नाकिस दुरूद न भेजा

हुज़ूर नबी ए करीम ﷺ ने फ़रमाया मुझ पर नाकिस दुरूद न भेजा करो सहाबा ने पूछा या रसूलल्ल्लाह ﷺ नाकिस दुरूद कौन सा है फ़रमाया तुम कहते हो अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन और यहीं रुक जाते हो बल्कि यूं कहा करो अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन यानी आल का नाम लिए बगैर पढ़ना नाकिस है और आल के नाम के साथ पढ़ना कामिल दुरूद शरीफ़ है।

■☞ हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया जो नमाज़ पढ़े और उसमें मुझ पर और मेरे अहले बैत पर दुरूद न पढ़े उसकी नमाज़ क़ुबूल न होगी।

■☞ वैलमी ने ब्यान किया है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जब तक हुजूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम और अहले बैत पर दुरूद न पढ़ा जाए, दुआ कुबूलियत से रुकी रहती है।…✍🏻

सवाइके मुहर्रका
सफ्हा :-577

तारीख़े करबला
सफ़्हा:- 48 – 49

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