उम्मुल मोमिनीन का ख़्वाब

उम्मुल मोमिनीन का ख़्वाब

एक बीबी फरमाती हैं कि में उम्मुल-मोमिनीन हजरत सलमा रजियल्लाहु तआला अन्हा के यहा गयी ! तो देखा कि उम्मुल-मोमिनीन रो रही हैं !

मैंने पूछा कि आप क्यों रो रही हैं ! तो फरमाया मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलेहि वसल्लम कोख़्वाब में देखा है कि आपक सरे अनवर और रीशे मुबारक पर गर्द व गुबार है ! मैंने अर्ज किया या रसूलल्लाह यह क्या बात है ? आपने फरमाया कि में अभी अभी करबला से आ रहा हू ! आज मेरे हुसैन को क़त्ल कर दिया गया है !

(तिर्मिजी शरीफ़ जिल्द 2 , सफा 218 )

सबक उम्मुल-मोमिनीन का ख़्वाब : हजरत इमाम की शहादत के वक़्त हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शहादत गाह में मोजूद थे ! अपने साहबजादे के इस अजीम इम्तिहान को आपने खुद मुलाहजा फरमाया !

मालूम हुआ कि हमारे हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जिन्दा हैं ! और उम्मत के जुमला आमाल व अफ़आल और हालात से बाख़बर हैं
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*शेअर करके सद्का ऐ जारिया रवां करने में हिस्सेदार बनें*
*दुआओं 🤲🏻 में याद रखियेगा*

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