शैख़ जुनैद बगदादी (र.अ) aur बहलोल (र.अ)

🍁शैख़ जुनैद बगदादी (र.अ) एक दफा अपने मुरीदों ओर शागिर्दों के साथ बगदाद की सैर पर निकले उन्होंने बहलोल (र.अ) के बारे में पूछा,

तो किसी ने कहा सरकार वह तो दीवाना शख्स है ,

तो जुनैद बगदादी र.अ ने जवाब दिया मुझे उस दीवाने से काम है,
क्या उस दीवाने को किसी ने देखा है?

🥀एक ने कहा मेने फ़लाह मक़ाम पर उन्हें देखा है….सब उस मक़ाम की तरफ चल दिए…..हज़रत बहलोल (र.अ) वहां रेत पर बैठे हुए थे,

🥀शैख़ साहब ने बहलोल (र.अ) को सलाम किया,

बहलोल (र.अ) ने जवाब दिया और पूछा कौन हो ?

🥀शैख़ साहब ने जवाब दिया , बन्दे को जुनैद बगदादी कहते हैं,
बहलोल (र.अ) ने कहा वही जुनैद जो लोगों को दर्स देतें हैं ? कहा जी हां..अल्हम्दुलिल्लाह-

🥀बहलोल (र.अ) ने पूछा….
शैख़ साहब खाने के आदाब जानते हैं?

जुनैद बगदादी (र.अ) ने जवाब दिया…बिस्मिल्लाह कहना…अपने सामने से खाना…खूब चबा कर खाना….लुकमा छोटा लेकर खाना…सीधे हाथ से खाना…दूसरे के लुकमे पर नज़र न रखना… अल्लाह का ज़िक़्र करना…अल्हम्दुलिल्लाह कहना. ..अव्वल व आखिर हाथ धोना-

🥀बहलोल (र.अ) ने कहा, लोगों के मुर्शिद हो और खाने के आदाब नहीं जानते…..ओर वहां से उठ कर आगे चल दिए-

🥀जुनैद बगदादी (र.अ) उनके पीछे पीछे चल दिए
मुरीदों ने कहा सरकार यह तो दीवाना है,लेकिन शैख़ फिर वहां पहुंचे ,फिर सलाम किया-
बहलोल(र.अ) ने सलाम का जवाब दिया …ओर फिर पुछा कौन हो ?

जवाब दिया जुनैद बगदादी …. .जो खाने के आदाब नहीं जानता-

अच्छा बोलने के आदाब तो जानते होंगे-
जवाब दिया ….जी अल्हम्दुलिल्लाह,
मुतकल्लिम मुखातिब के मुताबिक बोले, बे मौका , बे महल,बे हिसाब न बोले,ज़ाहिर व बातिन का खयाल रखें…बहलोल बोले —-खाना तो खाना ,आप बोलने के अदब भी नहीं जानते ,
बहलोल (र.अ) ने फिर दामन झाड़ा ओर थोड़ा सा ओर आगे चल कर बैठ गए –

🥀शैख़ साहब फिर वहां जा पहुंचे और सलाम किया – बहलोल(र.अ) ने जवाब दिया …फिर वही सवाल किया …
कोन हो ?……शेख साहब ने कहा जुनैद बग़दादी… जो खाने ओर बोलने के आदाब नहीं जानता-
अच्छा सोने के आदाब बता दीजिए जो रिवायतों में ज़िक़्र हुए हैं,

🥀बहलोल (र.अ) ने कहा आप यह भी नहीं जानते,उठकर आगे चलना ही चाहते थे कि जुनैद बग़दादी ने दामन पकड़ लिया और कहा कि जब में नही जानता तो आप पर बताना वाजिब है-

🍁बहलोल (र.अ) ने जवाब दिया की खाने का असल आदाब यह है कि जो खा रहे हैं वह हलाल है या हराम ,
हराम लुकमे को चाहे कितना भी अदब से खाओगे वह दिल में तारीकी ही लाएगा-नूर व हिदायत नहीं—जुनैद बगदादी (र.अ) ने कहा ज्ज़ाक़ल्लाह

🍁बहलोल (र.अ) ने कहा कलाम में असल अदब यह है कि जो अल्लाह की रज़ा व ख़ुशनूदी के लिए बोलो ….अगर बेहदा बोल बोलोगे तो वह वबाल बन जाएगा–

🍁सोने का असल अदब यह है की देखो दिल में किसी मोमिन या मुसलमान का बुग्ज़ लेकर या हसद व किना लेकर तो नहीं सो रहे हैं ,दुनिया की मुहब्बत, माल की फिक्र में तो नहीं सो रहे हैं , किसी का हक़ गर्दन पर लेकर तो नहीं सो रहे हैं ….!

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