इमाम हुसैन रजियल्लाहु अन्हु जब खुद मैदान में तशरीफ़ लाये


•●┄─┅━★✰★━┅─┄●•
हज़रत इमाम हुसैन रजियल्लाहु तआला अन्हु जब खुद मेदान मे तशरीफ़ लाये ! तो जुरअत व शुजाअत के वह जौहर दिखाये कि मलाइका भी अश-अश हो उठे !

इतने में एक शख्स इब्ने कुतबा शानी सामने आया ! और कहने लगा कि ऐ हुसेन ! तमाम अहबाब व अकारिब को हलाक करा चुके ! मगर अभी लडाई की हवस बाकी है ! तुम अकेले हजारों का मुकाबला कैंसे कर सकोगे ?

हज़रत इमाम ने फ़रमाया: तुम लोग मुझसे लडने आये हो या में तुमसे ? तुमने मेरा रास्ता बंद किया है ! और तुमने मेरे अहबाब व अकारिब को क़त्ल किया !

अब मुझे सिवाए लडाई के क्या चारा है ? ज्यादा बातें न बना और सामने आ ! यह फ़रमाकर आपने एक नारा मारा कि तमाम लश्कर थर्रा गया ! वह जालिम बदहवास हो गया ! और हाथ पैर न हिला सका !

इमाम ने तलवार मारकर सिर उडा दिया ! फिर फोज पर हमला किया तो सब भागने लगे ! इब्ने असतह नामी एक यजीदी पुकार उठा: ऐ ना मर्दो !

अब एक तन बाकी रह गया है उससे भाग रहे हो ? ठहरो मै इसके मुकाबले को जाता हूँ ! यह कहकर इमाम के सामने आया ! और तलवार मारने को उठाई !

हज़रत इमाम ने पहले ही तलवार उठाकर उसके दो टुकड़े कर दिये ! फिर हजरत इमाम ने फुरात पर जाने का इरादा फ़रमाया !
शिमर ने पुकार कर कहा: ऐ लश्करियो ! हुसेन को हरगिज पानी न पीने देना ! अगर उसने पानी पी लिया तो फिर किसी को जिन्दा न छोड़ेगा ! बस सबने हज़रत इमाम पर हमला कर दिया !

हज़रत इमाम तलवार खींचकर फरमाते हुए सिर उडाते हुए और सफों को तितर बितर फरमाते हुए फुरात के पास जा पहुंचे ! घोडा पानी में डाला ! चुल्लू में पानी पीना चाहा कि नक्कारो ने पुकार कर कहा ! की हुसैन तुम यहां पानी पी रहे हो ! और वहां खेमा लुट रहा है ! इमाम फौरन पानी फेंक कर खेमे की तरफ़ चले !

राह में कई को जहन्नम पहुंचाया ! खेमे के पास आकर देखा तो किसी को न पाया ! मक्कारो की यह चाल थी ! फिर खेमे के अंदर तशरीफ़ ले गये ! और अहले-बैत से फरमाया: चादरें ओंढो. जजा व फ़जा न करो ! मुसीबत पर सब्र करो ! मेरे यतीमों को आराम से रखना ! फिर इमाम जैनुल आबिदीन को सीने से लगाकर पेशानी को चूमा और फरमाया: बेटा!

जब मदीने पहुंचो तो मेंरे दोस्तों को मेरा सलाम कहना ! और मेरी जानिब से मेरा पैगाम देना ! कि जब तुममें कोई रंज व बला में मुब्तला हो तो मेरा रंज व बला याद करे ! जब कोई पानी पिये तो मेरी प्यास याद करे ! हजरत इमाम अपना यह आखरी दीदार देकर फिर मैदान में तशरीफ़ ले आये !

(तजकिरा सफा 60 )

सबक :
हजरत इमाम की जुरअत व हिम्मत और आपका अज़्म इस्तीकलाल ( साबित कदम रहना ) कयामत तक के मुसलमानों के लिये मिसाल बन गया !

अजीज व अकारिब की जुदाई भूख और प्यास और जालिमों के मुतवातिर जुल्म ब सितम के बावजूद आपके जज़्ब-ए-सादका में ज़र्रा बराबर भी फ़र्क न आया !

हर हाल में आपने अल्लाह तआला का शुक्र ही अदा किया ! शरीअत के खिलाफ़ हर हरकत से अखिर दम मना फ़रमाया ! रजियल्लाहु तआला अन्हु

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s