रत हसन और हुसैन रज़ि अल्लाहु अन्हुम को बुलाया, फिर फरमाया : या अल्लाह! यह मेरे अहले (बैत) हैं। इसे इमाम मुस्लिम और तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है और इमाम तिर्मिज़ी ने फरमाया कि यह हदीस हसन सही है।

  • (७) तरजमा : हज़रत जैद बिन अरकम रज़ि अल्लाहु अन्हु से मरवी है कि हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हज़रत अली, हज़रत फातिमा, हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रज़ि अल्लाहु अन्हुम से

। रज़वी किताब घर 33 फरमाया : तुम जिस से लड़ोगे मैं उसके साथ हालते जंग में हूं और जिससे तुम सुलह करने वाले हो मैं भी उस से सुलह करने वाला हूं। इसे इमाम तिर्मिज़ी और इब्ने माजा ने रिवायत किया है।

(10) तरजमा : हज़रत जैद बिन अरकम रज़ि अल्लाहु अन्हु से मरवी है कि हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : मैं

तुम में ऐसी दो चीजें छोड़े जा रहा हूं कि अगर मेरे बाद तुम ने उन्हें मज़बूती से थामे रखा तो हरगिज़ गुमराह न होगे। उनमें से एक दूसरी से बड़ी है। अल्लाह तआला की किताब आसमान से ज़मीन तक लटकी

है हुई रस्सी है और इतरत यानी अहले बैत और यह दोनों हरगिज़ जुदा न होंगे यहां तक कि दोनों मेरे पास हौज़े कौसर पर आएंगे पस देखो कि तुम मेरे बाद उन से क्या सुलूक करते हो? इसे इमाम तिर्मिज़ी, निसई और अहमद ने रिवायत किया और इमाम तिर्मिज़ी ने उसे हसन करार दिया है।

(11) तरजमा : हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के परवरदह हज़रत उमर बिन अबी सलमा रज़ि अल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि जब उम्मुल-मुमिनीन उम्मे सलमा रज़ि अल्लाहु अन्हा के घर हुजूर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर यह आयत “ऐ अहले बैत! अल्लाह तो यही चाहता है कि तुम से (हर तरह) की आलूदगी दूर कर दे और तुम्हें खूब पाक व साफ़ कर दे नाज़िल हुई तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सैय्यदा फ़ातिमा और हसनैन करीमैन रज़ि अल्लाहु अन्हुम और मौला अली को बुलाया और उन्हें अपनी कमली में ढांप लिया, फिर फरमायाः ऐ अल्लाह! यह मेरे अहले बैत हैं, पस इनसे हर किस्म की आलूदगी दूर फरमा और इन्हें खूब पाक व साफ कर दे। सैय्यदा उम्मे सलमा रज़ि अल्लाहु अन्हा ने अर्ज की : ऐ अल्लाह के नबी! मैं (भी) उनके साथ हूं, फरमाया : तुम अपनी जगह रहो और तुम तो बेहतर मुकाम पर फाइज़ हो। इसे इमाम तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है और फरमाया कि यह हदीस हसन सही है।

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