Ertugrul_gazi कौन???

Ertugrul_gazi कौन???

ये कोई नॉविल, कहानी या ड्रामा नहीं बल्कि इस्लामी तारीख़ पर मुश्तमिल सच्ची दास्तान, ख़िलाफ़त ए उस्मानिया की बुनियाद रखने वाले एक कबाईली तुर्क ग़ाज़ी उस्मान और इनके वालिद, तुर्क औगोज़ के सबसे बहादुर कबीले “काई” के सरदार अरतगल ग़ाज़ी की दास्तान है, इन्हें आमतौर पर ग़ाज़ी के लक़ब से जाना जाता है।
तुर्क बहादुर सरदार सुलेमान शाह के यहाँ 1191 ईस्वी में पैदा होने वाले अरतगल गाज़ी जिसकी ख़िलाफ़त की बुनियाद पर तक़रीबन 600 साल तक तुर्कों की तलवार ने उम्मत-ए-मुस्लिमा का दिफ़ा किया।
अहम और बुनियादी क़िरदार हज़रत इब्नुल अरबी और सफ़ेद दाढ़ी वालों (सल्जोक़ सल्तनत के बुज़ुर्ग आलीम लोग) का था जिनका मक़सद पूरी दुनिया में सिर्फ और सिर्फ ” निज़ामें ईलाही” का क़याम और निफ़ाज़ था।
अद्ल व इन्साफ़ का निज़ाम क़ायम करना था, जिन्होंने ने जद्दोजहद के लिए तुर्क औगोज़ खान के खानदान के 12 क़बीलों से ईमानदार और बहादुर सरदार पर मुश्तमिल एक ग्रुप बना दिया था।

Ertugrul_gazi जो नोजवानी में ही वहशी मंगोलों के खिलाफ़ लड़ रहे थे जबकि अस्ल शुरुआत सलजोक़ी “सुल्तान अलाउद्दीन” की भतीजी “हलीमा सुल्तान” को सलिबियों के चंगुल से आज़ाद कराकर बाक़ायदा मैदान ए जंग में उतर चुका थे

जिसके बाद इनके वालिद “सुलेमान शाह” ने इन्हें हलब के अय्यूबी सुल्तान के अमीर अब्दुल अज़ीज़ के पास एलची बनाकर भेजा जो सलिबियों के हाथों यरगमाल बन चुका था
और इनसे सलिबियों को रोकने के बदले कबीले को आबाद करने के लिए जमीन का मुतालबा किया

Ertugrul_gazi ज़मीन लेने और हलब में सलिबियों की साजिश बिगाडने में कामयाब हो चुके थे इसके बाद सलीबी किला “Amanos” जो की बहुत ज़्यादा अहमियत का हामिल था इनके वालिद सरदार “सुलेमान शाह” की सरबराही में चढ़ाई करके फ़तह किया और शैतान उस्ताद पेत्रोचो को कत्ल किया भागने में कामयाब होने वाले सलीबी कमांडर तितुश भी कत्ल कर दिया गया।

सुल्तान अलाउद्दीन की भतीजी जिसको सलिबियों से आज़ाद कराया था इनसे शादी हो गई।
वालिद “सुलेमान शाह” की वफात के बाद हलब से सफेद दाढ़ी वालों की ख्वाईश के मुताबिक मंगोल की यलगारज़दा इलाके की तरफ हिजरत की और अपने भाइयों के साथ मिलकर सलजोक़ सल्तनत के गद्दार अमीर सादउद्दीन कोपेक की तमाम साजिशों के बावजूद #Ertugrul_ग़ाज़ी ने मंगोल के एक अहम लीडर नोयान को शिकस्त दी..
नोयान मंगोल बादशाह औकताई खान का Right Hand था, औकताई खान चंगेज़ खान का बेटा था और इस औकताई खान का भतीजा हलाकू खान था जिसने बगदाद रौंदा था।

इसके बाद #Ertugrul_ग़ाज़ी ने एक बार फिर सफेद दाढ़ी वालों की रज़ा पर मग़रिबी बाज़नीतिनि सरहद पर हिजरत का इरादा किया मगर इनके भाइयों ने इनका लर दिया इस सूरत में इंतिहाई महदूद वसाईल और बहुत कम मगर भरोसेमंद साथियों और लोगों के साथ हिजरत की जिनमें सबसे अहम इनके तीन जंगजू नुरगुल, बाबर और रोशन शामिल थे। जिन्हें बचपन में जंगल से #Ertugrul_ग़ाज़ी कबीले लेकर आए थे और इनकी परवरिश आपके वालिदैन ने अपने बच्चों के साथ कि थी।

हिजरत करने वालों में वालिदा अम्मा हाईमा, छोटा भाई ज़ुल्जान और इनकी जौज़ा हलीमा सुल्तान, शिरख्वार बेटा गुन्दुज़ और हलीमा सुल्तान का भाई शहीर शामिल था, जबकि रास्ते में शहीर को सलजोक़ सल्तनत के सबसे चालाक गद्दार अमीर सादउद्दीन कोपेक ने शहीद करवा दिया था।

मग़रिबी सरहद पर कई साल ग़ुरबत और तंगदस्ती का सामना किया मगर पहली फ़तह इन्होंने सलीबी कब्ज़े में मौजूद हान्ली बाजार की सूरत में हासिल की वहाँ जबरदस्त इस्लामी और मुसिफ़ाना निज़ाम क़ायम किया जिससे मुसलमान और गैरमुस्लिम दोनों खुश थे।

सुल्तान अलाउद्दीन ने #Ertugrul_Gazi को मग़रिबी सरहद पर अपना सरदार-ए-आला बनाया और वहाँ के रियासती उमूर इनके सुपुर्द किए।

