मौला अली के दुश्मन कौन?

मौला अली के दुश्मन कौन?
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हज़रत ज़िर्र बिन हुबैश रिवायत करते है के हज़रत अली करमल्लाहू व्झ्हहुल करीम ने फरमाया
“क़सम है उस ज़ात की जिसने दाना चीरा और जिसने जानदारो को पैदा किया”
“हुजूर नबी करीम अलैहीस्सलाम ने मुझसे अहद फरमाया था के मुझसे (अली से) सिर्फ मोमिन मुहब्बत रखेगा और सिर्फ मुनफिक ही मुझसे बुग्ज़ (दुश्मनी) रखेगा।”

हदीस सही मुस्लिम -1(किताबुल ईमान हदीस न 78)
सुनन निसाई
जामे तिर्मिज़ी
सुनन इब्न माजा

क्या इस क़ौले रसुलल्लाह अलैहीस्सलाम से सहाबा ए किराम की जमाअत जुदा है?

क्या ये हुक्म तमाम उम्मते मुहम्मदिया पर लागू नही है?

अगर कोई इस अहद की खिलाफवर्जी करे तो वो कौन है?

अगर किसी सहाबी ने ऐसा किया तो उन पर क्या हुक्म लगेगा?

हज़रत अली अलैहीस्सलाम की खिलाफत को ना मानकर अमीर मुअविया (यज़िद के बाप) ने अपने आपको अमिरुल मोमिनीन का खिताब देकर अपनी अलग बादशाहत क़ायम का ली थी। (इससे पहले कभी किसी सहाबी ने ऐसा काम किसी खलीफा हज़रत अबू बकर, हज़रत उमर व हज़रत उस्मान रदिअल्लाहु अन्हुम के वक़्त मे नही किया)

क्या ये बुग्ज़े अली नही?

लगातार 5 साल तक मौला अली से जंग की जिसकी वजह से हज़ारो मुसलमान मारे गये।

क्या ये बुग्ज़े अली नही?

जंगे सिफ्फेन इसकी मशहुर मिसाल है जिसमे मौला अली अलैहीस्सलाम की फौज पर पानी बन्द कर दिया गया था।

क्या ये बुग्ज़े अली नही?

मस्जिद के मिम्बर से मौला अली पर सब्बो-शितम किया (यानी गलियाँ दी)

क्या ये बुग्ज़े अली नही?

यहाँ तक की मौला अली अलैहीस्सलाम के फर्ज़न्द मौला हसन अलैहीस्सलाम जो नवासा ए रसूल और उनके बेटे कहलाये जाते है उनसे भी जंगे की और कई रिवायत से साबित है के उन्हे ज़हर भी मुअविया ने ही पिलाया था।

मौला अली अलैहीस्सलाम को धोके से शहीद करने के पीछे भी मुअविया का ही हाथ था।

जैसा बाप वैसा बेटा

मुअविया ने यज़ीद जैसे बेटे को खलीफा बना कर उम्मते मुस्लिमा से खिलवाड़ किया जिसने अह्लेबैते नबी व सहाबा ए किराम और हुसैने पाक अलैहीमुस्सलाम के खानदान को क़त्लेआम करवाया।

मुअविया के इस खबिस बेटे ने मदीने शरीफ पर और क़ाबा मुकद्दस पर लश्कर कशी की और मदीने के लोगों को क़त्ल किया मस्जिदे नब्वी मे घोड़े बांधे और काबे के गिलाफ को आग लगाई।

ए मुसलमानो!
बिकाऊ मुल्ला की बातों मे आकर अपना दीन व ईमान बर्बाद मत करो! हज़रत अली के मुकाबले पर खड़े होने वाला हर शख्स बातिल है। चाहे वो नाम का सहाबी ही क्यू न हो मगर जिसने रुजु कर लिया। और मुअविया ने दमे आखिर तक मौला अली अलैहीस्सलाम से बुग्ज़ रखा और दुश्मनी निभाई।

मुसलमानो !!
नमाज मे नबी और आले नबी पर जो तुम दुरूद भेजते हो उनमे मौला अली का भी शुमार है।

मौला अली अलैहीस्सलाम के फज़ाईल बयान करने की ज़रूरत ही नही है। फैसला आपको करना है के दुनिया व आखिरत मे मौला अली की आपको ज़रूरत है या दुश्मने अली की।

तमाम औलिया की जबान पर अली अली की सदा रही, क्यू?
क्युंकि अली हक़ है, अली सच है, अली बाईस ए नजात है, मुश्किल कुशा है, जरिया ए विलायत है, वलियों के बाप है। मौला अली की खिदमात ए रसूल व खिदमात ए दीन को छोड़ कर इस्लाम का तसव्वुर मुमकिन नही है

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