_नमरूद_

*_नमरूद_*
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*_नसारा का एक फिरका है जिसका नाम सायबा है उसी क़बीले के बादशाहों का लक़ब नमरूद है,अब तक 6 ऐसे बादशाह गुज़रे हैं जिनका लक़ब नमरूद हुआ_*

*_1. नमरूद बिन कुंआन बिन हाम बिन नूह,यही हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के ज़माने का नमरूद है_*

*_2. नमरूद बिन कोश बिन कुंआन_*

*_3. नमरूद बिन संजार बिन ग़रूर बिन कोश बिन कुंआन_*

*_4. नमरूद बिन माश बिन कुंआन_*

*_5. नमरूद बिन सारोग़ बिन अरग़ू बिन मालिख_*

*_6. नमरूद बिन कुंआन बिन मसास बिन नुक़्ता_*

*📕 उम्दतुल क़ारी,जिल्द 1,सफह 93*
*📕 हयातुल हैवान,जिल्द 1,सफह 98*

*_अब तक 4 ऐसे बादशाह गुज़रे हैं जिन्होंने पूरी दुनिया पर हुक़ूमत की है 2 मोमिन हज़रत सिकंदर ज़ुलक़रनैन और हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम और 2 काफ़िर नमरूद और बख्ते नस्र,और अनक़रीब पांचवे बादशाह हज़रत इमाम मेंहदी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु होंगे जो पूरी दुनिया पर हुक़ूमत करेंगे_*

*📕 अलइतक़ान,जिल्द 2,सफह 178*

*_नमरूद ने 400 साल हुक़ूमत की,नमरूद के पास कुछ तिलिस्माती चीजें थी जिसकी बिना पर उसने खुदाई का दावा किया_*

*_! तांबे का एक बुत था,जब भी कोई चोर या जासूस शहर में दाखिल होता तो उस बुत से आवाज़ आती जिससे वो पकड़ा जाता_*

*_! एक नक़्क़ारा था,जब किसी की कोई चीज़ ग़ुम हो जाती तो उस पर चोब मारा जाता तो वो गुमशुदा चीज़ का पता बताती_*

*_! एक आईना था,अगर कोई शख्स ग़ुम हो जाता तो उसमे नज़र आ जाता कि इस वक़्त कहां पर है_*

*_! एक दरख़्त था,जिसके साए में लोग बैठते और उसका साया बढ़ता जाता यहां तक कि 1 लाख लोग बैठ जाते थे मगर जैसे ही 1 लाख से 1 भी ज़्यादा होता तो साया हट जाता और सब धूप में आ जाते_*

*_! एक हौज़ था,जिससे मुकदमे का फैसला होता युं कि मुद्दई और मुद्दआ अलैह दोनों को उस हौज़ में उतारा जाता जो सच्चा होता उसके नाफ़ से नीचे पानी रहता और झूठा उसमे डुबकी खाता_*

*📕 तफ़सीरे नईमी,जिल्द 1,सफह 677*

*_नमरूद ने शहरे बाबुल में एक इमारत बनवाई जिसकी ऊंचाई 15000 फिट थी,उसने ये इमारत आसमान वालों से लड़ने के लिए बनवाई थी,मौला ने एक ऐसी हवा चलायी कि पूरी इमारत ज़मीन पर आ गयी और उसकी दहशत से लोग 73 ज़बान बोलने लगे उससे पहले तक सिर्फ एक ज़बान सुरयानी ही बोली जाती थी_*

*📕 तफ़सीरे खज़ायेनुल इर्फ़ान,पारा 14,रुकू 10*

*_नमरूद ने हज़रत इब्राहीम खलीलुल्लाह को आग में डालने के लिए जो आग जलवाई थी उसकी लपटें कई सौ फीट ऊपर तक जाती थी उसी आग की तपिश से एक मच्छर के पर व पैर जल गए,इस मच्छर ने रब की बारगाह में दुआ की तो मौला ने फरमाया कि ग़म ना कर मैं तेरे ज़रिये ही नमरूद को हलाक़ करवाऊंगा,ये मच्छर एक दिन नमरूद की नाक के जरिए उसके दिमाग में घुस गया और अंदर ही अंदर काटना शुरू किया,उस तक़लीफ से मौत हज़ार दर्जे बेहतर थी,जब वो काटता तो नमरूद अपने सर पर चप्पलों से मारा करता,दीवार में सर मारता और इसी तरह तड़प तड़प कर मरा_*

*📕 तफ़सीरे नईमी,जिल्द 3,सफह 68*
*📕 मलफूज़ाते निज़ामुद्दीन औलिया,स 162*

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