हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और शैतान


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〽️ख़ुदावन्द करीम ने फ़रिश्तों में जब एेलान फ़रमाया के मैं ज़मीन में एक ख़लीफा बनाने वाला हूँ तो शैतान लईन ने उस बात का बहुत बुरा माना और अपने जी ही जी में हसद की आग में जलने लगा।

चुनाँचे जब खुदा ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को पैदा फ़रमा कर फ़रिश्तों को हुक्म दिया के मेरे ख़लीफ़ा के आगे सज्दे में झुक जाओ तो सब सज्दे में झुक गए। मगर शैतान लईन अकड़ा रहा और ना झुका।

खुदावन्द करीम को उसका ये तजुर्बा पसंद ना आया और उससे दरयाफ़्त फ़रमाया के ऐ इबलीस! मैंने जब अपने ये क़ुदरत से बनाए हुए ख़लीफ़ा के आगे सज्दा करने का हुक्म दिया तो तुम ने क्यों ना सज्दा किया?

शैतान ने जवाब दिया- मैं आदम से अच्छा हूँ, इसलिए के मैं आग से बना हुआ हूँ और वो मिट्टी से बना है फिर मैं एक बशर को सज्दा क्यों करता?

खुदा तआला ने उसका ये रऊनत भरा जवाब सुना तो फ़रमायाः मर्दूद निकल जा मेरी बारगाहे रहमत से। जा तू
क़यामत तक के लिए मर्दूद व मलऊन है।

(कुरआने करीम सूरह बक़र)

🌹सबक़ ~

खुदा के रसूल और उसके मक़्बूलों की इज्ज़त व तअज़ीम करने से खुदा खुश होता है और उनको अपनी मिस्ल बशर समझ कर उनकी तअज़ीम से इंकार कर देना फ़ैल शैतान है और एक पैग़म्बरे खुदा को सबसे पहले तह्क़ीरन बशर कहने वाला शैतान है।

📕»» सच्ची हिकायात ⟨हिस्सा अव्वल⟩, पेज: 69-70, हिकायत नंबर- 55

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