तीशाऐ ख़लील

तीशाऐ ख़लील
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〽️हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम जब पैदा हुए तो नमरूद का दौर था और बुत परस्ती का बड़ा ज़ोर था। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम एक दिन उन बुत परस्तों से फरमाने लगे की ये तुम्हारी क्या हरकत है की उन मूर्तियों के आगे झुके रहते हो। ये तो परसतिश के लायक नहीं, परसतिश के लायक़ तो सिर्फ़ एक अल्लाह है।

वो लोग बोले- हमारे तो बाप दादा भी इन्हीं मूर्तियों की पूजा करते चले आए हैं मगर आज तुम एक ऐसे आदमी पैदा हो गए हो जो उनकी पूजा से रोकने लगे हो।

आपने फ़रमाया- तुम और तुम्हारे बाप दादा सब गुमराह हैं। हक़ बात यही है जो मैं कहता हूँ की तुम्हारा और ज़मीन व आसमान सबका रब वो है जिसने उन सब को पैदा फ़रमाया और सुन लो! मैं ख़ुदा की कसम खा कर कहता हूँ कि तुम्हारे इन बुतों को मैं समझ लूंगा।

चुनाँचे एक दिन जब की बुत परस्त अपने सालाना मेले पर बाहर जंगल में गए हुए थे। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम उनके बुतख़ाने में तशरीफ़ ले गए और अपने तीशे से सारे बुत तोड़-फोड़ डाले और जो बड़ा बुत था, उसे ना तोड़ा और अपना तीशा उसके कंधे पर रख दिया, उस ख़याल से की बुत परस्त जब यहाँ आएँ तो अपने बुतों का ये हाल देख कर शायद उस बड़े बुत से पूछे की उन छोटे बुतों को ये कौन तोड़ गया है? और ये तीशा तेरे कंधे पर क्यों रखा है? और उन्हें उनका अज्ज़ ज़ाहिर हो और होश में आएँ की ऐसे आजिज़ खुदा नहीं हो सकते।

चुनाँचे जब वो लोग मेले से वापस आए और अपने बुतख़ाने में पहुँचे तो अपने मअबूदों का ये हाल देखकर की कोई इधर टूटा हुआ पड़ा है, किसी का हाथ नहीं तो किसी की नाक सलामत नहीं। किसी की गर्दन नहीं तो किसी
की टाँगें ही ग़ायब हैं। बड़े हैरान हुए और बोले कि किस ज़ालिम ने हमारे उन मअबूदों का ये हशर किया है?

फिर ये ख़बर नमरूद और उसके अमरआ को पहुंची और सरकारी तौर पर उसकी तहक़ीक़ होने लगी तो लोगों ने बताया की इब्राहीम उन बुतों के ख़िलाफ़ बहुत कुछ कहते रहते हैं, ये उन्ही का काम मालूम होता है।

चुनाँचे हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को बुलाया गया और आपसे पूछा गया कि ऐ इब्राहीम! क्या तुम ने हमारे खुदाओं के साथ ये काम किया? आपने फ़रमाया- वो बड़ा बुत, जिसके कंधे पर तीशा है उस सूरत में तो ये क़यास किया जा सकता है की ये उसी का काम है तो फिर मुझ से क्या पूछते हो? उसी से पूछ लो ना कि ये काम किस ने किया। वो बोले मगर वो तो बोल नहीं सकते। उस मौके पर हज़रत इब्राहीम जलाल में आ गए और फ़रमाया जब तुम मानते हो की वो बोल नही सकते तो फिर तुफ़ है तुम बे अक़्लों पर और उन बुतों पर जिन को तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो।

(क़ुरआन करीम, पारा-17, रूकू-5)

🌹सबक़ ~

खुदा को छोड़ कर बुतों को पूजना शिर्क है और क़ुरआन में जहाँ मिन दूनिल्लाही यानी “अल्लाह के सिवा” का लफ़्ज़ आया है, वहाँ यही बुत मुराद हैं ना की अम्बिया व औलिया। इसलिए के हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम उन पर “तुफ़” फ़रमा रहे हैं तो अगर उनसे मुराद अम्बिया व औलिया हों तो हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ऐसा क्यों फ़रमाते?

📕»» सच्ची हिकायात ⟨हिस्सा अव्वल⟩, पेज: 77-78, हिकायत नंबर- 62
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