वतन से मुहब्बत सुन्नत हैं.!

*🌹 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ*

*🇮🇳🇮🇳 वतन से मुहब्बत सुन्नत हैं.! 🇮🇳🇮🇳*

_🌎 इन्सान जिस ख़ित्ते, मुल्क, शहर या इलाके में रहता हैं, उस जगह से इन्सानियत, दिली लगाव और मौहब्बत का पैदा हो जाना एक फितरी चीज़ हैं दियानत और अमानत का तक़ाज़ा भी यही हैं कि इन्सान जहां रहे वहां की ख़ैर-ख्वाही, तरक्की और क़ामयाबी की कोशिशों में लगा रहे.!_

*_💝 रसूलुल्लाह (ﷺ) जब मक्का मुक़र्रमा से हिजरत फ़रमा कर निकले तो सवारी पर सवार होकर बार-बार पीछे मुड़कर देखते और फ़रमाते :_*
*_👉“(ऐं मक्का) अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की क़सम तू अल्लाह तआ़ला की बेहतरीन और मह़बूब तरीन ज़मीन हैं, अगर मुझे यहां से न निकाला जाता तो मैं तुझे छोड़कर न जाता.!”_*

*•–⚀•RєԲ:➻┐*
*📚 (सुनन इब्ने माजा, हदीस नं:3108)…*

_🌹जब प्यारे आक़ा (ﷺ) हिजरत फ़रमा कर मदीना तय्यबा पहुंचे और मदीना मुनव्वरा को अपना मुस्तकील वतन बना लिया तो ये दुआ़ मांगी :_

*_🕋 “ऐं अल्लाह तआ़ला, जिस त़रह मक्का मुक़र्रमा की मुहब्बत तूने हमें अ़त़ा की थी इसी त़रह़ मदीना मुनव्वरा की मुहब्बत भी हमें अ़त़ा फ़रमा या उस से भी ज़्यादा हमें मदीना तय्यबा की मुहब्बत अ़त़ा फ़रमा और यहां की आबो हवा सेहत बख़्श बना दे और हमारे गल्ला नापने के पैमाने में बरकत अ़त़ा फ़रमा और मदीने के वबाई बुख़ार को ज़ुहफा (नामी मुक़ाम) में मुन्तकील कर दे.!”_*

*•–⚀•RєԲ:➻┐*
*📚 (मुस्लिम शरीफ़, हदीस नं : 3342, 3480)..*

*_👉 इस से ये मालूम हुआ कि हम जिस वतन में रहे उस वतन से और वहां की आबो हवा, वहां की मिट्टी और वहां के लोगों से मुहब्बत करना भी सुन्नत हैं.!_*

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