सुल्तान मुराद अव्वल

*⚔️🇹🇷सल्तनत ए उस्मानिया🇹🇷⚔️*
*🪓Ottoman Empire🗡️*

*

*(1)सुलेमान शाह*
(बेटे)
⬇️
*(2)गाज़ी अल तुगरल (Ertgrule)*
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*(3)सुल्तान उस्मान गाजी*
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*(4)सुल्तान ओरहान गाज़ी*

*(5)सुल्तान मुराद गाज़ी अव्वल*

*👑सुल्तान मुराद अव्वल👑*

*यूरोप में उस्मानियो के दाखिल होने और (Edirne) एड्रीन पे कब्ज़े की वजह से यूरोपियन ईसाई बोहोत परेशान थे ओर सर्बिया,एम्पायर का शहनशाह खुश नही था, इसलिए कि एड्रीन(Edirne) शहर उसकी सरहद के बिकुल साथ ही था _उसे डर था कि उस्मानी तुर्क यहा तक आगए हे तो आगे आने से कोन रोकेगा वो इस बात को समझ गया और मोके की तलास में रहने लगा इसको ये मौका मिल गया*

*1371 में सुल्तान मुराद गाज़ी , दरिया ए दानियाल के पार अनातोलिया में थे और एड्रीन में कम सेनीके दस्ते ही थे,जादातर सैनिक दस्ते अनातोलिया में ही रहते थे _सुल्तान मुराद अनातोलिया में छोटी छोटी बागवतो को कुचलने में मसरूफ थे*

*(Edirne) एड्रीन शहर में गवर्नर लाला शाहीन पाशा ओर एक हजार के लग-भग फ़ौज़ मौजूद थी, सर्बियन शहनशाह ने इस मौके को गनीमत जाना और 50 हजार का एक बड़ा लश्कर तय्यार कर लिया*

_दरिया ए मोरिटशा में 50 हजार सर्बियाई सेना खेमाजन थी _और उस्मानी सेना पे हमले के लिए तय्यार खड़ी थी_

*लेकिन लाला शाहीन पाशा जो सिर्फ गवर्नर ही नही बल्कि तुर्को के माहिर तरीन जनरैल भी थे,उनको ये खबर मिल गई ,के सर्बियन लश्कर तय्यारी करके एड्रीन पे हमला करने आ रहा हे,ये खुफिया जानकारी लाला शाहीन पाशा के जासूस लेकर आए ,*

_जंग में सबसे बड़ी ताकत होती हे जानकारी (इंफोमेसन) खुफिया जानकारी लाला शाहीन पाशा के जसुसो ने उन्हें बताया कि रात में सर्बियन फ़ौज़ एक जशन मना रही हे जिसके बाद अगले दिन उस्मानियो पे हमला कर दिया जाएगा,,_

*पाशा ने इस मौके को गनीमत समझा ओर इसको मौका जाना और खामोशी से 800 सो जाबाज़ों के साथ दरिया के करीब छुप कर बैठ गया,रात के वक़्त जब सब सर्बियन लश्कर जश्न मना कर थकान उतार रहा था,तो अचानक 800 तुर्को ने हमला बोल दिया.*

*आधे सोए,आधे नसे में मस्त सर्बियन लश्कर को खबर भी नही थी ,की हमलावरों की तादाद एक हजार से भी कम है , बे-खबर लश्कर ने इसे बड़ा हमला समझा,ओर जिसको जिधर मौका मिला भागने लगा*

_लेकिन सर्बियन के एक तरफ दरिया ओर दूसरी तरफ तुर्को की शकल में मौत थी,ईसाई लश्कर दरया की तरफ भगा लेकिन इस भागने में भी हजारो सर्बियन सैनिक कत्ल हो गए,_

*ये जंग दरिया ए मोरिटशा के किनारे पर हुई थी इस लिए -इसे बेटल ऑफ मोरिटशा के नाम से याद किया जाता हे,मोरिटशा की इस तारीखी जंग में सर्बियन इतनी बड़ी तादाद में कत्ल हुवे के दरिया का पानी सुर्ख हो गया

_मोरिटशा की इस तारीखी जंग में सर्बियन इतनी बड़ी तादाद में कत्ल हुवे के दरिया का पानी सुर्ख हो गया_

*तुर्को के इतिहास की ये ऐसी हेरत कुन जंग थी जिसमे इन्तिहाई छोटे आठ सौ के लश्कर ने अपने से कई गुना बड़े पचास हजार के लश्कर को सिर्फ जंगी महारत की बिना पे मात दी*

_बेटल ऑफ मोरोटसा को तारीख में सर्बो की सबसे बड़ी तबाही के नाम से भी याद किया जाता हे,_

*जंग का नतीजा ये हुवा जो सर्ब उस्मानियो को शिकस्त देने आए थे अपना इलाका भी हार बैठे , सर्बियन एम्पायर की बोहोत बड़ी सल्तनत थी वो टुकड़ो में बट गई , ओर ये टुकड़े उस्मानियो की बरतरी तस्लीम करने लगे ,यानी इसे खिराज देने लगे*

_सर्बो की अज़ीम तबाही ओर उस्मानियो का यूरोप को सिखस्त ए फास देना योरोप की ईसाई रियासतो के लिए मोत का पैगाम था,_

*क्यों के उन्होंने यूरोपी मुल्क स्पेन में मुसलमानो की 8 सदियों तक फैली सल्तनत ए करनाता ओर मुनदलस देखी थी ,जिसे वो पूरी ताकत के बावजूद बेटल ऑफ मोरिटशा के वक़्त तक पूरी तरह खत्म नही कर सके थे,*

