Hadith *दुनिया की हक़ीकत*

*दुनिया की हक़ीकत*
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*_हज़रते ह़ुज़ैफह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु नें फरमाया कि मैं नें रसूले करीम सल्लललाहु तआला अलैही वसल्लम को फरमाते हुएे सुना कि दुनिया की मोहब्बत हर बुराई की जड है_*

_*📕 मिशकात शरीफ ह़दीस नम्बर 5212 जिल्द 2, सफह 250*_
_*📕 अनवारूल ह़दीस सफह 410*_

*_हज़रते अबू मूसा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने कहा कि हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैही वसल्लम नें फरमाया कि जो शख्स अपनी दुनिया से मोहब्बत करता है!(एैसी मोहब्बत जो अल्लाह व रसूल की मोहब्बत पर गालिब हो!) तो वह अपनी आखिरत को नोक़सान पहूंचाता है और जो अपनी आखिरत से मोहब्बत करता है तो वह अपनी दुनिया को नोक़सान पहूंचाता है तो एे मुसलमानों फना होने वाली चीज़ यानि दुनिया को छोडकर बाक़ी रहने वाली चीज़ यानि आखिरत को अख्तियार कर लो_*

_*📕 मिशकात शरीफ सफह 441*_

*_हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैही वसल्लम ने फरमाया कि दुनिया खुदा एे तआला की नज़र में मच्छर के बराबर भी इज़्ज़त रखती तो काफिर को इसमें एक घूंट भी नहीं पिलाता_*

_*📕 तिर्मिज़ी शरीफ जिल्द 2 सफह 57*_
_*📕 मिशक़ात शरीफ सफह 441*_

*_हज़रते अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि हुज़ूर सल्लललाहू तआला अलैही वसल्लम नें फरमाया कि दुनिया मोमिन के लिएे क़ैद खाना है और काफिर के लिएे जन्नत_*

_*📕 मुसलिम शरीफ जिल्द 2 सफह 407*_
_*📕 मिशक़ात शरीफ सफह 439*_
_*📕 शराहुस्सुदूर सफह 15*_

*_मौला ने जन्नत को मुशकिलात से और जहन्नम को आराईश से घेर दिया है_*

_*📕 मिश्कात, जिल्द 1, सफह 505*_

*_एक मर्तबा हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम का गुज़र एक मुर्दा बकरी पर हुआ आपने फरमाया कि क्या ये बकरी अपने मालिक को पसंद आएगी तो सहाबा इकराम ने फरमाया कि नहीं बल्कि इसकी बदबू की वजह से ही तो इसे यहां फेंक दिया गया है तो हुज़ूर फरमाते हैं कि रब के नज़दीक़ ये दुनिया इस मुर्दा बकरी से भी कम अहमियत रखती है_*

_*📕 मुक़ाशिफ़ातुल क़ुलूब, सफह 217*_

*_जो शख्स दुनिया की लज़्ज़तों में घिर गया तो वो जहन्नम के उतने ही क़रीब हो गया_*

_*📕 तंबीहुल ग़ाफिलीन, सफह 62*_

_*हिक़ायत*_

*_क़यामत के दिन एक बन्दा 400 साल की खालिस इबादत लेकर रब की बारगाह में हाज़िर होगा मौला फरिश्तों को हुक्म देगा कि मेरे बन्दे को मेरी रहमत से जन्नत में ले जाओ, इस पर वो कहेगा कि ऐ मेरे रब बल्कि मेरे आमाल से कि मैंने काम ही ऐसा किया है, इतना कहते ही उसे सख्त प्यास लगेगी तभी एक फरिश्ता पानी लिए आता दिखाई देगा जब ये उससे पानी मांगेगा तो वो कहेगा कि मैं तो बेचता हूं, इस पर वो बन्दा कहेगा कि यहां दौलत तो है नहीं फिर इसकी कीमत क्या होगी वो कहेगा एक डोल की कीमत 100 साल की इबादत, इस तरह वो 400 साल की इबादत बेचकर 4 डोल पानी पी लेगा, अब मौला इरशाद फरमाएगा कि अब क्या कहता है क्या मैं अब तुझे अपने इन्साफ से जहन्नम में ना भेजूं इस पर वो रोने लगेगा और कहेगा कि मौला मुझे अपनी रहमत से जन्नत में दाखिल फरमा, तो मौला फरमाएगा कि मेरे बन्दे को मेरी रहमत से जन्नत में ले जाओ_*

_*📕 चहल हदीस, सफह 220*_

*_कहने का मतलब ये है कि नेक आमाल तो किया ही जाए मगर उससे भी ज़्यादा ज़रूरी ये है कि जो कुछ भी नेकियां हासिल हो या जो कुछ भी मौला ने अपने फज़्ल से अता किया हो उस पर फ़ख्र या तकब्बुर हरगिज़ ना आने पाए वरना सब किया धरा बर्बाद हो जायेगा, जैसा कि हदीसे पाक में है कि_*

*_जिसके दिल में ज़र्रा बराबर भी तकब्बुर होगा वो हरगिज़ जन्नत में ना जायेगा_*

_*📕 मुस्लिम, जिल्द 1, सफह 65

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