हराम माल की नहुसत

हराम माल की नहुसत

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हिकायत – हज़रत इब्राहीम बिन अदहम रज़ियल्लाहु तआला अन्हु एक रात बैतुल मुक़द्दस में आराम फरमा रहे थे आप तन्हा ही थे और आस पास कोई न था,रात का जब काफी हिस्सा गुज़र चुका तो अचानक मस्जिद का दरवाज़ा खुला और बहुत सारे लोग अंदर दाखिल हुए और नवाफिल वगैरह पढ़कर एक कोने में बैठ गए,उनमें से एक शख्स बोला कि आज रात कोई यहां हम में से नहीं है तो एक ज़ईफ शख़्स मुस्कुराये और फरमाया कि हां आज इस मस्जिद में इब्राहीम अदहम भी मौजूद हैं जो पिछली 40 रातो से इबादत में ग़र्क़ है मगर उनको वो लुत्फ हासिल नहीं हो रहा,हज़रत इब्राहीम बिन अदहम रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने जब ये बात सुनी तो फौरन उठकर उनके पास पहुंचे और कहा कि आप सच फरमाते हैं बिल्कुल ऐसा ही है पर ऐसा क्यों हो रहा है आप बतायें,तो वो बुज़ुर्ग फरमाते हैं कि बसरा में एक दिन तुमने कुछ खजूरें खरीदी थी उनमें से एक खजूर को तुमने अपनी समझ कर उठा लिया था जो तुम्हारी नहीं थी बस उसी की नहूसत है कि तुम्हारी इबादत से लज़्ज़त खत्म हो गयी है,जब आपने ये सुना तो फौरन तौबा की और बसरा को रवाना हुए और उस शख्स से माफी मांगी जिसे आपने खजूरें खरीदी थी

📕 तज़किरातुल औलिया,सफह 125

ⓩ ये बीमारी तो हमारे मुआशरे में आम हो चली है कि ठेले वाले से मूंगफली खरीदेंगे तो जब तक खड़े रहेंगे उसी के ठेले से मूंगफली उठा उठाकर खाते रहेंगे,अल्गर्ज़ किसी की भी दुकान पर पहुंचे तो खरीदना कुछ है और चखना कुछ शुरू कर देते हैं ये भी नहीं सोचते कि गरीब का कितना फायदा ही होता होगा इसमें,याद रखिये इस तरह खाना पीना हराम है और हराम खाने की नहूसत आपने पढ़ ली कि इबादत से लज़्ज़त खत्म हो जाती है,ये भी याद रहे कि हर काम में उसकी एक लज़्ज़त छिपी होती है जिस तरह फिल्म देखने वालों को फिल्म देखने में मज़ा आता है खेलने वालो को खेलने में मज़ा आता है घूमने फिरने वालों को घूमने फिरने में मज़ा आता है उसी तरह इबादत करने वालों को इबादत में मज़ा मिलता है अगर ऐसा न होता तो कोई रात रात भर जागकर कैसे इबादत कर सकता है यानि उसमें एक छिपी हुई लज़्ज़त है जो इबादत करने वालों को हासिल होती रहती है और जब वो लज़्ज़त नहीं मिलती तो इबादत से दिल उक्ता जाता है,और आजकल के इबादत करने वालों का हाल इसीलिए बुरा है कि वो सही ढंग से इबादत नहीं करते या खाने पीने की शरायत नहीं अदा करते जिसकी वजह से उनको लज़्ज़त नहीं मिलती और वो मन मारकर इबादत करते हैं जिससे कोई फायदा हासिल नहीं होता,हराम माल की एक नहूसत तो ये थी और दूसरी ये हैं कि उसको इस्तेमाल करने वाले अक्सर बीमारियों और परेशानियों में मुब्तिला ही रहता है और सबसे बड़ी परेशानी तो क़यामत में उठानी पड़ेगी कि जब तक इस हराम माल की सज़ा हासिल न कर लेगा तब तक जहन्नम में ही रहना होगा अल्लाह न करे,हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि

हदीस – बेशक कुछ लोग नाहक माल खाते हैं पस क़यामत के दिन उनके लिए आग होगी

📕 मुसनद अहमद,जिल्द 6,सफह 410

ⓩ लिहाज़ा खाने पीने में एहतियात हद दर्जे की करें क्योंकि पेट में हलाल लुक़्मा जायेगा तो इन शाअ अल्लाह खुद भी राहे रास्त पर रहेंगे और आपकी औलाद भी सही सलामत व सही रास्ते पर ही गामज़न होगी वरना हराम की कमाई से कुछ वक़्त के लिए तो माल हासिल हो जाता है मगर बाद में उससे कहीं ज़्यादा नुक्सान उठाना पड़ सकता है

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