_स्पेन में सल्तनत ए करनाता की सकल में थोड़े से इलाके में मौजूद थी ईसाई के नज़दीक यूरोप में मुसलमानो की एक सल्तनत करनाता खत्म हो रही थी ,तो दूसरी उस्मानी जन्म भी ले रही थी,ऐसे में इस सल्तनत यानी सल्तनत ए उस्मानिया के मुकाबले के लिए ईसाई इखट्टा हुवे_

*ईसाईयो के सबसे बड़े रुहानी पेशवा पॉप ने यूरोप भर में ईसाइयों को मुत्तहिद करना शूरू कर दिया, यानी एक ओर सलेबी जंग की इब्तिदा होने जा रही थी*

_इससे पहले बैतूल-मुक़द्दस के लिए मुसलमानो ओर यूरोप के ईसाइयों में तवील सलेबी जंगे हो चुकी थी जिनमे मुसलमान फातेह रहे थे,ओर उस वक़्त जीस जंग के आगाज़ की हम बात कर रहे है बैतूल मुक़द्दस पर मुसलमानो की ममलूक़ सल्तनत का राज़ था,_

*इधर उस्मानी तुर्क भी ईसाइयो के खिलाफ जंग को जिहाद ही कहते थे,ओर ईसाई भी इसे मज़हबी जंग का नाम देते थे*

_यूरोप बिखरा हुवा था उसको उस्मानी फ़ौज़ से लड़ने के लिए एक लीडर चहिए था जो कि उस वक़्त यूरोपियन के पास नही था,लेकिन फिर ये लीडर उन्हें सर्बिया की टूटी हुई रियासत के एक किनारे से मिल गया_

*ये एक सर्ब शहजादा प्रिंस लजार(prins lazar) था जिसने 1380 के आखिर में तुर्को के खिलाफ बगावत करदी,यानी उन्हें वो जजिया जो बेटल ऑफ मार्टिसा के बाद से अदा कर रहे थे,वो देने से इनकार कर दिया*
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*(1)सुलेमान शाह*
(बेटे)
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*(2)गाज़ी अल तुगरल (Ertgrule)*
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*(3)सुल्तान उस्मान गाजी*
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*(4)सुल्तान ओरहान गाज़ी*
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*(5)सुल्तान मुराद गाज़ी अव्वल*
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*(6)सुल्तान बा-यज़ीद*

*👑सुल्तान मुराद गाज़ी(मुराद अव्वल)👑*

*ये खतरनाक चाल थी,ओर बहोत बड़ा रिस्क था,सुल्तान मारे भी जा सकते थे ,ओर उनके मारे जाने से उस्मानी जंग हार भी सकते थे, ओर फिर देखिए हुवा भी यही एक ईसाई नाईट किसी तरह सुल्तान तक जा पोहचा ओर उसने खंज़र के वार से सुल्तान मुराद को शहिद कर दिया*

_किस्मत का सितम देखिए कि इधर सुल्तान मुराद गाज़ी मैदान जंग में शहिद हो गए तो दूसरी तरफ सलेबियो का सालार प्रिंस लाज़ार भी मारा गया_

*अब एक तरफ लाज़ार का बेटा ओर दूसरी तरफ मुराद गाज़ी के बेटे बा-यज़ीद अपने अपने लश्कर की कयादत करने लगे जंग की होलनाकि बड़ चुकी थी और लासो पे लाशे गिर रही थी,*

*लेकिन ऐसे में एक ना-काबिले यकीन बात हुई , यूरोपियन ईसाई के एक लश्कर ने पीछे हटना शूरू कर दिया इससे ईसाई लश्कर की कमर बिलकुल टूट गई ,ये लश्कर के बारे में कहा जाता हे कि ये जंग को बे-नतीजा देख अपने सिपाहियों की जान बचाने के लिए पीछे हटा,*

*लेकिन जो भी था जंगे कोसोवो यू खत्म हुई के दोनों फ़ौजे हजारो लाशे ओर अपने सालार की जाने गवा के वापिस चली आई,*

_ब-जाहिर तो मैदान ए जंग में कोई फैसला नही हुवा था लेकिन ये तुर्को के लिए कामयाबी थी इस जंग में सर्बियन का इतना नुकसान हुवा की उन्होंने तुर्को से जंग का इरादा ही छोड़ दिया बल्कि उस्मानियो को खिराज देकर उनके ब-गुजार रियासत बन गए_

*सिर्फ सर्बिया ही नही 1390 तक रोमन एम्पायर समेत बल्कान का तकरीबन सारा इलाका उस्मानी सल्तनत का बाज़ गुजार बनगया, ये हर साल उस्मानियो को खेराज भी देते थे और जरूरत पड़ने पर लड़ने के लिए सिपाही भी फ़राहम करने के पाबंद थे*

*जंगे कोसोवो में सुल्तान मुराद गाज़ी शहीद तो हो गये,लेकिन वो अपने जा-नाशीनो के लिए एक लाख मुररबा मिल फैली बड़ी सल्तनत छोड़ गए थे, यानी उन्होंने अपने वालिद ओरहान गाज़ी से मिली सल्तनत को 3 गुनाह फेला दिया था*

_सुल्तान मुराद के शहीद होने के बाद इतनी बड़ी सल्तनत को नया सुल्तान चाहिए था, इस जंग में सुल्तान मुराद के बेटे बा-यज़ीद मैजूद थे , सबसे पहले तो ये खबर किसी को नही दी कि सुल्तान मुराद गाज़ी शहीद हो चुके हे,_

*बा-यज़ीद सुल्तान बन चुके थे ,बा-यजिद के सामने सलेबी जंगे नही थी बल्कि अपने तुर्क काबिलो का सबसे बड़ा मददगार अमीर तैमूर लंग असल चेलेन्ज था*

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