मलऊन मरवान ग़ुस्ताख़ ए रसूल और ग़ुस्ताख़ ए अहलेबैत था

*मलऊन मरवान ग़ुस्ताख़ ए रसूल और ग़ुस्ताख़ ए अहलेबैत था*

इब्ने हजर मक्की लिखते हैं : रिवायत है के मलऊन मरवान जब मदीने का हाकिम बना तो *हर जुमे को मिम्बर पर आ कर मौला अली को गालियां देता* (माज़ अल्लाह) हज़रते इमाम हसन इसको जानते थे और ख़ामोश रहते थे और मस्जिद में इक़ामत के दौरान तशरीफ़ लाते (यानी जब जमाअत खड़ी होने वाली होती)
लेकिन मरवान *इमामे हसन की बुर्दबरी पर भी रज़ामंद न हुआ और एक शख़्स को इमामे हसन के घर पे भेज कर गालियां कहलवाई* (अस्तग़फ़िरुरल्लाह)

इमामे हसन ने उस शख़्स से फ़रमाया के तुम वापस चले जाओ और मलऊन मरवान से कहो के हम तुम्हे गालियां दी कर जो कुछ तुमने कहा है उसको मिटाना नही चाहते हाँ ये ज़रूर है कि हमारा और तुम्हारा क़याम रब के यहां ज़रूर होगा अगर तुम झूठे निकले तो *अल्लाह सख़्त बदला लेने वाला है* इमामे हसन ने तंज़ में कहा बेशक मरवान ने मेरे जद्दे अमजद रसूले पाक की बड़ी ताज़ीम की के *मेरे बारे में बुरे अल्फ़ाज़ों कहता है और गालियां देता है*

वो शख़्स जब वहां से जाने लगा तो इमामे हुसैन मिले और बहुत डराने धमकाने पर उसने मरवान की बकवास उन्हें सुनाई

*इमामे हुसैन ने उस शख़्स से फ़रमाया* : *मलऊन मरवान से कहना तू भी अपने बाप और क़ौम की ख़बर ले और मेरे और तुम्हारे दरमियान निशानी ये है कि अल्लाह के रसूल की लानत तुम्हारे दोनों शानो के दरमियान बन गयी है*

📚ततहीर अल जिनान इब्ने हजर मक्की सफ़ह 180 ये रिवायत अल मतालिब अल आलिया 4457 में भी मौजूद है

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