हमारे वजूद में करबला कहां मौजूद हैं ? और हूसैैनीयत और यजीदियत कहां मौजूद है ?

आईये करबला को हमसब अपने वजूद में तलाशते हैं!
सबसे पहली बात तो आप अपने जहन से ये बात को निकाल दिजीए के करबला किसी शहर/जगह का नाम है और हूसैैनीयत और यजीदियत सिर्फ किसी शख्सियत का नाम है और वो आपसे कहीं बाहर मौजूद है,
इसबात को जबतक आप अपने जहन से नहीं ,नीकालीएगा तबतक आप बात को पूरी तरह से नहीं समझ पाइयेगा!

अब सवाल उठता है की हमारे वजूद में करबला कहां मौजूद हैं ? और हूसैैनीयत और यजीदियत कहां मौजूद है ?

आप ये गुमान कर बैठे हैं के करबला में यजीदियत हलाक हो गया था, जी नहीं यजीदियत किसी एक शख्स का नाम नहीं बल्कि यजीदियत एक किरदार का नाम है एक जात का नाम है, या यों कह लीजीये के हर बूरे फेल का नाम ही यजीदियत है !
ठीक इसका उलटा हर अच्छे फेल का नाम हूसैैनीयत है , और हूसैैनीयत हमेशा अच्छाई के तरफ माईल करता है !

अब आईये हम समझते हैं कि हमारे वजूद में करबला और हूसैैनीयत /यजीदियत कहां और कैसे मौजूद हैं ,
हमारा ये वजूद (body) मिसल करबला है, और हमारा जमीर मिसल हूसैन हैं और हमारा नफस मिसल यजीद है !
और ये यजीद (नफस) चाहता है की हूसैन (जमीर) मेरी दस्त बैयत ले, (वैसे तो बैयत के माने होता है बीक जाना, खुद को उसके हूकमों के ही ताआबे हो जाना है !) मगर जमीर (हूसैन) मना कर देता है, लेकिन नफस (यजीद) नहीं मानता है और जंग पर आमादा हो जाता है !
और फिर नफस(यजीद) और जमीर (हूसैन) के बीच जंग शूरू हो जाता है ,
अगर नफस (यजीदियत ) आपके जमीर (हूसैैनीयत) से जीत गये तो फिर वो आप पर हावी हो जाएगा और आपको नफस (यजीदियत) की बैयत लेना पडेगा फिर नफस आपको जो कहेगा आपको करना पड़ेगा, और नफस(यजीदियत) आपको बूराई के तरफ माईल कर देगा !
और अगर आपमें जमीर(हूसैनीयत) नफस (यजीदियत) से जीत गया तो समझीए आप हूसैन से बैयत ले चूके हैं और आप अच्छाई के तरफ माईल हो गये तब जाकर आप यजीदियत पर शौक से लानत कर सकते हैं वरना आप ही तो वो यजीद है जिसपर लानत करते रहते हैं!
अगर आपको नफस (यजीद) की पैरवी करते वक्त आपका जमीर नहीं रोकता है तो समझ लीजीये आप यजीद से दस्त बैयत ले चूके है और उन्हीं के हाथों बीक चूके है !

हमसबको भी चाहिए किसी कामील पीर के सोहबत में रहकर इस जंग को शूरु करे और फतहयाबी हासिल कर लें !
आप ही देख ले न जितने भी बूजूरग हस्ती आये सभी ने अपने नफस(यजीद) से जंग करके फतहयाबी हासिल की और जिंदा ओ जावेद हो गये,
मौला हूसैन करबला के मैदान में यही सदा दिया था के जबतक तूम अपने अंदर के यजीद (नफस) को हलाक नहीं करोगे तूम हूसैन नहीं बन सकते हो !
और यही है हल मिन नासेरीन यूंसेरूना की सदा जो आजतक हमारे अंदर गूंज रही है, जरुरत है तो बस गौर ओ फिकर की !

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