मुहब्बत ए रसूल ﷺ

✪ हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ﷺ की मुहब्बत.. इमान का जुज़्व लाजिम है। कुरआन व सुन्नत की रू से जरूरी है की, हर मुसलमान के दिल में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ﷺ की मुहब्बत.. अपनी जान, वालिदैन, अहलो अयाल, माल व दौलत और दुनिया की सब चीजों से ज्यादा महबूब हो?क्यूँकि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ﷺ की मुहब्बत तक्मील ए इमान के लिए शर्त है।

✪ जब इंसान के दिल में किसी की मुहब्बत बस जाती है तो उसके लिए उसकी इताअत व फर्माबरदारी करना आसान हो जाता है।इसी फितरत ए इंसानी कोशिश पेशे नज़र रखते हुए अल्लाह तआला ने हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ﷺ की शख्सियत का तआरुफ, आपकी अज़्मत, शान ए बुलंदी दर्जात ऐर ओसाफ ए हमीदा का तज़्किरा फरमाया। इस मकाम पर पहुंच कर एक मुसलमान के लिए आपकी इत्तेबा.. निहायत सहल हो जाती है।

✪ इसलिए खुद नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ﷺ ने अपने मुबारक इर्शादात में अल्लाह तआला और रसूलअल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ﷺ से मुहब्बत पैदा करने के तर्क बड़े अहसन अंदाज में फरमाएं है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s