Hadith ज़ुल्म की मज़म्मतज़ुल्म की मज़म्मत

ज़ुल्म की मज़म्मत
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जो शख्स एक बालिश्त ज़मीन भी अगर ज़ुल्म से हासिल करेगा तो क़यामत के दिन सातों ज़मीन का तौक़ बनाकर उसके गले में डाल दिया जायेगा
📕 बुखारी, जिल्द 1, सफह 332
जो शख्स ज़ुल्मन किसी को एक कोड़ा भी मार देगा तो क़यामत के दिन उसका भी हिसाब देना होगा
📕 तिर्मिज़ी, जिल्द 2, सफह 22
मालदार का किसी को उसका हक़ देने में टाल मटोल करना भी ज़ुल्म है
📕 मुस्लिम, जिल्द 2, सफह 18

अगर कोई दरख़्त की एक शाख भी झूठ बोलकर किसी की मार ले तो उसने अपने ऊपर जहन्नम को वाजिब कर लिया
📕 मुस्लिम, जिल्द 1, सफह 80
ये पढ़ लीजिए कि शायद इससे बड़ी नसीहत क्या होगी
अगर दुनिया में एक सींग वाली बकरी ने एक बग़ैर सींग वाली बकरी को भी मारा होगा तो क़यामत के दिन उनका भी हिसाब होगा
📕 मुस्लिम, जिल्द 2, सफह 320
जो किसी ज़ालिम की मदद करेगा तो यक़ीनन उस पर भी ज़ुल्म किया जायेगा
📕 अलइतहाफ, जिल्द 6, सफह 134
जो किसी मज़लूम को किसी ज़ालिम के ज़ुल्म से ना बचा सके और खड़ा होकर देखता रहे तो उस पर अल्लाह की लानत है या ये कि दिल में बुरा जानता हो
📕 मज्मउज़ ज़वायेद, जिल्द 6, सफह 284
मज़लूम की बद्दुआ से बचो कि उसके और खुदा के बीच कोई रूकावट नहीं
📕 तिर्मिज़ी, जिल्द 2, सफह 22
हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने अपने सहाबा से पूछा क्या तुम जानते हो कि मुफलिस कौन है तो फरमाते हैं कि हम तो उसे ही मुफलिस जानते हैं जिसके पास माल ना हो, तो हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि मेरी उम्मत में मुफलिस वो होगा जो बरौज़े क़यामत नमाज़ रोज़ा हज ज़कात व दीग़र नेक आमाल लेकर आएगा मगर युं कि दुनिया में किसी को गाली दी होगी, किसी को मारा होगा, किसी का हक़ छीना होगा, किसी का खून बहाया होगा, पस उससे वो सारी नेकियां लेकर उन हक़दारों को दे दी जाएगी और अगर अब भी उन पर कुछ ज़ुल्म बाकी रह गए होंगे तो फिर उनके गुनाह इसके सर डालकर इसको जहन्नम में भेज दिया जायेगा
📕 मुस्लिम, जिल्द 2, सफह 33
हर इंसान को 2 किस्म का हक़ अदा करना होता है पहला तो हुक़ूक़ुल्लाह यानि रब का हक़ जैसे कि नमाज़ रोज़ा हज ज़कात व नेकियों की तरफ माइल रहना और अपने आपको गुनाहों से बचाना और दूसरा हुक़ुक़ुल इबाद यानि बन्दों का हक़, हुक़ूक़ुल्लाह से ज़्यादा सख़्त हुक़ूक़ुल इबाद है कि अल्लाह अपना हक़ तो अपने रहमो करम से माफ फरमा भी देगा मगर बन्दों का हक़ जब तक कि बन्दा खुद ना माफ करेगा मौला हरगिज़ माफ ना करेगा, तो नमाज़ रोज़ा करना बहुत अच्छी बात है मगर उसके बन्दों से इखलाक़ से पेश आना ये बहुत ज़्यादा ज़रूरी है,हदीसे पाक में आता है कि हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं
तुममे से सबसे ज़्यादा वो मेरा महबूब है जिसके अखलाक़ सबसे अच्छे हों और फरमाते हैं कि मीज़ाने अमल में बन्दे का सबसे ज़्यादा वज़नी अमल उसका हुस्ने अखलाक़ होगा

📕 बहारे शरीयत, हिस्सा 16, सफह 187
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