लम यअरिफुनी गैरु रब्बी..

लम यअरिफुनी गैरु रब्बी..

यह #हदीस आपने कई मर्तबा सुनी होगी कि हुज़ूर नबी ए अकरम ने सैय्यदना अबू बकर सिद्दीक र.अ. से फ़रमाया कि मेरी हक़ीक़त को मेरे रब के अलावा कोई नहीं जानता..

इसके बरअक्स आपने यह हदीस शायद ही कभी सुनी हो कि जब नजरानियों से मुबाहले का मुआमला पेश आया और #अल्लाह ने आयते मुबाहिला नाज़िल फरमाई और आयत के मुताबिक़ सरकार जाने बहार ने अपने साथ सैय्यदा फातमा, हसन-हुसैन, और मौलाए कायनात को बुला लिया
लिहाज़ा उस आयत के मुताबिक मौला ए #कायनात अली अल-मुर्तज़ा अलैहिस्सलाम नफ्से रसूल क़रार पाये.
इसके अलावा अली और मैं एक #नूर से हैं, अली मुझसे हैं और मैं अली से हूँ, जिसने अली को गली दी उसने मुझे गाली दी. अली का खून मेरा खून है, #अली का गोश्त मेरा गोश्त है, अली का जिस्म मेरा जिस्म है वगैरह वगैरह फरमाने नबवी भी कसरत के साथ मौजूद हैं.

इन सब को मद्देनज़र रखते हुए अब आप ख़ुद यह सोचिये कि जब अल्लाह के अलावा साहिबे लौलाक सरवरे कायनात की हक़ीक़त को कोई नहीं जानता तो भला यह कैसे मुमकिन है कि अल्लाह और उसके #रसूल के अलावा कोई नफ्से रसूल, नूरे रसूल, खूने रसूल, शोहरे #बतूल की हक़ीक़त को जान सकता हो?

समझ आया क्यों हुज़ूर ने फ़रमाया अली मिस्ले #ईसा अलैहिस्सलाम हैं, अली का मुकाम ऐसा ही है जैसा #मूसा के नजदीक #हारुन अलैहिमुस्सलाम का.. और क्यों ग़दीरे खुम पर ख़ुत्बा में इरशाद फ़रमाया कि जिसका मैं मौला हूँ अली उसका मौला है ?

समझ आया क्यों फ़रमाया मैं #इल्म ओ #हिकमत का शहर हूँ और अली उसका दरवाज़ा ?

اللهم صل وسلم و بارك علیٰ سیدنا محمد و علیٰ آل سیدنا محمد كما صلیت و باركت علیٰ سیدنا ابراهیم و علیٰ آل سیدنا یبراهیم انك حمید مجید۔

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