नक़्क़ारा-ए-खुदा


नक़्क़ारा-ए-खुदा

असीराने करबला ( Aseerane Karbala ) जब दरबारे यजीद में पेश किये गये ! तो हज़रत इमाम जेनुल आबिदीन रजियल्लाहु तआला अन्हु को देखकर यजीद ने पूछा: यह कौन है ?

बताया गया यह अली इब्ने हुसैन हैं ! बोला मैंने तो सुना था कि वह मारा गया ! बताया गया कि हुसैन के तीन लड़के थे !

अली अकबर अलीं असग़र मारे गये यह अली औसत (मझलें) हैं ! यह बीमारी को वजह से बच रहे ! ओर लाये गये !

यजीद ने हजरत इमाम जैनुल आबिदीन रजियल्लाहु अन्हु को बुलाकर अपने लड़के पास बिठाया और कहा ! ऐ अली ! मेरा लड़का तेरे बराबर है ! क्या तुम उससे मुकाबला कर सकते हो ?

आपने फ़रमाया कि एक एक तलवार दोनों को दे और मुकाबला देख ले ! इतने में नक़्क़ारा-ए-यजीद बजा ! यजीद के बेटे ने बडे फ़ख़्र से कहा कि यह नौबत मेरे बाप की नाम की बजी है ! या तेरे बाप के नाम की ?

उसी वक़्त मोअज्जिन ने अजान दी ! हज़रत इमाम ने जवाब दिया: देखा वह मेरे बाप…दादा के नाम की नौबत बजी तो क़यामत तक यूंही बजती रहेगी !

तेरे बाप दादा की नौबत चंद रोज बजकर बंद हो जायेगी ! यह जवाब सुनकर यजीद का लड़का ला जवाब हो गया और हाजिरीन भी हैरान रह गये !
(तजकिरा सफा 113, तनक्रीह 131)

सबक : हुसैन और अहले-बैत इमाम रजियल्लाहु तआला अन्हुम के नाम लेवा क़यामत तक बाकी रहेंगे ! और यजीद का कोई नाम तक लेने को तैयार नहीं ! मालूम हुआ कि जुल्म जालिम को मिटा देता है ! सब्र व शुक्र साबिर को खुदाई भर में और खुदा का मकबूल बना देता है ।

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