वो वली कैसा वली है जो ग़मे हुसैन में आंसू न बहाए

वो वली कैसा वली है जो ग़मे हुसैन में आंसू न बहाए

हज़रत सैय्यदना मख़्दूम अशरफ़ जहांगीर सिमनानी रहमतुल्लाह अलैह के पीरो मुर्शिद हज़रत सैय्यदना मख़्दूम अलाउद्दीन पांडवी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं

” वो वली कैसा वली है जो मोहर्रम में ग़मे हुसैन (अलैहिस्सलाम) में आंसू न बहाए “

आप ख़ुद 10 मुहर्रम तक न नया लिबास पहेनते न ख़ुशी मनाते

📚 लताइफ़ ए अशरफ़ी 2/246,247

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