सुल्तान मुराद गाज़ी

(1)सुलेमान शाह* (बेटे) ⬇️ *(2)गाज़ी अल तुगरल (Ertgrule)* ⬇️ *(3)सुल्तान उस्मान गाजी* ⬇️ *(4)सुल्तान ओरहान गाज़ी* ⬇️ *(5)सुल्तान मुराद गाज़ी*

*सुल्तान मुराद गाज़ी जिनको मुराद अव्वल भी कहा जाता हे* *1362 में सुल्तान ओरहान गाज़ी के विसाल के बाद , तख्त पे सुल्तान मुराद गाज़ी बैठे, ओर अपने बैठते ही तुर्को की गाज़ा रिवायत को आगे बढ़ाया* *सुल्तान मुराद गाज़ी निहायत समझदार ओर बेहतरीन जंगजू थे_अपने अपने दौर में एक अज़ीम फ़ौज़ तय्यार की ओर यूरोप में इस्लाम के झंडे गाड़े* _1370 के करीब उस्मानियो ने गुलामो की ऐसी फ़ौज़ तय्यार करना शूरु की जिसने आगे 500 साल तक फ़ौज़ का सबसे ताकतवर हिस्सा रही._ *तारीख की एक अज़ीम जंग जिसमे 800 सो सिपाही ने 50 हजार के सलेबी लश्कर को मात दी ,इतिहास गवाह हे कि 800 ने 50 हजार को धूल चटाई थी , वो कारनामा सर-अंजाम सुल्तान मुराद गाज़ी की फ़ौज़ ने दिया था* _तुर्को की सेना के मुकाबले योरोपियन फ़ौज़ बोहोत जादा तकनीक से लैस ओर डिस्प्लेन वाली थी जबकि तुर्को में हौसला जस्बा तो था लेकिन उनकी फ़ौज़ में डीसीप्लेन नही था ,_ *सुल्तान मुराद गाजी ने इस कमी को दूर करने के लिए एक फ़ौज़ तय्यार की ,, ये फ़ौज़ मुसलमान नोजवानो को लेकर नही, बनाई ,बल्की ईसाई बच्चो को जो मुसलमान हुवे उन को शामिल किया* *इस लिए की तुर्क कबाइल लोग अपने अपने काबिले के जादा वफादार होते थे _ओर सुल्तान इस बात को अच्छी तरह समझते थे _की कभी भी कबिले की खातिर वो सल्तनत के खिलाफ जा सकते हे _और अपने कबिले की खातिर खबरे भी लीक कर सकते हे ,* *सुल्तान को ऐसे सिपाही चाहिए थे जो किसी भी लिहाज़ से बगावत ओर जासूसी ना कर सके ,,इस लिए सुल्तान ने एक अलग फ़ौज़ बनाई जो दुनिया की सबसे नायाब फौजो में से एक थी* *सुल्तान मुराद ने इस फ़ौज़ के लिए बलकान के ईसाई बच्चो को भर्ती करना शूरु किया_बलकान पे सल्तनत का कब्ज़ा था और यहा रहने वाले ईसाई पे ये लाज़िम था कि वो घर का एक बेटा सुल्तान की फ़ौज़ के लिए वक़्फ़ करे* _8 साल से 18 साल के बच्चों को बलकान से लिया जाता और उनको समुंदर के पार अनातोलिया में लाया जाता जहा उनको तुर्क ज़बान ओर कल्चर सिखाया जाता _ये इस्लाम कुबूल करते फिर इनकी 8 साल तक जबरदस्त जंगी तरबियत होती_ *जब पूरी तरह ये जंग के माहिर हो जाते तो इनको मुख्तलिफ सुबो का एक्सपर्ट बनाया जाता* _तिरन-दाज़ी -घोड़ सवारी वगेरह इनकी तनखाह पूरी फ़ौज़ में किसी भी दूसरे ओहदे से बेहतर होती थी_ *इस फ़ौज़ को जेनिस्सेरी (janissary) फ़ौज़ कहते थे जिसका मतलब है (नई फ़ौज़).ये इंतिहाई मुनज़्ज़म ओर बा-वक्कार फ़ौज़ थी ओर क्यों ना होती इसमें किसी बद-अहदी की कम से कम सजा सजाए मोत थी.* ___________

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