हौज-ए-कौसर

☆हौज-ए-कौसर…!!

Astighfar

 

हौजे कौसर जो हमारे नबी-ए-करिम (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) को दिया गया है हक है।,
उसकी लम्बाई एक महीना का रास्ता है और उतनी ही चौड़ाई है!,

उसके किनारे सोने के है उन पर मोती के कुब्बे बने है उसकी तह मुश्क की है।,
उसका पानी दुध से ज्यादा सफेद और शहद से ज्यादे मिठा है और मुश्क से ज्यादा खुश्बुदार है।,

जो उसका पानी एक बार पिएगा कभी
प्यासा न होगा।,
उसपर पानी पिने के बरतन सितारो से भी गिनती मे ज्यादा है।,
उसमे जन्नत से दो नाले गिरते है एक सोने का दुसरे चांदी का !,
📖(कानुने शरिअत, हिस्सा-1, पेज-23-24)

हदीस : रसुलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फरमाया —

“जो शख्स अल्लाह और क्यामत के दिन पर ईमान रखता हो ओ अपने पड़ोसी (Neighbour) को तकलीफ न पहुंचाये,

और मै तुम्हे औरतों (women) के बारे भलाई की वसीयत
करता हुं क्योंकी, ओ पस्ली (Rib) से पैदा की गई है और पस्ली मे सबसे ज्यादा टेढ़ा (Crooked) उसके उपर का हिस्सा है।,

अगर तुम उसे सिधा करना चाहोगे तो उसे तोड़ डालोगे और उसे छोड़ दोगे तो ओ टेढ़ी (Crooked) ही बाकी रह जाएगी, इस लिए मै तुम्हे औरतों के बारे मे अच्छे सुलुक की वसीयत करता हुं।,

📖(बुखारी शरिफ, 67 किताब अल निकाह : 80, बाब अल वसा बिल नसाह)

हदीस : एक सहाबी ने अर्ज की,आए अल्लाह के नबी! (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) मेरे घर मे बरकत नही क्या करूं??”
आप (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फरमाया–

“अपने घर के दरवाजे पर पर्दा लगाओ, सहाबी ने ऐसा ही किया कुछ दिन बाद फिर आए अर्ज किया:-

“अब मेरे घर बहुत बरकत है! लेकीन पर्दे से क्या वास्ता??
रसुलल्लाह! (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फरमाया के, “आपके घर के पास से बेनमाजी गुजरते है उनकी
नहुसत घर पे पड़ती थी और बरकत निकल जाती थी”

 सोचो जिस घर मे ही बेनमाजी हो तो कैसे बरकत हो??,
प्यारे आका मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फरमाया–
“जिस मोमीन बन्दे की आंखो से अल्लाह तआला के खौफ से आंसु टपक पड़े ख्वाह ओ आंसु मख्खी के सर के बराबर क्यों न हो तो अल्लाह तआला उस पर जहन्नम की आग हराम फरमा देगा….!!
📖 (इब्ने मजा’ किताब उल जोहाद, हदीस-4197)

सबक : बेनमाजी की नहुसत से घर की बरकत निकल जाती है….!!

फजाइल-ए-दुरूद: 10 रहमत और 10 गुनाह मुआफ,…!!

हदीस : हजरत अनस बिन मलिक (रजी अल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि,
रसुलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फरमाया–

“जो शख्स मुझपर एक मर्तबा दुरूद भेजेगा तो अल्लाह तआला उस पर 10 मर्तबा रहमत भेजेगा और 10 गुनाह मुआफ होंगे और 10 दर्जा बुलंद होंगे।”

📖(सुनन अन नसाई, वो-1, नम्बर, 1300 (साहीह) दुरूद शरिफ,)

 अल्लाहुमा सल्ली अला मुहम्मद व अला आली मुहम्मद
कमा सलैता अला इब्राहीमा व अला आली इब्राहीमा इन्नका हमीदुम मजीद,

❇ अल्लाहुमा बारिक अला मुहम्मदीव व अला आली मुहम्मदीन कमा बाराक्ता अला इब्राहीमा व अला आली इब्राहीमा इन्का हमीदुम मजीद”,

🌀तर्जमा :
ऐ अल्लाह! सलामती और रहमत अता फरमा !!
नबी-ए-करिम (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) पर और उनकी आल पर

जिस तरह तुने सलामती अता फरमाई इब्राहीम (अलैहीस्सलाम) पर और उनकी आल पर,..
बेशक तु बड़ी तारिफ वाला और बुजुर्गी वाला है!!

ऐ अल्लाह!! बरकत अता फरमा!!
नबी-ए-करिम (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) पर और उनकी आल पर

जिस तरह तुने बरकत नाजील फरमाई इब्राहीम (अलैहीस्सलाम) पर और उनकी आल पर,,
बेशक तु बड़ी तारिफ वाला और बुजुर्गी वाला है।…

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