अमीर सादउद्दीन ने इनके खिलाफ़ साज़िश जारी रखी और इनकी फ़ुतूहात को सुस्त ज़रूर किया मगर रोक नही सका।

रोम के शहंशाह और पापा-ए-आज़म की मिल्कियत में मौजूद “कारा-चाइसर” कलीसा के गवर्नर और गद्दार अमीर सादउद्दीन ने #Ertugrul_ग़ाज़ी को शिकस्त देने के लिए आपस में गड़जोड कर था मगर #Ertugrul_Gazi ने गवर्नर को कत्ल किया फिर “कारा-चाइसर” कलीसा को फ़तह किया और कलीसा के दूसरे गर्वनर को पकड़कर अमीर सादउद्दीन की ग़द्दारीयो के खिलाफ़ सुल्तान अलाउद्दीन के सामने पेश किया।
सादउद्दीन सुल्तान की बीवी की मदद से बच गया मगर गवर्नर को वादे के मुताबिक #Ertugrul_Gazi ने रिहा कर दिया।
और गवर्नर की जान बचाई जिससे मुत्तासिर होकर गवर्नर मुसलमान हो गया और #Ertugrul_Gazi के साथ मिलकर काफ़ी अहम कामयाबी हासिल की और शहादत का मर्तबा पाया।
दूसरी तरफ अमीर सादउद्दीन ने सुल्तान अलाउद्दीन को ज़हर देकर कत्ल किया और इनकी वसीयत के खिलाफ इनके छोटे बेटे “कलीज अर्सलान” को सुल्तान की दूसरे बीवी के साथ मिलकर क़त्ल किया और शहजादे “ग्यासुद्दीन” को बराए नाम सुल्तान बनाकर तमाम रियासती उमूर अपने हाथ में ले लिए और #Ertugrul_Gazi पर सुल्तान अलाउद्दीन के क़त्ल का इल्ज़ाम लगाकर इनको क़त्ल करने की साज़िश पर सुल्तान के बेटे को राज़ी कर लिया था।

मगर शेख़ इब्नुल अरबी ने सुल्तान के बेटे के सामने #Ertugrul_Gazi की बेगुनाही की ज़मानत दी और रिहा करवाया।
सुल्तान गयासुद्दीन अपने वालिद मरहूम सुल्तान अलाउद्दीन के क़ातिल अपनी माँ और अमीर सादउद्दीन कोपेक की साजिशों को जान चुका था
और इनको ये भी पता चल चुका था कि अब मुझे कत्ल करके सादउद्दीन खुद सुल्तान बनने जा रहा है इस सूरत में सुल्तान गयासुद्दीन ने अपनी माँ के साथ #Ertugrul_Gazi के क़बीले में पनाह ली और सादउद्दीन के कत्ल का फ़रमान जारी करके ये काम #Ertugrul_Gazi को सौप दिया
जिसको #Ertugrul_Gazi ने नुरगुल और अपने भाई सारिम के साथ इंतिहाई मुश्किल सूरतेहाल के बावजूद मुक़म्मल किया और सादउद्दीन कोपेक को कत्ल कर दिया
ये पहला गद्दार नही था इससे पहले मुख़्तलिफ़ क़बीले के बहुत से गद्दारों को कत्ल कर चुके थे

सरदार-ए-आला का मकाम दोबारा हासिल किया हलीमा सुल्तान से तीन बेटे गुन्दुज़, सावचा और उस्मान पैदा हुए

सलजोक़ सल्तनत और रियासत मंगोलों के नरगे में थी और आखिर साँसे ले रही थी इस सूरत अमन मुआहिदा के लिए सुल्तान ने #Ertugrul_Gazi को एलची बनाकर चंगेज़ खान के बेटे और जानशीन औकताई खान के पास भेजा औकताई खान इनकी बहादुरी से मुत्तासिर होकर इनको पहले अपना कमांडर और बाद में सलजोक़ी सुल्तान बनाने की पेशकश की और दो साला अमन मुआहिदा भी क़ायम किया

इसके बाद मरहूम सुल्तान अलाउद्दीन के फरमान के मुताबिक इन्होंने बाज़नीतिनि सरहद पर मौजूद खूबसूरत इलाके “सोगुत” जाने का इरादा किया जो सुल्तान ने इनकी बहादुरी के एतराफ़ में बतौर हदिया इनको दिया था

वहाँ पर बावजूद मुआहिदे के इनको बदस्तूर सलीबी शहंशाह की साजिशों का सामना था और दूसरी तरफ वहशी मंगोलों ने एक बार भी “सोगुत” का रुख कर लिया था
सोगुत में #Ertugrul_Gazi ने सलीबी और मंगोलों दोनो को शिकस्त दी और इस्लामी,अद्ल व इन्साफ़ वाला निज़ाम क़ायम किया और सलजोकी सल्तनत के ख़ात्मे पर अपनी सल्तनत के क़याम का ऐलान किया और इसके लिए जद्दोजहद शुरू की जो इनकी वफ़ात के बाद इनके बेटे उस्मान की लीडरशिप में ख़िलाफ़त उस्मानिया की सूरत में कायम की गई जो तकरीबन 600 साल तक मुसलमानो की ख़िलाफ़त करके रहती दुनिया तक मिसाल बन गए।

Ertugrul_Gazi

खत्म…..

अल्लाह उनकी कब्र को मुन्नवर फ़रमाए और उम्मत ए मुस्लिमा को एक बार भी अज़ीम, बहादुर, और निज़ाम ए ईलाही का फरमाबरदार कोई लीडर अता फ़रमा जो उम्मत को ख़िलाफ़त के झंडे के नीचे एक साथ जमा करें।

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