विलायते अमीरुल मोमिनीन

विलायते अमीरुल मोमिनीन के मुताल्लिक क़ुरानी आयात और अहले सुन्नत कुतुब की चंद अहादीस और मुहद्दिसीन के अक़वाल

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( मैं जिस जिस का मौला अली भी उसका मौला)

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हज़रत अम्मार इब्ने यासिर रदिअल्लाहु अन्ह अरजा से रिवायत है आं हज़रत सल्ल0 ने फरमाया
जहां तौहीद ओ रिसालात की तस्दीक करो वहां वहां मेरे भाई अली की विलायत तस्दीक करो (सही मुस्लिम जिल्द 3 सफा 96….108

हजरत ए अबु दरदा रदिअल्लाहु अन्ह अरजा से रिवायत है रसूलल्लाह सल्ल0 ने फरमाया
ए लोगो अली की विलायत सफीना ए नजात है
कहीं तुम भी मुकर ना जाना जैसे मूसा के बाद हारून का इन्कार किया था कौम ने और बो हमेशा बर्बाद रहें
(खसाएसे अली जिल्द 2 सफा 156
इमाम नसाई

साबित बिन क़ैस रदिअल्लाहु अन्ह अरजा से रिवायत है रसूलल्लाह सल्ल0 ने फरमाया
मैं इस फानी दुनिया को अनक़रीब अलविदा कहूंगा साबित बिन क़ैस ने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह सल्ल0 हम आपके बाद किसके सहारे रहेंगे तब आप सल्ल0 ने फरमाया मैं तुम्हारे दरमियान अली को हुज्जत छोड़े जा रहा हूँ
उसकी इत्तेबाअ करना विलायत की पैरवी करना अनक़रीब फिर तुम्हारा विलायते अली इब्ने अबी तालिब पर इम्तेहान होगा
(तारिख ए दमिश्क जिल्द1 सफा 119)

इमाम शमशुद्दीन अज ज़हबी
अपनी तस्नीफ
(अज़ पैग़ाम शरीयत ए मुहम्मदी)
*के जिल्द 2 सफा 266 पर *तहरीर फरमाते है अली अलै0 की विलायत उम्मत ए मुहम्मदिया पर ऐसे ही वाजिब है जैसे तौहीद ओ रिसालात है*

इमाम अलाउद्दीन अली मिश्री अल मुतवफ्फा 850 हिजरी
अपनी तस्नीफ
हयात उल कुलूब में तहरीर फरमाते है इमाम जाद बिन अली से नकल करते है कि अफजल उल ताबेईन हजरत उबैश करनी रदिअल्लाहु अन्ह अरजा कहते है
हम रसूलल्लाह की वसीयत वा मुजीब विलायते अली इब्न अबी तालिब पर कायम ओ दायम रहें हम हक़ सुब्हानहु से इसका अज्र रोज़ ए महशर लेंगे
(हयात उल कुलुब जिल्द 2 सफा 298)

और अल्लाह भी क़ुरान में भी तीन विलायत का जिक्र कर रहा है
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

إِنَّمَا وَلِيُّكُمُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ وَالَّذِينَ آمَنُوا الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُمْ رَاكِعُونَ

ईमान वालों बस तुम्हारा वली अल्लाह है और उसका रसूल (स0) और वह साहेबाने ईमान जो नमाज़ क़ायम करते हैं और हालते रूकुअ में ज़कात देते हैं
(Surah 5 Ayat No 55)

साबित हुआ जहां जहां तौहीद और रिसालात की गवाही दी जाएगी वहां वहां वा हुक्म ए इलाही और अहादीस ए रसूल के तहत अमीरुल मोमिनीन अली इब्न अबी तालिब की गवाही दी जाएगी

वाजेह करता चलू जब हम जहां भी
अशहदु अल ला इलाहा इल्लल्लाहो वहदहु ला शरीक लह वा अशहदो’अन ना मुहम्मदुर्रसुलल्लाह पड़ेंगे वहां वहां हम को अलिय्यूनवलीउल्लाह पड़ना पड़ेगा तब हम वाक़ई दर हकीकत मोमिन बनेगे और सही इस्लाम पर साबित कदम उतरेंगे: वमा अलैना इल्लल बलाग

(आले कुतुब )

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